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हंता वायरस पल्मोनरी सिंड्रोम क्या है, क्यों होता है इस इंफेक्शन में जान जाने का ज्यादा खतरा? डॉक्टर से जानें

Hantavirus Pulmonary Syndrome: हंता वायरस पल्मोनरी सिंड्रोम (HCPS) एक गंभीर वायरल इंफेक्शन है, जो फेफड़ों को तेजी से प्रभावित करता है। जानिए इसके शुरुआती लक्षण, इसमें मौत का खतरा क्यों बढ़ता है और इससे बचाव कैसे किया जा सकता है।

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हंता वायरस पल्मोनरी सिंड्रोम (HCPS) में जान जाने का रिस्क ज्यादा क्यों है

Hantavirus Pulmonary Syndrome: हंता वायरस पल्मोनरी सिंड्रोम यानी HCPS एक ऐसा वायरल इंफेक्शन है, जिसका नाम सुनते ही लोग घबरा जाते हैं। वजह भी साफ है, क्योंकि यह बीमारी बहुत तेजी से फेफड़ों पर असर डालती है और मरीज की हालत अचानक बिगाड़ सकती है। डराने वाली बात यह है कि शुरुआत में इसके लक्षण बिल्कुल सामान्य वायरल बुखार जैसे लगते हैं। हल्का बुखार, शरीर टूटना, थकान या पेट खराब होना जैसी दिक्कतें देखकर ज्यादातर लोग इसे साधारण वायरल समझ लेते हैं।

लेकिन धीरे-धीरे यही संक्रमण सांस लेने में गंभीर परेशानी पैदा कर सकता है। यशोदा हॉस्पिटल, हैदराबाद के कंसल्टेंट इंटरवेंशनल पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. के. युगवीर गौड़ के मुताबिक, HCPS में समय पर पहचान और इलाज बेहद जरूरी होता है, क्योंकि यह बीमारी बहुत तेजी से गंभीर रूप ले सकती है। ऐसे में यह समझना जरूरी है कि आखिर यह वायरस फैलता कैसे है और इसमें मौत का खतरा ज्यादा क्यों माना जाता है।

कैसे फैलता है हंता वायरस

डॉ. युगवीर गौड़ बताते हैं कि हंता वायरस (Hantavirus Infection) आमतौर पर संक्रमित चूहों के जरिए फैलता है। चूहों के यूरिन, लार या मल में मौजूद वायरस हवा में मिल सकता है और सांस के जरिए शरीर के अंदर पहुंच जाता है। खासकर बंद कमरों, स्टोर रूम, गोदाम या कम वेंटिलेशन वाली जगहों पर इसका खतरा ज्यादा रहता है।

कई लोग सफाई करते समय सूखे चूहे के मल या धूल को सीधे झाड़ू से साफ कर देते हैं। इससे वायरस के छोटे कण हवा में फैल जाते हैं और संक्रमण का रिस्क बढ़ सकता है। इसलिए डॉक्टर हमेशा सावधानी के साथ सफाई करने की सलाह देते हैं।

शुरुआत में क्यों नहीं समझ आती बीमारी

इस बीमारी की सबसे मुश्किल बात यही है कि इसके शुरुआती लक्षण बहुत सामान्य होते हैं। मरीज को बुखार, सिर दर्द, कमजोरी, बदन दर्द, उल्टी जैसा महसूस होना या पेट दर्द जैसी शिकायत हो सकती है। यही वजह है कि लोग अक्सर इसे मौसम बदलने वाला बुखार या साधारण वायरल समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन अंदर ही अंदर वायरस फेफड़ों और ब्लड वेसल्स को प्रभावित करना शुरू कर देता है। कई मामलों में मरीज को तब तक बीमारी की गंभीरता समझ नहीं आती, जब तक सांस लेने में दिक्कत शुरू न हो जाए।

क्यों बढ़ जाता है मौत का खतरा

डॉक्टर के अनुसार, HCPS में सबसे बड़ा खतरा फेफड़ों पर पड़ने वाला असर है। यह वायरस शरीर में तेज सूजन पैदा करता है, जिसकी वजह से ब्लड वेसल्स से फ्लूइड लीक होकर फेफड़ों में जमा होने लगता है। जब फेफड़ों में फ्लूइड भरने लगता है, तब शरीर को सही मात्रा में ऑक्सीजन नहीं मिल पाती। मरीज को तेज सांस फूलना, ऑक्सीजन लेवल गिरना और सीने में भारीपन महसूस हो सकता है। गंभीर स्थिति में शरीर शॉक में जा सकता है और हार्ट पर भी असर पड़ सकता है। कई मरीजों को अचानक ICU, ऑक्सीजन सपोर्ट या वेंटिलेटर की जरूरत पड़ जाती है। यही कारण है कि इस बीमारी में मॉर्टेलिटी रिस्क ज्यादा माना जाता है।

क्या इसका कोई पक्का इलाज है

फिलहाल HCPS के लिए कोई खास एंटीवायरल दवा व्यापक रूप से उपलब्ध नहीं है। डॉक्टर कहते हैं कि इस बीमारी में सबसे ज्यादा जरूरी है जल्दी पहचान और सही समय पर मेडिकल सपोर्ट। अगर मरीज को समय रहते अस्पताल पहुंचा दिया जाए तो ऑक्सीजन सपोर्ट, फ्लूइड मैनेजमेंट और ICU केयर से हालत संभालने में मदद मिल सकती है। इसलिए लक्षणों को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है।

बचाव ही सबसे बड़ा हथियार

डॉ. युगवीर गौड़ के मुताबिक, हंता वायरस से बचने के लिए घर और आसपास साफ-सफाई रखना बहुत जरूरी है। ऐसी जगहों पर खास ध्यान देना चाहिए जहां चूहे ज्यादा आते हों। सफाई करते समय मास्क पहनना, कमरे को पहले अच्छी तरह हवादार बनाना और सूखी गंदगी को सीधे झाड़ू से साफ करने से बचना चाहिए।

इसके अलावा खाने-पीने की चीजों को ढककर रखना और कुतरने वाले जानवरों के नियंत्रण (rodent control) पर ध्यान देना भी जरूरी है। छोटी-छोटी सावधानियां इस गंभीर संक्रमण से बचाने में बड़ी मदद कर सकती हैं।

Vineet
विनीतauthor

विनीत टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में हेल्थ डेस्क के साथ बतौर चीफ कॉपी एडिटर जुड़े हैं। दिल्ली के रहने वाले विनीत को हेल्थ, फिटनेस और न्यूट्रिशन जैसे विषयों पर गहरी समझ है। इन्होंने हेल्थ, फिटनेस, न्यूट्रिशन और सप्लीमेंट के फील्ड में प्रोफेशनल सर्टिफिकेशन भी किए हैं। वे 6 साल से इस फील्ड से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर 7,000 से अधिक लेख लिख चुके हैं। विनीत की खासियत उनकी रिसर्च-बेस्ड लेखन शैली और जनहित को ध्यान में रखते हुए लिखी गई जानकारीपूर्ण स्टोरीज हैं।

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