नील नदी विक्टोरिया झील (जो आज के केन्या, तंजानिया और युगांडा में स्थित है) में बहने वाली नदियों से निकलती है। नील नदी भूमध्य रेखा के दक्षिण से निकलती है। नील नदी तीन प्रमुख धाराओं से बनती है: नीली नील और अटबारा, जो इथियोपिया के उच्चभूमि से बहती हैं, और सफेद नील जिसकी मुख्य धाराएं विक्टोरिया और अल्बर्ट झीलों में बहती हैं। श्वेत नील नदी विक्टोरिया झील से शुरू होकर युगांडा और दक्षिण सूडान से होकर बहती है, जबकि नीली नील नदी इथियोपिया की ताना झील से शुरू होकर दक्षिण-पूर्व से सूडान में प्रवेश करती है। दोनों नदियां सूडान की राजधानी खार्तूम में मिलती हैं।
नील नदी पूर्वोत्तर अफ्रीका के 11 देशों से होकर बहती है और भूमध्य सागर में गिरती है। नील नदी अफ्रीका के 11 देशों से होकर गुजरती है, जिनमें मिस्र, सूडान, दक्षिण सूडान, इथियोपिया, युगांडा, केन्या, तंजानिया, रवांडा, बुरुंडी, कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (DRC) और इरिट्रिया शामिल हैं।
नील नदी उत्तर-पूर्वी अफ्रीका से निकलकर उत्तर दिशा में बहते हुए मिस्र में एक विशाल त्रिभुजाकार डेल्टा (Nile Delta) बनाती है और अंत में भूमध्य सागर (Mediterranean Sea) में जाकर गिरती है, जहाँ यह दो मुख्य शाखाओं (रोसेटा और डेमिएटा) में बंट जाती है।
नील नदी पूर्वी और उत्तरी अफ्रीका के 11 देशों में 300 मिलियन (30 करोड़) से अधिक लोगों के जीवन का आधार है, जो इसे मानव अस्तित्व के लिए सबसे महत्वपूर्ण नदियों में से एक बनाती है, खासकर मिस्र, सूडान और इथियोपिया जैसे देशों में, जहाँ इसकी आबादी का एक बड़ा हिस्सा निर्भर करता है, खासकर मिस्र की 95% आबादी नील नदी के 12 मील के दायरे में रहती है।
नील नदी के किनारे प्राचीन मिस्र सभ्यता का विकास हुआ। नदी ने उपजाऊ मिट्टी और पानी प्रदान किया, जिसने कृषि और सभ्यता के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यूनानी इतिहासकार हेरोडोटस ने मिस्र को "नील नदी का उपहार" कहा था, क्योंकि नदी ने सभ्यता के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मिस्र की सभ्यता लगभग 3100 ईसा पूर्व में नील नदी के किनारे विकसित हुई थी और यह दुनिया की सबसे शक्तिशाली और उन्नत सभ्यताओं में से एक थी। यह सभ्यता अपनी वास्तुकला (जैसे पिरामिड), विज्ञान, धार्मिक विचारों और शासन प्रणाली के लिए जानी जाती थी। मिस्र के राजा को फिरौन कहा जाता था, जो न केवल एक शक्तिशाली शासक बल्कि एक धार्मिक नेता भी होता था।
प्राचीन काल में नील नदी के स्रोत का पता नहीं था; मिस्रवासी इसे स्वर्ग या एक रहस्यमयी भूमि से आते मानते थे, लेकिन हेरोडोटस जैसे विद्वान भी सटीक स्रोत नहीं जान पाए थे। अन्य नदियों के विपरीत, नील नदी का दक्षिण से उत्तर की ओर बहना और गर्म मौसम में बाढ़ लाना यूनानियों और मिस्रवासियों के लिए एक रहस्य था। हालिया शोध से पता चला है कि पिरामिडों के पत्थरों को लाने के लिए नील नदी की एक प्राचीन शाखा 'अहरामत नदी' का उपयोग किया जाता था, जो अब सूख चुकी है।
नील नदी को कई नामों से जाना जाता है, जिनमें प्रमुख हैं अरबी में बहार अल-नील (Bahr al-Nil) या नहर अल-नील, और प्राचीन मिस्रवासी इसे ह'पी (Ḥ'pī) या इटेरू (iteru) कहते थे, जिसका अर्थ है "महान नदी" या "काला", जबकि आधुनिक नाम ग्रीक शब्द 'नीलोस' (नदी घाटी) से आया है। इसे "अफ्रीकी नदियों का जनक" भी कहा जाता है।