Connection Between Month Of Birth And Mental Health In Hindi: हम अक्सर सोचते हैं कि मानसिक स्वास्थ्य सिर्फ तनाव, जीवनशैली या अनुवांशिक वजहों से बिगड़ता है। लेकिन एक नई स्टडी ने चौंकाने वाला खुलासा किया है कि आपका जन्म किस महीने में हुआ है, इसका आपकी मानसिक स्थिति से सीधा रिश्ता हो सकता है। खासतौर पर गर्मियों में जन्मे पुरुषों में डिप्रेशन और मूड डिसऑर्डर की संभावना ज्यादा पाई गई है। रिसर्च के अनुसार गर्भ के शुरुआती महीनों में सूर्य की रोशनी और विटामिन D की कमी, भ्रूण के दिमागी विकास को प्रभावित कर सकती है। आइए, जानते हैं इस रिसर्च की खास बातें आसान भाषा में।
गर्मी में जन्म, डिप्रेशन का खतरा ज्यादा
स्टडी के मुताबिक जो पुरुष मई से अगस्त के बीच जन्म लेते हैं, उनमें डिप्रेशन और मानसिक असंतुलन की संभावना अन्य मौसमों में जन्म लेने वालों की तुलना में ज्यादा देखी गई है। यह असर उनके मूड, व्यवहार और सोचने के तरीके पर भी नजर आता है।
गर्भावस्था में सूरज की रोशनी की अहम भूमिका
गर्मियों में जन्म लेने का मतलब है कि मां ने गर्भावस्था की शुरुआत सर्दियों में की होगी। ठंड के मौसम में सूरज की रोशनी कम मिलने से शरीर में विटामिन D की मात्रा घट जाती है, जो भ्रूण के दिमागी विकास में रुकावट पैदा कर सकती है।
ब्रेन डेवलपमेंट पर गहराता असर
विटामिन D की कमी भ्रूण के न्यूरोलॉजिकल सिस्टम को प्रभावित करती है। यही वजह है कि गर्मियों में जन्मे बच्चों में भविष्य में डिप्रेशन या मूड डिसऑर्डर जैसे लक्षण देखने को मिल सकते हैं।
बाकी मौसमों में जन्म वालों को थोड़ा फायदा
जो लोग सर्दी या बरसात में जन्म लेते हैं, उनके गर्भकाल में सूर्य की रोशनी और विटामिन D की मात्रा थोड़ी बेहतर हो सकती है, जिससे उनका मानसिक विकास अपेक्षाकृत बेहतर होता है।
सिर्फ मौसम नहीं, और भी कारण होते हैं
यह जरूर ध्यान देना चाहिए कि जन्म का मौसम मानसिक स्वास्थ्य पर असर डाल सकता है, लेकिन यह अकेला कारण नहीं है। तनाव, जेनेटिक्स, सामाजिक माहौल और खान-पान भी इसकी अहम वजहें हैं।
निष्कर्ष
इस स्टडी के नतीजे बताते हैं कि भविष्य में डॉक्टर मरीज की मानसिक स्थिति का विश्लेषण करते समय उसके जन्म महीने पर भी ध्यान दे सकते हैं। अगर आप या आपके किसी जानने वाले को मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानी हो रही है, तो इसका संबंध जन्मकाल से भी हो सकता है।
