How To Avoid Deafness In Hindi: बाहर निकलिए तो ट्रैफिक की तेज आवाज, दिन भर कानों में ईयरफोन और लगातार सुनाई देने वाले ऐसे शोर जिनपर अब हमारा ध्यान ही नहीं जाता, ये सब कहीं ना कहीं हमारे सुनने की क्षमता पर असर डालते हैं। इसी वजह से दुनिया भर में होने वाली सबसे आम दिक्कतों में से एक है सुनने और कान से जुड़ी दिक्कतें। विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट के अनुसार, साल 2050 तक विश्व में हर 4 में से एक व्यक्ति को बेहरेपन की समस्या होने का अनुमान है। इसमें सबसे अच्छी बात ये है कि लगभग 60 प्रतिशत मामलों में शुरुआती स्तर पर ही इसका इलाज किया जा सकता है। आइए जानते हैं बहरेपन के कारणों के बारे में।
बहरेपन के कारण क्या हैं (Causes Of Hearing Loss In Hindi)
बहरापन या सुनने की क्षमता में कमी हो जाने के कई कारण हो सकते हैं। इसका सबसे बड़े कारणों में से एक है तेज आवाज। तेज आवाज में लंबे समय तक रहने से कानों की नसों को नुकसान पहुंच सकता है। या कानों के भीतर के रोएं जो हिल कर आवाज का संकेत दिमाग को देते हैं उनकी क्षमता में कमी आ सकती है। इसके अलावा भी और कई कारण हो सकते हैं, जैसे इन्फेक्शन। कान में संक्रमण होने से कान के अंदरूनी हिस्सों पर बुरा असर पड़ सकता है। कुछ एंटीबायोटिक्स या अन्य दवाएं भी कानों की नसों को नुकसान पहुंचा सकती हैं और उम्र बढ़ने के साथ सुनने की क्षमता कम हो सकती है। अगर आप चाहते हैं कि आपके सुनने की क्षमता को लंबे समय तक बने रहे तो आप ये कुछ काम कर सकते हैं।
सुनने की क्षमता बनाए रखने के लिए क्या करें (How To Increase Hearing Power In Hindi)
दुनिया के 20 प्रतिशत लोग यानी करीब 1.5 बिलियन लोग कुछ हद तक अपने सुनने की क्षमता खो चुके हैं। ऐसा नहीं है कि इसका प्रभाव केवल कान तक सीमित रहता है, बल्कि ये कई शारीरिक और मानसिक दिक्कतों का भी कारण बन सकता है। हम यहां कुछ टिप्स बता रहे हैं जिनको अपनाकर बहरेपन की आशंका को कम किया जा सकता है और सुनने की क्षमता में कुछ सुधार भी हो सकता है।
1. तेज आवाज से बचें
तेज आवाज में देर तक रहना, सुनने की क्षमता में कमी एक आम कारण है। इससे बचने के लिए हेडफोन या ईयरफोन का इस्तेमाल सीमित करें और जब इस्तेमाल करें तो कम वॉल्यूम पर सुनें। हेडफोन की बजाय स्पीकर्स इस्तेमाल करें, जिससे कानों पर दबाव कम पड़े। शोर-शराबे वाली जगहों जैसे ट्रैफिक या लाउडस्पीकर वगैरह से भरसक दूर रहें। इस दौरान कानों के लिए ईयर प्लग या नॉइज कैंसिलिंग हेडफोन का इस्तेमाल करें।
2. कान का ध्यान रखें
कान को बार-बार साफ करने के लिए ईयर बड्स या किसी नुकीली चीज का इस्तेमाल न करें। यदि कान में अधिक मैल जमा हो जाए, तो डॉक्टर से सफाई करवाएं। कानों को सूखा और साफ रखें, जिससे संक्रमण का खतरा कम हो। तैराकी करते समय स्विमिंग ईयर प्लग का इस्तेमाल करें।
3. संतुलित आहार लें
विटामिन C, E और D युक्त आहार, जैसे बादाम, अखरोट, हरी सब्जियां, फल वगैरह लें। ये सुनने की क्षमता को बनाए रखने में मदद करते हैं। ओमेगा-3 फैटी एसिड वाले आहार भी कानों की सेहत के लिए फायदेमंद होते हैं।
4. कान की नियमित जांच कराएं
यदि आपको सुनने में परेशानी हो रही है तो इएनटी (ENT) डॉक्टर से नियमित रूप से चेकअप कराएं। खास तौर पर 40 साल की उम्र के बाद हर साल कानों की जांच करवाना जरूरी होती है।
इन सबके अलावा अगर आप अपनी सुनने की क्षमता को सुधारने के लिए ध्यान से सुनने की आदत डालें। जब कोई बात कर रहा हो, तो पूरी एकाग्रता से सुनें। योग और प्राणायाम का सहारा लें, मेडिटेशन तनाव को कम करने और सुनने की क्षमता को बेहतर बनाने का एक शानदार तरीका हो सकता है।
डिस्क्लेमर: इस लेख में सुझाए गए टिप्स और सलाह केवल आम जानकारी के लिए हैं, इसे पेशेवर चिकित्सकीय सलाह के रूप में नहीं लिया जा सकता है। किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी तरह का बदलाव करने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श जरूर करें।
