World Autism Awareness Day 2023: हर साल 2 अप्रैल को विश्व ऑटिज्म अवेयरनेस डे के रूप में मनाया जाता है। साल 2007 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 2 अप्रैल को वर्ल्ड ऑटिज्म अवेयरनेस डे (World Autism Awareness Day) के रूप में मनाने की ऐलान किया था। इस दिन से प्रत्ये वर्ष 2 अप्रैल को दुनियाभर में इसे मनाया जाता है। इसका उद्देश्य लोगों को ऑटिज्म जैसे भयावह बीमारी से जागरूक करना व इससे पीड़िट बच्चों को सही इलाज (Autism Awareness Day 2023) करवाना है। बता दें यह एख तरह की भूलने की बीमारी होती है। यहां तक कि बच्चे अपने नाम को लेकर भी कंफ्यूज हो जाते हैं। विशेषज्ञों की मानें तो यह एक प्रकार का मानसिक रोग होता है। एख बार इस भयावह बीमारी के चपेट में आने के बाद बच्चे के मानसिक स्वास्थ्य पर सीधा असर देखने को (Autism Symptoms In Childrens) मिलता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों की मानें तो यह तीन प्रकार ऑटिस्टिक डिसऑर्डर, एस्पर्गर सिंड्रोम और परवेसिव डेवलपमेंट डिसऑर्ड का (Autism Symptoms In Adults) होता है। यदि सही समय पर इस बीमारी का इलाज ना करवाया जाए तो यह बीमारी अपना भयावह रूप धारण कर सकती है।
यह बीमारी किसी भी उम्र के बच्चों को अपने चपेट में ले (Autism Spectrum disorder) सकती है। बच्चे का साथ माता पिता भी इस बीमारी के चपेट में आ जाते हैं। ऐसे में यदि आपको इस बीमारी के लक्षण बच्चों में दिखते हैं, तो तुरंत अपने डॉक्टर से सलाह लें और सही समय पर इसका इलाज करवाएं। इस लेख के माध्यम से आइए जानते हैं क्या होता है ऑटिज्म, इसके लक्षण, कारण और इलाज।
Whay Is Autism, क्या है ऑटिज्म
स्वास्थ्य विशेषज्ञों की मानें तो ऑटिज्म एक प्रकार का मानसिक रोग है, जिसमें बच्चे का मानसिक विकास ठीक से नहीं हो पाता है। साथ ही बच्चा दिमाग संबंधी बीमारी से ग्रस्त हो जाता है। बता दें यह तीन प्रकार ऑटिस्टिक डिसऑर्डर, एस्पर्गर सिंड्रोम और परवेसिव डेवलपमेंट डिसऑर्डर का होता है। यदि सही समय पर इसका इलाज ना करवाया जाए तो यह अपना भयावह रूप धारण कर लेता है। साथ ही इस बीमारी से ग्रस्त व्यक्ति हमेशा के लिए अपनी याद्दाश्त खो सकता है। बता दें किसी भी उम्र में व्यक्ति इस बीमारी के चपेट में आ सकता है। ऑटिज्म से पीड़ित बच्चे आसानी से किसी और के साथ घुलते-मिलते नहीं हैं और किसी भी विषय पर अपनी प्रतिक्रिया देने में काफी समय लेते हैं।
ये हैं इस बीमारी के कारण
ऑटिज्म से दुनियाभर में काफी लोग पीड़ित हैं, लेकिन इस बीमारी के पीछे वास्तविक कारण क्या है इसका पता अभी तक नहीं चल सका है। वैज्ञानिकों का मानना है कि जन्म के समय होने वाली ऑक्सीजन की कमी भी ऑटिज्म को जन्म दे सकती है। इसके अलावा वायरस या जींस भी ऑटिज्म के पीछे का कारण हो सकते हैं। डॉक्टर्स की मानें हाल ही में हुई एक स्टडी में पाया कि PCOS (Polycystic ovary syndrome) से पीड़ित महिला के गर्भ से जन्म लेने वाले बच्चे में ऑटिज्म की संभावना अधिक होती है। इसके अलावा गर्भावस्था के दौरान मां को हुई पोषक तत्वों की कमी भी बच्चे को ऑटिज्म का शिकार बना सकती है।
Autism Symptoms In Childrens, Adults, क्या हैं ऑटिज्म के लक्षण
- ऑटिज्म से पीड़ित बच्चे अपने आप में खोए रहते हैं।
- ऐसे बच्चे 1 साल आयु होने पर भी ना तो मुस्कराते हैं और ना ही कोई और प्रतिक्रिया देते हैं।
- इसका एक प्रमुख लक्षण है कि ये बच्चे किसी से नजरें मिलाकर बात नहीं कर सकते हैं।
- इस भयावह बीमारी से पीड़ित बच्चे किसी बात पर अपनी प्रतिक्रिया देने से बचते हैं।
- बोलने की क्षमता प्रभावित होना।
- इशारों में बातें समझना।
- दूसरे बच्चों दूरी बनाए रखना। साथ ही खुद में ही बातें करना।
यदि आपके बच्चे में भी इस भयावह बीमारी के लक्षण सामने आते हैं, तो तुरंत अपने डॉक्टर से सलाह लें और जल्द से जल्द इसका इलाज करवाएं। अन्यता स्थिति गंभीर हो सकती है।
Autism Treatment, कैसे करें बचाव
फिलहाल ऑटिज्म से निपटने के लिए कोई विशेष इलाज नहीं है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों द्वारा इस भयावह बीमारी से बचने के लिए अभिभावकों को बच्चे के व्यवहार पर विशेष ध्यान देने के लिए कहा जाता है। वहीं यदि आपके बच्चे में इसके लक्षण दिन प्रतिदिन गंभीर हो रहे हैं तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें और इसका इलाज करवाएं। साथ ही किसी प्रकार की कोई लापरवाही ना बरतें अन्यथा बच्चा हमेशा के लिए अपनी याद्दाश्त खो सकता है।
ऑटिज्म से बचने के घरेलू उपाय
- बच्चे के साथ कम्यूनिकेशन आसान बनाएं।
- धीरे-धीरे साफ और आसान शब्दों में बात करें।
- बात करते हुए बच्चे का नाम बार-बार दोहराएं।
- बच्चे को प्रतिक्रिया के लिए पर्याप्त समय लेने दें।
- किसी विशेषज्ञ से थैरेपी भी ले सकते हैं।
