World Vitiligo Day: शरीर पर सफेद दाग दिखना कई लोगों के लिए चिंता की बात बन जाता है। इससे भी बड़ी परेशानी तब होती है, जब लोग इसके बारे में गलत बातें फैलाने लगते हैं। आज भी कई लोग मानते हैं कि सफेद दाग (विटिलिगो) छूने से फैलता है या फिर यह कुष्ठ रोग (कोढ़) की निशानी है। लेकिन सच इससे बिल्कुल अलग है। सफेद दाग, जिसे डॉक्टरों की भाषा में विटिलिगो कहा जाता है, एक ऐसी बीमारी है जिसका संबंध शरीर की इम्यूनिटी (vitiligo and immunity) से होता है। यही वजह है कि लोगों को इसके बारे में सही जानकारी देना बेहद जरूरी है। अमृता हॉस्पिटल, फरीदाबाद के सीनियर कंसल्टेंट और प्रोफेसर (डर्मेटोलॉजी) डॉ. राजेश वर्मा बताते हैं कि यह सिर्फ रंग बदलने की समस्या नहीं, बल्कि शरीर के अंदर होने वाले बदलावों से जुड़ी एक मेडिकल स्थिति है।
आखिर क्यों पड़ते हैं सफेद दाग
हमारी त्वचा का रंग एक खास तरह की कोशिकाओं की वजह से होता है। ये कोशिकाएं त्वचा में रंग बनाने का काम करती हैं। जब किसी कारण से ये कोशिकाएं कमजोर हो जाती हैं या खत्म होने लगती हैं, तब त्वचा पर सफेद धब्बे दिखाई देने लगते हैं। यही स्थिति विटिलिगो कहलाती है।इम्यूनिटी से क्या है इसका संबंध
डॉ. राजेश वर्मा बताते हैं कि सामान्य तौर पर हमारी इम्यूनिटी शरीर को बीमारियों और संक्रमण से बचाती है। लेकिन विटिलिगो में शरीर की सुरक्षा प्रणाली गलती से उन्हीं कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाने लगती है जो त्वचा को रंग देती हैं। इसका नतीजा यह होता है कि त्वचा का रंग धीरे-धीरे कम होने लगता है और सफेद दाग उभर आते हैं। इसलिए विटिलिगो को इम्यूनिटी से जुड़ी बीमारी माना जाता है।
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किन लोगों में बढ़ सकता है खतरा
कुछ लोगों में यह समस्या परिवार से भी जुड़ी हो सकती है। अगर घर में किसी को पहले से विटिलिगो या इम्यूनिटी से जुड़ी कोई बीमारी रही है, तो जोखिम थोड़ा बढ़ सकता है। इसके अलावा बहुत ज्यादा तनाव, त्वचा पर चोट लगना, तेज धूप से त्वचा का झुलसना या कुछ रसायनों के संपर्क में आना भी इस समस्या को शुरू करने वाले कारण बन सकते हैं।
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सफेद दाग को लेकर सबसे बड़ी गलतफहमी
विटिलिगो के मरीजों को अक्सर समाज में गलत नजर से देखा जाता है। कई लोग सोचते हैं कि यह छूने से फैलने वाली बीमारी है, जबकि ऐसा बिल्कुल नहीं है। डॉ. वर्मा साफ कहते हैं कि सफेद दाग किसी के साथ बैठने, खाना खाने, हाथ मिलाने या संपर्क में आने से नहीं फैलता। इसका कुष्ठ रोग से भी कोई संबंध नहीं है। दोनों बीमारियां पूरी तरह अलग हैं।इलाज संभव है घबराने की जरूरत नहीं
आज विटिलिगो के इलाज के कई विकल्प मौजूद हैं। सही समय पर डॉक्टर से सलाह लेने पर बीमारी को बढ़ने से रोका जा सकता है और त्वचा की स्थिति में सुधार लाया जा सकता है। इसलिए सफेद दाग दिखने पर घरेलू नुस्खों या अफवाहों पर भरोसा करने की बजाय त्वचा रोग विशेषज्ञ से संपर्क करना बेहतर होता है।जागरूकता और अपनापन भी है जरूरी
विश्व विटिलिगो दिवस का मकसद सिर्फ बीमारी के बारे में जानकारी देना नहीं है, बल्कि इससे जुड़े लोगों को समाज में सम्मान और स्वीकार्यता दिलाना भी है। याद रखिए, सफेद दाग कोई छूत की बीमारी नहीं है। ऐसे लोगों को सहारे और समझ की जरूरत होती है, न कि भेदभाव की।ॉ
