Readआजकल महिलाओं में थायरॉइड की समस्या तेजी से बढ़ रही है। लेकिन चिंता की बात यह है कि ज्यादातर मामलों में इसके लक्षणों को सामान्य हार्मोनल बदलाव, तनाव, भागदौड़ भरी जिंदगी या थकान समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता है। महिलाओं के शरीर में किशोरावस्था, पीरियड्स, प्रेग्नेंसी और मेनोपॉज जैसे कई चरणों में हार्मोनल बदलाव होते रहते हैं, इसलिए कई महिलाएं इन संकेतों को नॉर्मल मान लेती हैं।
गुरुग्राम के सीके बिरला हॉस्पिटल में प्रसूति एवं स्त्रीरोग विभाग की निदेशक डॉ. आस्था दयाल, कहती हैं कि थकान महसूस होना, अचानक वजन बढ़ना, डिप्रेशन, पीरियड्स में अनियमितता, बाल झड़ना, नींद ना आना और ध्यान केंद्रित करने में परेशानी जैसे लक्षण अक्सर महिलाओं की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा मान लिए जाते हैं। जबकि ये हाइपोथायरॉइडिज्म जैसी थायरॉइड बीमारी के संकेत हो सकते हैं, जो महिलाओं में ज्यादा देखने को मिलती है।
डॉ. आस्था के मुताबिक थायरॉइड ग्लैंड शरीर के मेटाबॉलिज्म, प्रजनन हार्मोन, ऊर्जा उत्पादन और कई जरूरी शारीरिक प्रक्रियाओं को नियंत्रित करती है। जब थायरॉइड हार्मोन का संतुलन बिगड़ता है, तो इसका असर पीरियड्स, फर्टिलिटी, मूड, दिल और मेटाबॉलिज्म पर पड़ता है। लेकिन क्योंकि इसके लक्षण धीरे-धीरे बढ़ते हैं, महिलाएं अक्सर इन्हें अपनी सामान्य स्थिति मानकर अनदेखा करती रहती हैं।
प्रेग्नेंसी और डिलीवरी के बाद का समय भी ऐसा दौर होता है जब थायरॉइड की समस्या आसानी से नजरअंदाज हो सकती है। कई महिलाएं डिलीवरी के बाद होने वाली थकान, मूड स्विंग्स और बाल झड़ने को सामान्य पोस्टपार्टम बदलाव समझ लेती हैं, जबकि इसके पीछे पोस्टपार्टम थायरॉइडाइटिस या हाइपोथायरॉइडिज्म हो सकता है।
डॉ. आस्था दयाल के मुताबिक एक बड़ी वजह यह भी है कि महिलाएं अक्सर अपने परिवार की जरूरतों को अपनी सेहत से ज्यादा प्राथमिकता देती हैं। वे तब तक डॉक्टर के पास नहीं जातीं जब तक समस्या गंभीर ना हो जाए या फर्टिलिटी और मेटाबॉलिज्म से जुड़ी परेशानियां सामने ना आने लगें।
अच्छी बात यह है कि अगर थायरॉइड की बीमारी समय रहते पहचान ली जाए, तो इसे आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है। इसलिए हर महिला को अपने शरीर में होने वाले बदलावों को गंभीरता से लेना चाहिए। अगर कोई लक्षण कई हफ्तों तक बना रहे या रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करने लगे, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
विशेषज्ञों के अनुसार जिन महिलाओं को परिवार में थायरॉइड की हिस्ट्री, PCOS, डायबिटीज या दूसरी हार्मोनल समस्याएं हों, उन्हें नियमित थायरॉइड टेस्ट जरूर करवाना चाहिए, ताकि बीमारी का समय पर पता लगाया जा सके।
