प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को लोकसभा में ऑपरेशन सिंदूर पर बोलते हुए विपक्ष पर जमकर निशाना साधा। पीएम मोदी ने एक ओर जहां ऑपरेशन सिंदूर पर बात की तो वहीं दूसरी ओर कांग्रेस पर दुष्प्रचार का भी आरोप लगया। पीएम मोदी ने आज सदन में साफ कर दिया कि सीजफायर में किसी भी देश का हाथ नहीं है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि दुनिया के किसी भी नेता ने 'ऑपरेशन सिंदूर' को नहीं रुकवाया। उन्होंने कहा कि 9 मई की रात और 10 मई की सुबह हमने पाकिस्तान की सैन्य शक्ति को तहस-नहस कर दिया था। आज पाकिस्तान भी जान गया है कि भारत का हर जवाब पहले से ज्यादा तगड़ा होता है। उसे ये भी पता है कि भविष्य में नौबत आई तो भारत आगे कुछ भी कर सकता है। इसलिए मैं फिर से लोकतंत्र के इस मंदिर में दोहराना चाहता हूं कि 'ऑपरेशन सिंदूर' जारी है। अगर पाकिस्तान ने दुस्साहस की, कल्पना की तो, उसे करारा जवाब दिया जाएगा।
पीएम मोदी के संबोधन की 10 बड़ी बातें
- पाकिस्तान दशकों तक युद्ध और छद्म युद्ध करता रहा, लेकिन कांग्रेस सरकारों ने न तो सिंधु जल समझौते की समीक्षा की, न ही नेहरू जी की उस बड़ी गलती को कभी सुधारा। लेकिन अब भारत ने वह पुरानी गलती सुधारी है — ठोस निर्णय लिया है। नेहरू जी द्वारा किया गया वह ऐतिहासिक ब्लंडर — सिंधु जल समझौता — अब राष्ट्रहित और किसानों के हित में abeyance में रख दिया गया। देश का अहित करने वाला यह समझौता अब इस रूप में आगे नहीं चल सकता। भारत ने साफ कर दिया है — खून और पानी साथ-साथ नहीं बह सकते।
- दुनिया के किसी भी नेता ने भारत को ऑपरेशन रोकने के लिए नहीं कहा। 9 तारीख की रात को अमेरिका के उपराष्ट्रपति ने मुझसे बात करने का प्रयास किया... वो घंटे भर से कोशिश कर रहे थे लेकिन मेरी सेना के साथ बैठक चल रही थी, इसलिए मैंने उनका फोन उठा नहीं पाया। बाद में मैंने कॉल बैक किया। फिर अमेरिका के उपराष्ट्रपति जी ने मुझे बताया कि पाकिस्तान बहुत बड़ा हमला करने वाला है। इस पर मैंने जवाब दिया कि अगर पाकिस्तान का ये इरादा है, तो उसे बहुत महंगा पड़ेगा। अगर पाकिस्तान हमला करेगा, तो हम बड़ा हमला कर जवाब देंगे। आगे मैंने कहा था, 'हम गोली का जवाब गोले से देंगे।
- 1965 की जंग में हाजीपीर पास को हमारी सेना ने वापस जीत लिया था, लेकिन कांग्रेस ने उसे फिर लौटा दिया। 1971 में पाकिस्तान के 93 हज़ार फौजी हमारे पास बंदी थे, और पाकिस्तान का हज़ारों वर्ग किलोमीटर क्षेत्र हमारी सेना के कब्ज़े में था। उस दौरान अगर थोड़ी सी दूरदृष्टि और समझ होती, तो PoK को वापस लेने का निर्णय लिया जा सकता था। इतना सब कुछ सामने होने के बावजूद, कम से कम करतारपुर साहिब को तो ले सकते थे — वो भी नहीं कर पाए।
- बीते एक दशक में ‘मेक इन इंडिया’ हथियारों ने सेना को नई ताकत दी, और इस ऑपरेशन में उन्होंने निर्णायक भूमिका निभाई। एक दशक पहले, भारत के लोगों ने संकल्प लिया था कि हमारा देश सशक्त, आत्मनिर्भर और आधुनिक राष्ट्र बनेगा। रक्षा और सुरक्षा समेत हर क्षेत्र में बदलाव के लिए एक के बाद एक ठोस कदम उठाए गए। सेना और देश में जो सुधार हुए हैं, वो आजदी के बाद पहली बार हुए हैं।
- कल हमारे सुरक्षा बलों ने ऑपरेशन 'महादेव' को अंजाम दिया और पहलगाम हमले के तीनों आतंकियों को मार गिराया। लेकिन कल यहां पूछा गया कि आज ही क्यों हुआ, क्या ऑपरेशन के लिए सावन महीने का सोमवार ढूंढा गया था। पिछले कई सप्ताह से पूछा जा रहा था कि पहलगाम के आतंकियों का क्या हुआ और जब आतंकियों को मार गिराया गया तो कल ही क्यों हुआ... क्या हाल है इन लोगों का...कांग्रेस का भरोसा पाकिस्तान के रिमोट कंट्रोल से बनता है… और बदलता भी है। कांग्रेस अपने नए सदस्य से कहलवाती है कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ तमाशा था। जिस भीषण आतंकी घटना में 26 लोगों को मौत के घाट उतार दिया गया — उस पर ये तेजाब छिड़कने वाला पाप है। सेना का विरोध और सेना के प्रति नकारात्मकता — ये कांग्रेस का पुराना रवैया रहा है। अभी देश ने कारगिल विजय दिवस मनाया, लेकिन देश जानता है कि कांग्रेस ने अपने कार्यकाल में और आज तक न तो कारगिल की विजय को अपनाया है, न ही कारगिल विजय दिवस मनाया है, और न ही कारगिल का गौरव किया है।
- पहलगाम हमले के बाद जब हमारे बीएसएफ का एक जवान पाकिस्तान के कब्जे में गया, तो इन्हें लगा कि अब मोदी फंस जाएगा। अब तो मोदी की फजीहत जरूर होगी...और इनके इकोसिस्टम ने सोशल मीडिया पर तमाम कथाएं वायरल कीं — बीएसएफ जवान का क्या होगा, उसके परिवार का क्या होगा? बीएसएफ का वो जवान भी आन, बान और शान के साथ वापस आया।
- 10 मई को भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत हो रहे एक्शन को रोकने की घोषणा की, इसे लेकर यहां भांति भांति की बातें की गईं। ये वहीं प्रोपेगेंडा है जो सीमा पार से यहां फैलाया गया है। कुछ लोग सेना द्वारा दिए गए तथ्यों की जगह पाकिस्तान के झूठे प्रचार को आगे बढ़ाने में जुटे हुए थे, जबकि भारत का रूख हमेशा स्पष्ट रहा था।
- दुनिया के देशों का समर्थन मिला, लेकिन ये दुर्भाग्य है कि मेरे देश के वीरों के पराक्रम को कांग्रेस का समर्थन नहीं मिला। 22 अप्रैल के आतंकी हमले के बाद 3—4 दिन में ही ये उछल रहे थे, और कहना शुरू किया कि कहां गई 56 इंच की छाती, मोदी तो खो गया... ये मजा ले रहे थे। पहलगाम के निर्दोष लोगों की हत्या में भी वो अपनी राजनीति तरास रहे थे।
- यहां पर विदेश नीति को लेकर भी काफी बातें कही गईं। दुनिया के समर्थन को लेकर भी काफी बातें कही गईं। दुनिया में किसी भी देश ने भारत को अपनी सुरक्षा में कार्रवाई करने से रोका नहीं है। 193 देशों में से सिर्फ 3 देश ने पाकिस्तान के समर्थन में बयान दिया था। QUAD हो या BRICS हो... दुनियाभर से भारत को समर्थन मिला।
- आतंक की घटनाएं पहले भी देश में होती थीं, लेकिन तब आतंकियों के मास्टरमाइंड निश्चिंत रहते थे और आगे की तैयारी में लगे होते थे... क्योंकि उन्हें पता था, कुछ नहीं होगा। लेकिन अब मास्टरमाइंड को नींद नहीं आती। उन्हें पता है कि अब भारत आएगा... और मारकर जाएगा। यह न्यू नॉर्मल भारत ने सेट कर दिया है। हमने सिंदूर से लेकर सिंधु तक, पाकिस्तान पर कार्रवाई की है।
