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World Obesity Day 2023: साल 2035 तक दुनिया की आधी आबादी मोटापे से जूझेगी, भारत में बच्चों पर भी खतरा

  • Authored by: दीपक पोखरिया
  • Updated Mar 4, 2023, 11:19 AM IST

World Obesity Day 2023: रिपोर्ट के मुताबिक साल 2020 और साल 2035 के बीच बच्चों में मोटापा 100 फीसदी बढ़ने की उम्मीद है। अगर बात भारत की करें तो साल 2035 तक बच्चों में मोटापे के मामलों में 9 फीसदी बढ़ोतरी हो सकती है। मोटोपा बढ़ने के साथ ही बच्चे डायबिटीज और हार्ट से संबंधित बीमारियों के भी शिकार हो सकते हैं।

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World Obesity Day 2023

Photo : iStock

World Obesity Day 2023: हर साल पूरी दुनिया में 4 मार्च को विश्व मोटापा दिवस (World Obesity Day 2023) के रूप में मनाया जाता है। बदलते लाइफस्टाइल और गलत तरीके के खानपान के कारण मोटापा आज एक आम समस्या या एक बीमारी बन गई है। मोटापे की समस्या से आज भारत समेत दुनिया के सभी देशों के लोग जूझ रहे हैं। इस साल विश्व मोटापा दिवस की थीम है "बदलते परिप्रेक्ष्य: चलो मोटापे के बारे में बात करते हैं।" इस थीम का उद्देश्य मोटापे से जुड़े कलंक को दूर करना और लोगों को सहयोग करने, चर्चा करने और समस्या का समाधान खोजने के लिए प्रोत्साहित करना है।

वहीं विश्व मोटापा दिवस पर आई वर्ल्ड ओबेसिटी फेडरेशन (World Obesity Federation) की एक नई रिपोर्ट के मुताबिक साल 2035 तक दुनियाभर की आधी आबादी मोटापे की शिकार हो सकती है। इसका मतलब ये है कि सालल 2035 तक हर 4 में से 1 शख्स मोटापे का शिकार हो सकता है। करीब 51 फीसदी लोगों का वजन उनकी उम्र की तुलना में ज्यादा हो सकता है।

बच्चों और किशोरों में भी बढ़ रहा मोटापा

इसके अलावा ये रिपार्ट बच्चों और किशोरों में बढ़ रहे मोटापे को लेकर काफी बड़ी चिंता जताती है। रिपोर्ट के मुताबिक साल 2020 और साल 2035 के बीच बच्चों में मोटापा 100 फीसदी बढ़ने की उम्मीद है। अगर बात भारत की करें तो साल 2035 तक बच्चों में मोटापे के मामलों में 9 फीसदी बढ़ोतरी हो सकती है। मोटोपा बढ़ने के साथ ही बच्चे डायबिटीज और हार्ट से संबंधित बीमारियों के भी शिकार हो सकते हैं।

रिपोर्ट में ये भी बताया गया है कि कम आय वाले देशों में मोटापे की दर खास तौर से काफी तेजी से बढ़ रही है। मोटापा कम करने के लिए कई लोग कम खाना या फिर डाइटिंग करते हैं, जो कि कोई सही उपाय नहीं है। डॉक्टर्स का भी मानना है करि मोटापा आज पूरी दुनिया के सामने एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी है और इससे लोगों के स्वास्थ्य पर बड़ संकट खड़ा हो गया है।

दीपक पोखरिया
दीपक पोखरियाauthor

पहाड़ से हूं, इसलिए घूमने फिरने का शौक है। दिल्ली-नोएडा से ज्यादा उत्तराखंड में ही मन लगता है। कई मीडिया संस्थानों से मेरी करियर यात्रा गुजरी है और मई 2022 से Times Network में timesnowhindi.com के साथ जुड़ा हूं। यहां शुरूआत खबरों से हुई और अब नजरें फीचर टीम के जरिए पाठकों की पसंद के लेख लिखने पर रहती है। घुमक्कड़ी पसंद होने की वजह से मुख्य जिम्मेदारी timesnowhindi.com/travel की है। वैसे मैं देवभूमि उत्तराखंड के नैनीताल से हूं और यहीं पर जन्म हुआ। पढ़ाई की शुरुआत फिरोजपुर (पंजाब) से हुई। इसके बाद लखनऊ (उत्तर प्रदेश), रामपुर (उत्तकर प्रदेश), हल्द्वानी (उत्तराखंड) होते हुए देश की राजधानी दिल्ली से पढ़ाई की। हल्द्वानी के एमबीपीजी कॉलेज से ग्रेजुएशन पूरा किया। साथ ही NIIT से GNIIT किया। इसके बाद दिल्ली से भारतीय विद्या भवन से पत्रकारिता की पढ़ाई की। मीडिया में 12 साल से ज्यादा का अनुभव। टीवी, वेबसाइट और मोबाइल ऐप में अब तक काम किया। नौकरी की शुरुआत 2011 से की। अभी टाइम्स नाऊ नवभारत में 2 से अधिक सीनियर करोस्पेंडट के पद पर हूं। यात्रा सेक्शन से जुड़ने से पहले करीब डेढ़ साल पहले तक न्यूज में ही काम किया।

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