Why Should Not Ignore Bloating After Menopause: एक उम्र के बाद महिलाओं के शरीर में प्राकृतिक तौर पर कई बदलाव आने लगते हैं। जब लगातार 12 महीने तक पीरियड्स बंद हो जाते हैं, तो इस स्थिति को मेनोपॉज (Menopause) कहा जाता है। आमतौर पर यह 45 से 55 साल की उम्र के बीच होता है। मेनोपॉज के बाद महिलाओं के शरीर में कई तरह के बदलाव आते हैं। इस दौरान कभी वजन बढ़ना, कभी गैस या पेट फूलने जैसी दिक्कतें होना आम माना जाता है। अक्सर महिलाएं इसे उम्र बढ़ने, खानपान या हार्मोनल बदलाव का असर समझकर नजरअंदाज कर देती हैं। लेकिन अगर पेट फूलने की समस्या लगभग रोज होने लगे, कई हफ्तों तक बनी रहे या पहले से अलग महसूस हो, तो इसे हल्के में लेना सही नहीं है।
यशोदा हॉस्पिटल्स, हैदराबाद की कैंसर स्पेशलिस्ट डॉ. जी. वामशी कृष्णा रेड्डी (कंसल्टेंट मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट और हेमाटो ऑन्कोलॉजिस्ट) के मुताबिक, लगातार पेट फूलना (persistent bloating) कुछ मामलों में ओवेरियन कैंसर (Ovarian Cancer) का शुरुआती संकेत भी हो सकता है। दिक्कत यह है कि इसके लक्षण बहुत सामान्य होते हैं, इसलिए महिलाएं समय पर जांच नहीं करवातीं। यही वजह है कि बीमारी कई बार देर से पकड़ में आती है। ऐसे में शरीर के छोटे-छोटे संकेतों को समझना बेहद जरूरी हो जाता है।
क्यों खतरनाक हो सकता है लगातार पेट फूलना
डॉ. जी. वामशी कृष्णा रेड्डी बताते हैं कि सामान्य गैस या ब्लोटिंग अक्सर कुछ समय बाद ठीक हो जाती है। लेकिन अगर पेट में लगातार भारीपन महसूस हो, सूजन बनी रहे या कपड़े अचानक टाइट लगने लगें, तो यह चिंता की बात हो सकती है। खासतौर पर मेनोपॉज के बाद ऐसी समस्या को बार-बार गैस की दवा लेकर दबाना सही तरीका नहीं माना जाता।
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ओवेरियन कैंसर के लक्षण क्यों पकड़ में नहीं आते
ओवेरियन कैंसर की सबसे बड़ी समस्या यही है कि इसके शुरुआती लक्षण बहुत सामान्य होते हैं। पेट फूलना, भूख कम लगना, जल्दी पेट भर जाना, बार-बार पेशाब आना या पेल्विक एरिया में हल्का दर्द जैसी परेशानियां आम गैस्ट्रिक या यूरिन की समस्या जैसी लगती हैं। महिलाएं इन्हें बढ़ती उम्र या मेनोपॉज का हिस्सा समझ लेती हैं, जिससे जांच में देरी हो जाती है।
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मेनोपॉज के बाद जोखिम क्यों बढ़ जाता है
डॉक्टरों के अनुसार बढ़ती उम्र के साथ ओवेरियन कैंसर का खतरा भी बढ़ता है। इसलिए मेनोपॉज के बाद वाली महिलाएं (Postmenopausal women) को अपने शरीर में हो रहे बदलावों पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए। हर ब्लोटिंग कैंसर नहीं होती, लेकिन अगर कोई लक्षण लगातार दो से तीन हफ्ते तक बना रहे, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। समय पर जांच बीमारी को शुरुआती स्टेज में पकड़ने में मदद कर सकती है।
कौन-सी जांच दूर कर सकती है शक
डॉ. रेड्डी के मुताबिक, फिलहाल ओवेरियन कैंसर के लिए ऐसा कोई रूटीन स्क्रीनिंग टेस्ट नहीं है जो हर महिला के लिए पूरी तरह भरोसेमंद हो। यही कारण है कि लक्षणों को लेकर जागरूकता बहुत जरूरी हो जाती है। अगर लगातार पेट फूलने जैसी समस्या बनी हुई है, तो एक साधारण पेट का अल्ट्रासाउंड (Abdominal Ultrasound) जांच काफी हद तक स्थिति साफ कर सकती है। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर आगे की जांच भी सलाह दे सकते हैं।
कब बिल्कुल भी देरी नहीं करनी चाहिए
अगर पेट फूलने के साथ भूख कम लग रही हो, वजन तेजी से घट रहा हो, पेट या पेल्विक हिस्से में दर्द हो रहा हो या बार-बार यूरिन जाने की जरूरत महसूस हो रही हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। कई महिलाएं शर्म, डर या व्यस्तता की वजह से जांच टालती रहती हैं, लेकिन यही देरी बीमारी को गंभीर बना सकती है। सही समय पर डॉक्टर से सलाह लेना ही सबसे बड़ा बचाव माना जाता है।
