Causes Of Heart Attack In School Students In Hindi: आजकल हम देखते है स्कूल जाने वाले बच्चों में हार्ट अटैक के मामले सामने आते हैं। 9-10 साल के स्कूल जाने वाले बच्चों में इस तरह के मामले हाल ही में देखे गए हैं। कई बच्चे कम उम्र में ही हार्ट अटैक की वजह से जान भी गंवा चुके हैं। ऐसे में पेरेंट्स इस बात को लेकर काफी परेशान हैं कि आखिर बच्चों में लगातार हृदय रोगों के मामले क्यों देखने के मिल रहे हैं, आखिर इसके पीछे क्या कारण हैं। आपको बता दें कि बच्चों में हृदय रोगों के बढ़ने के पीछे कई कारण जिम्मेदार हो सकते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं पेरेंट्स की कुछ गलतियां भी बच्चों में हृदय रोगों के खतरे को बढ़ाने में योगदान दे सकती हैं। कई बार पेरेंस्टस बच्चों के भले के चक्कर में कुछ ऐसे काम करते हैं, जो बच्चों की सेहत को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाता है। साथ ही, हृदय रोगों में योगदान देता है। इसलिए पेरेंट्स को ऐसे में जरूरी सावधानी बरतनी चाहिए।
बच्चों में हृदय रोगों के बढ़ते खतरे के प्रमुख कारण क्या हैं - Causes Of Heart Attack In School Students
आपको बता दें कि अन्य रोगों की तरह हृदय रोग का खतरा भी जेनेटिक्स पर निर्भर करता है। अगर परिवार में किसी को हृदय रोगों की समस्या रही है, तो बच्चे में भी इसके होने का खतरा बहुत अधिक होता है। इसके अलावा, बच्चों में भी हृदय रोगों के जोखिम कारक काफी आम हो गए हैं। उनमें हाई कोलेस्ट्रॉल, ब्लड प्रेशर, मोटापा जैसी समस्याएं देखने को मिलती हैं। इसके अलावा, कम उम्र में ही स्मोकिंग करना और शारीरिक रूप से एक्टिव न रहना भी बच्चों में हृदय रोगों के खतरे को बढ़ाते हैं।
पेरेंट्स की इन गलतियों की वजह से भी हो सकता हार्ट अटैक
सोशल मीडिया इन्फ्लूएंसर कीर्ति यादव ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर की है, जिसमें डॉक्टर ने स्टूडेंट्स में हार्ट अटैक का कारण बनने वाली पेरेंट्स की कुछ आदतें बताई हैं जैसे,
- बच्चों को सुबह जल्दी उठा देना
- उन्हें बिना कुछ खिलाये स्कूल भेज देना
- बच्चों का स्कूल बैग बहुत ज्यादा भारी होना
- उन्हें लंच में पूरी-परांठे जैसी तली हुई चीजें देना
- स्कूल में ठंडा भोजन करना
- बच्चे पर स्कूल का होम वर्क करने के लिए दबाव डालना
- बच्चे को स्कूल से आती ही नहलाना
- स्कूल से आने के बाद जबरदस्त खाना खिलाना
- उन्हें बिना आराम किए होम वर्क में लगा देना
- बच्चे को खेलने के समय ट्यूशन भेजना
- रात में बच्चों का देर तक जागना
अगर आप भी बच्चों के साथ इस तरह का व्यवहार करते हैं, तो आपको ऐसे में थोड़ा सावधानी बरतने की जरूरत है। यह आपके बच्चे के स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह हो सकता है।
डिस्क्लेमर: प्रस्तुत लेख में सुझाए गए टिप्स और सलाह केवल आम जानकारी के लिए हैं और इसे पेशेवर चिकित्सा सलाह के रूप में नहीं लिया जा सकता। किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी तरह का बदलाव करने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।
