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भारत ने बनाया दबाव, तो श्रीलंका ने 11 भारतीय मछुआरों को किया रिहा; जानें कैसे हुई वतन वापसी

Indian Fishermen released from Sri Lankan jail: भारत के दबाव में आकर श्रीलंका ने अपनी जेल से 11 भारतीय मछुआरों को रिहा कर दिया है। जिनकी वतन वापसी भी हो गई है। ये मछुआरे शनिवार की सुह चेन्नई एयरपोर्ट पहुंचे। केंद्र और राज्य सरकारों के बीच बातचीत के बाद इन मछुआरों की रिहाई संभव हुई।

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श्रीलंका की जेल से 11 भारतीय मछुआरे रिहा। (सांकेतिक तस्वीर)

India-Sri Lanka: श्रीलंका की जेल में बंद 11 भारतीय मछुआरों को रिहा कर दिया गया है। इनमें से दो को 80,000 रुपये का जुर्माना भरने के बाद छोड़ा गया। सभी मछुआरे शनिवार को चेन्नई एयरपोर्ट पहुंचे। यह घटना भारत और श्रीलंका के बीच सीमा पर मछली पकड़ने को लेकर चल रहे विवाद का हिस्सा है।

नाव लेकर समुद्र में मछली पकड़ने गए थे मछुआरे

2 फरवरी को तमिलनाडु के रामनाथपुरम जिले के मंडपम इलाके से 10 मछुआरे नाव लेकर समुद्र में मछली पकड़ने गए थे। श्रीलंकाई नौसेना ने उन्हें थलाईमन्नार के पास सीमा पार करने के आरोप में पकड़ लिया। इसके बाद उन्हें मन्नार कोर्ट में पेश किया गया और वावुनिया जेल भेज दिया गया। इनमें से एक मछुआरे, प्रताप को दूसरी बार पकड़ा गया था, जिसके चलते उसे दो साल की सजा सुनाई गई।

इसी तरह, 19 फरवरी को रामेश्वरम के चार मछुआरे थलाईमन्नार के पास मछली पकड़ रहे थे। श्रीलंकाई नौसेना ने उन्हें भी सीमा पार करने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया और वावुनिया जेल में डाल दिया। इसके बाद, 23 फरवरी को रामेश्वरम के चार अन्य मछुआरे छोटी मोटरबोट में मछली पकड़ते हुए पकड़े गए। उन्हें भी श्रीलंकाई नौसेना ने गिरफ्तार कर मन्नार कोर्ट में पेश किया और जेल भेज दिया।

बातचीत के बाद इन मछुआरों की रिहाई हुई संभव

केंद्र और राज्य सरकारों के बीच बातचीत के बाद इन मछुआरों की रिहाई संभव हुई। 2 फरवरी को पकड़े गए 10 में से 9 मछुआरों को 14 मार्च को रिहा कर दिया गया। 19 फरवरी को पकड़े गए चार में से एक मछुआरे कैनेडी को 80,000 रुपये का जुर्माना भरने के बाद उसी दिन रिहा किया गया। वहीं, 23 फरवरी को पकड़े गए चार में से जयप्रकाश को भी 80,000 रुपये का जुर्माना भरने के बाद 14 मार्च को छोड़ दिया गया। प्रताप अभी भी जेल में है।

रिहाई के बाद इन 11 मछुआरों को कोलंबो में भारतीय दूतावास के हवाले किया गया। वहां उनकी मेडिकल जांच हुई और आपातकालीन पासपोर्ट के साथ हवाई टिकट दिए गए। इसके बाद उन्हें एयर इंडिया के विमान से चेन्नई भेजा गया। चेन्नई एयरपोर्ट पर नागरिकता और कस्टम जांच पूरी होने के बाद तमिलनाडु मत्स्य विभाग के अधिकारियों ने उनका स्वागत किया। फिर उन्हें अलग-अलग वाहनों से रामेश्वरम और मन्नार क्षेत्रों में उनके घरों तक पहुंचाया गया।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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