विमानन सेवा क्षेत्र में एयर डेक्कन ने क्रांतिकारी बदलाव किया। यह कंपनी हवाई सेवा क्षेत्र में साल 2003 में उतरी। इस कंपनी के मालिक जीआर गोपीनाथ ने यात्रियों को ट्रेन किराए की कीमत में उड़ान की पेशकश की। एटीआर 42 और छोटे शहरों को जोड़ने वाले 72 एयरक्राफ्ट के साथ एयर डेक्कन आम यात्रियों की पसंदीदा एयरलाइन बन गई। लेकिन तेजी से विस्तारित हो रहे विमानन क्षेत्र की चुनौतियों को यह कंपनी संभाल नहीं पाई। साल 2008 में किंगफिशर ने इसका अधिग्रहण कर लिया। फिर इसका नाम सिम्पलीफ्लॉय डेक्कन और फिर किंगफिशर रेड हुआ। किंगफिशर के बंद होने के बाद एयर डेक्कन की कहानी भी समाप्त हो गई।
नवंबर 2005 गो एयर के नाम से विमानन सेवा क्षेत्र में प्रवेश करने वाली गो एयर का नाम मई 2021 में बदलकर गो फर्स्ट कर दिया गया। 2025 आते-आते यह कंपनी भी बंद हो गई। गो फर्स्ट को इंजन की समस्या इतनी बढ़ गई कि इसके कई विमान उड़ ही नहीं सके। कंपनी का कहना था कि उसके पास कुल 54 विमान हैं। इनमें से 28 विमान ग्राउंडेड हैं। जनवरी 2025 को एनसीएलटी ने गो फर्स्ट के लिक्विडेशन का आदेश दिया। इसका मतलब था कि अब कंपनी अपनी संपत्तियां बेचकर कर्ज चुकाने का काम करेगी। इस आदेश के साथ ही 17 साल से ज्यादा समय तक उड़ान भरने वाली गो फर्स्ट एयरलाइन की कहानी खत्म हो गई।
भारतीय हवाई सेवा में जेट एयरवेज वर्षों तक एक विश्वसनीय नाम बना रहा। हवाई सेवा के क्षेत्र में साल 1993 में इसकी एंट्री हुई और धीरे-धीरे यह निजी क्षेत्र के सबसे प्रमुख कंपनी बन गई। साल 2007 में इसने सहारा का अधिग्रहण भी किया। आगे के वर्षों में सस्ती विमान कंपनियों के आने से जेट एयरवेज पर दबाव बढ़ने लगा और इस पर कर्ज भी बहुत ज्यादा हो गया। कर्ज और वेतन की चुनौतियों को यह कंपनी संभाल नहीं पाई और इसे अपना ऑपरेशन बंद करना पड़ा। अप्रैल 2019 में इसके सभी विमान ग्राउंड हो गए। नवंबर 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने लिक्विडेशन का फैसला सुनाया। इसके बाद यह कंपनी अतीत का हिस्सा हो गई।
विजय माल्य की कंपनी किंगफिशर एयरलाइन जिस तेजी के साथ भारतीय आकाश में अपने पंख फैलाए उसी तेजी के साथ इसका पतन भी हो गया। हवाई सेवा के क्षेत्र में धमाकेदार एंट्री करने वाली यह विमानन कंपनी अपने ग्लैमर, शानदार लाउंज, लजीज व्यंजन और टॉप-टायर सेवाओं के लिए जानी गई। इस एयर लाइन में यात्रा करना लोगों को अलग अहसास का अनुभव कराता था।
आगे चलकर इसने एयर डेक्कन को खरीद लिया लेकिन ईंधन की बढ़ती कीमतों, अत्यधिक खर्चे एवं अन्य चुनौतियों के बीच यह कंपनी सामांजस्य नहीं बिठा पाई। कुप्रबंधन और कर्मचारियों को समय पर वेतन न मिलने की वजह से कंपनी के विमान एक-एक कर ग्राउंड होने लगे। कंपनी पर भारी कर्ज को देखते हुए सरकार ने अक्टूबर 2012 में इसका लाइसेंस निलंबित कर दिया। इसके साथ ही किंगफिशर एयर लाइन के सफर पर विराम लग गया।
हालांकि, यह कंपनी अपनी सेवा लंबे समय तक जारी नहीं रख पाई। अप्रैल 2017 में जेट एयरवेज ने 1450 करोड़ रुपए में इसे खरीद लिया। इस अधिग्रहण के बाद एयर सहारा का नाम जेट लाइफ हो गया। अप्रैल 2019 में जेट एयरवेज बंद हो गई और इसके साथ ही एयर सहारा की विरासत भी समाप्त हो गई।
विमानन सेवा के क्षेत्र में एयर सहारा एक बड़ा नाम था। यह एयरलाइन अपनी सस्ती सेवा के लिए जानी जाती थी। हवाई सेवा के क्षेत्र में यह 1991 में उतरी और देखते ही देखते ही यह उत्तर भारत के हवाई क्षेत्र पर इसका दबदबा बन गया। कुछ समय बाद इस एयरलाइन ने बोइंग 737 और एयरबस A320 के साथ विदेशों के लिए अपनी उड़ानें शुरू कीं।