Raw Vs Roasted Nuts: मेवे एक स्वस्थ स्नैक विकल्प हैं, जो स्वस्थ वसा, प्रोटीन, फाइबर, विटामिन और खनिजों से भरपूर होते हैं। जब आप बाजार में बादाम, काजू या मूंगफली खरीदने जाते हैं, तो आपको ये दो रूपों में मिलते हैं-कच्चे और भुने हुए। अब सवाल यह है कि इनमें से कौन सा स्वास्थ्य के लिए बेहतर है?
कई लोग कच्चे मेवों के पक्ष में होते हैं, उनका मानना है कि ये अपने सभी प्राकृतिक पोषक तत्वों को बनाए रखते हैं। वहीं, कुछ लोग यह कहते हैं कि भुनने से स्वाद बढ़ता है और इन्हें पचाना आसान हो जाता है। लेकिन क्या भुनने से इनकी पौष्टिकता कम हो जाती है या ये और भी बेहतर हो जाते हैं?
क्या भुने हुए मेवे अपने पोषक तत्व खो देते हैं?
कच्चे मेवे अपनी प्राकृतिक पोषण संरचना को बनाए रखते हैं, जिसमें कुछ विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट की उच्च मात्रा होती है। हालांकि, भुनने के दौरान गर्मी के संपर्क में आने से कुछ पोषक तत्वों की थोड़ी कमी हो सकती है। टफ्ट्स हेल्थ एंड न्यूट्रिशन लेटर के अनुसार, भुनने से कुछ गर्मी-संवेदनशील विटामिन, जैसे विटामिन ई और बी विटामिन, में थोड़ी कमी हो सकती है, लेकिन यह कमी बहुत अधिक नहीं होती।
क्या भुनना स्वस्थ वसा को नुकसान पहुंचाता है?
मेवे स्वाभाविक रूप से वसा से भरपूर होते हैं, जो खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने और हृदय रोग के जोखिम को घटाने में मदद करते हैं। लेकिन उच्च तापमान पर भुनने से ये स्वस्थ वसा ऑक्सीकृत हो सकते हैं, जिससे हानिकारक यौगिक बन सकते हैं। हेल्थलाइन के अनुसार, 284 डिग्री फारेनहाइट (140 डिग्री सेल्सियस) से अधिक तापमान पर भुनने से वसा ऑक्सीडाइज होता है, जिससे इनके पोषण मूल्य में थोड़ी कमी आ सकती है।
क्या ये भुनने पर जीवित रहते हैं?
एंटीऑक्सीडेंट हमारी कोशिकाओं को मुक्त कणों से होने वाले नुकसान से बचाते हैं। काजू और बादाम जैसे मेवे विशेष रूप से एंटीऑक्सीडेंट में उच्च होते हैं। भुनने से कुछ एंटीऑक्सीडेंट का क्षय हो सकता है, लेकिन कुछ अन्य एंटीऑक्सीडेंट की उपलब्धता बढ़ जाती है। एक अध्ययन के अनुसार, भुनने से मूंगफली और हेज़लनट में कुछ एंटीऑक्सीडेंट के स्तर में वृद्धि होती है।
क्या भुने हुए मेवे आपके पेट के लिए बेहतर हैं?
कच्चे मेवे फाइटिक एसिड के कारण अवशोषण में बाधा डाल सकते हैं। भुनने से फाइटिक एसिड टूट जाता है, जिससे मेवों में खनिजों का अवशोषण आसान हो जाता है। मेडिकल न्यूज टुडे के अनुसार, भुने हुए मेवे आमतौर पर कच्चे मेवों की तुलना में पचाने में आसान होते हैं।
भुने हुए मेवों में एक छिपा हुआ जोखिम
भुने हुए मेवों में एक संभावित जोखिम है। एक्रिलामाइड का निर्माण, जो उच्च तापमान पर पकाने से बनता है और यह संभावित रूप से कैंसरकारी हो सकता है। हेल्थलाइन के अनुसार, 300 डिग्री फारेनहाइट (150 डिग्री सेल्सियस) से अधिक तापमान पर भुनने से यह जोखिम बढ़ जाता है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
पोषण विशेषज्ञों का मानना है कि कच्चे और भुने दोनों प्रकार के मेवे एक स्वस्थ आहार का हिस्सा हो सकते हैं। डॉ. वाल्टर विले कहते हैं कि सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि मेवे बहुत अधिक नमक, चीनी या अस्वास्थ्यकर तेलों से ढके न हों।
आपको कौन सा चुनना चाहिए?
यदि आप अधिकतम पोषक तत्वों को बनाए रखना चाहते हैं, तो कच्चे मेवे एक अच्छा विकल्प हैं। लेकिन यदि आप कच्चे मेवों को पचाने में कठिनाई महसूस करते हैं या कुरकुरी बनावट पसंद करते हैं, तो हल्के भुने हुए मेवे (बिना नमक या तेल के) एक स्वस्थ विकल्प हो सकते हैं। दोनों प्रकार के मेवे पोषण के उत्कृष्ट स्रोत हैं और एक संतुलित आहार का हिस्सा हो सकते हैं। मुख्य बात यह है कि इन्हें संतुलित मात्रा में और बिना प्रोसेस्ड वैरिएंट के खाया जाए।
