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तनाव और चिंता से निपटने का ये है शानदार तरीका, जानें क्या है माइंडफुलनेस और कैसे आता है इससे आराम

what is mindfulness: माइंडफुलनेस एक ऐसी तकनीक है, जो हमारी मानसिक शांति को वापस लाने के साथ ही तनाव और एंग्जाइटी से निपटने में भी बहुत मददगार है। एक शोध से यह बात कंफर्म भी हुई है। जानें क्या है माइंडफुलनेस और कैसे ये दिमाग और शरीर को तनाव से मुक्त करती है।

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What is Mindfulness

what is mindfulness: हाल ही में नए शोध में पता चला है कि माइंडफुलनेस के जरिए कॉग्निटिव कंट्रोल में सुधार किया जा सकता है और इस तरह से एंग्जाइटी से निपटने में भी मदद मिलती है। स्टडी में सामने आया है कि नियमित माइंडफुलनेस मेडिटेशन का अभ्यास करने वाले लोगों में चिंता के लक्षण कम होते हैं। लगातार चिंता करने वाले और स्ट्रेस पालने वाले लोग अगर ध्यान केंद्रित करें तो इस इस स्थिति में उनको बहुत लाभ होगा।

अमेरिका, सेंट लुइस,वाशिंगटन विश्वविद्यालय के माइंडफुलनेस साइंस एंड प्रैक्टिस रिसर्च क्लस्टर के पोस्ट डॉक्टरल रिसर्च एसोसिएट रेश गुप्ता ने बताया कि माइंडफुलनेस तकनीक का पीछे का मूल विचार बिना किसी जजमेंट या पूर्वाग्रह के मौजूदा पल पर फोकस करना होता है। यह चिंता को शांत करने और फोकस में सुधार करने में मदद कर सकता है। कई शोध हुए और उनमें पता चला कि माइंडफुलनेस चिंता के लक्षणों को कम कर सकता है।

न्यूरोसाइंस एंड बायो बिहेवियरल रिव्यू में प्रकाशित एक पेपर में उन्होंने लिखा है कि चिंता का अनुभव तो हम सभी करते हैं, लेकिन यह कई अलग-अलग तरीकों से सामने आती है। इस वजह से इस समस्या का पता लगाना मुश्किल हो जाता है।

Mindfulness Benefits

Mindfulness Benefits

सभी के लिए एक ही उपाय अपनाने के बजाय, वे सुझाव देते हैं कि अलग-अलग तरह की माइंडफुलनेस प्रैक्टिस चिंता के अलग-अलग प्रकारों से निपटने में मददगार हो सकती है। गुप्ता ने कहा कि प्रस्तावित रूपरेखा से हमें यह समझने में मदद मिलेगी कि चिंता से पीड़ित लोगों को अधिक सटीक उपचार कैसे दिया जाए।

मनोवैज्ञानिक और शोध के सह-लेखक प्रोफेसर टॉड ब्रेवर ने कहा कि यह मान्यता बढ़ रही है कि यह प्रैक्टिस मनोविज्ञान के क्षेत्र अविश्वसनीय रूप से उपयोगी हो सकती है। इससे लोगों को बहुत मदद मिल सकती है, लेकिन हम अभी भी पूरी तरह से उस प्रक्रिया को नहीं समझ पाए हैं जो माइंडफुलनेस के लिए लाभकारी हो सकती है। यहीं पर वैज्ञानिक शोध बहुत मूल्यवान हो सकता है, क्योंकि इससे हमें अधिक सटीक रूप से यह पहचानने में मदद मिलती है कि माइंडफुलनेस में कुछ खास तकनीक और ट्रेनिंग क्यों और कैसे प्रभावी हैं।

जो लोग अत्यधिक सतर्क रहते हैं और चिंता के बहुत से शारीरिक लक्षणों का अनुभव करते हैं, जैसे तेज धड़कन होना, पसीने से तर हथेलियां, सीने में जकड़न, उनको इससे काफी फायदा हो सकता है।

रेश गुप्ता का कहना है कि इस प्रकार की चिंता या लक्षण में ओपन मॉनिटरिंग नामक 'माइंडफुलनेस मेडिटेशन' फायदेमंद हो सकती है। इसमें सांस पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय, आप पल-पल के सभी आंतरिक और बाहरी अनुभवों को पर ध्यान फोकस कर सकते हैं।

इनपुट : आईएएनएस

Medha Chawla
मेधा चावलाauthor

मेधा चावला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर एसोसिएट एडिटर हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन की लीड हैं। लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 20 वर्षों का अनुभव रखने वाली मेधा की विशेषज्ञता हेल्थ, वेलनेस, फिटनेस, मेंटल हेल्थ, डेली लाइफ इम्प्रूवमेंट, ह्यूमन-इंटरेस्ट फीचर्स और रिसर्च-बेस्ड स्टोरीज तक फैली है। उनकी लेखन शैली पाठकों को जटिल स्वास्थ्य और जीवनशैली संबंधी विषयों को आसान, समझने योग्य और व्यवहारिक रूप में प्रस्तुत करती है, जिससे उनका कंटेंट व्यापक पाठक समूह से जुड़ता है। अबतक 30,000 से अधिक कंटेंट पीस लिख चुकी मेधा की कई एक्सक्लूसिव स्टोरीज डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ट्रेंड सेट कर चुकी हैं।

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