हेल्थ

कमजोर हड्डियां ज्यादा खतरा, बुजुर्गों में गंभीर फ्रैक्चर के पीछे की वजह

Senior Citizen Health Issues: आजकल बुजुर्गों में फ्रैक्चर की समस्या पहले से कहीं ज्यादा गंभीर होती जा रही है। हल्की-सी फिसलन या गिरने से भी हड्डियां बुरी तरह टूट जाती हैं, जिसके बाद कई मामलों में ऑपरेशन तक की जरूरत पड़ जाती है। इसकी सबसे बड़ी वजह और इस समस्या से काफी हद तक कैसे बचाव किया जा सकता है उसके बारे में यहां डिटेल में बताया गया है।

Senior Citizen Health Issues

बुजुर्गों में गंभीर फ्रैक्चर के पीछे की वजह

Weak Bones In Old Age: बुजुर्गों में फ्रैक्चर की गंभीरता में लगातार वृद्धि हो रही है, जो एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या बनती जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, हर सप्ताह लगभग 10 से 15 वरिष्ठ नागरिकों को ऐसे फ्रैक्चर होते हैं जिनके लिए ऑपरेशन तक की आवश्यकता होती है। ये चोटें अब साधारण सी बात नहीं रह गई हैं, बल्कि इनमें हड्डियों का टूटना, जॉइंट में नुकसान और ऑपरेशन तक की जरूरत शामिल होती है। अगर आपके घर में कोई बुजुर्ग है या फिर आप भी उम्र के इसी पड़ाव पर खड़े हैं तो ये आर्टिकल आपके बेहद काम आ सकता है। यहां हर छोटी से छोटी जानकारी को डिटेल में समझाया गया है जिसे जानकर आप खुदको किसी भी गंभीर समस्या से बचा सकते हैं। छोटी-छोटी बातों का ख्याल रखकर आप बड़ी समस्या से बच सकते हैं।

यह सोचकर कि दर्द धीरे-धीरे कम हो जाता है ऐसे में ये सोच स्थिति और खराब कर सकता है। अगर आपको साधारण चोट नहीं बल्कि फ्रैक्टर है तो कुछ ही दिनों में फ्रैक्चर और भी ज्यादा बिगड़ जाता है। सलाहकार ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. परवेज शेख के अनुसार, बुजुर्गों में फ्रैक्चर बढ़ने की एक बड़ी वजह उम्र के साथ जीवन प्रत्याशा का बढ़ना है।

आज लोग 70–80 साल की उम्र में भी खुद से चल-फिर रहे हैं और स्वतंत्र जीवन जी रहे हैं। ऐसे में गिरने या फिसलने का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा ऑस्टियोपोरोसिस, विटामिन-डी की कमी, आर्थराइटिस और डायबिटीज जैसी बीमारियां भी हड्डियों को कमजोर कर देती हैं, जिससे फ्रैक्चर का जोखिम और ज्यादा बढ़ जाता है।

फ्रैक्चर के सामान्य लक्षणों में गंभीर दर्द, सूजन, चलने या खड़े होने में असमर्थता और दृश्य विकृति शामिल हैं। अगर इनका उपचार नहीं किया गया, तो लंबे समय तक बिस्तर पर रहने, संक्रमण, मांसपेशियों की हानि और जीवन की गुणवत्ता में कमी जैसी जटिलताएं हो सकती हैं।

रोकथाम के उपाय

नियमित हड्डी घनत्व की जांच कराना

विटामिन डी के स्तर की निगरानी

घर में गिरने से बचने के लिए उचित रोशनी और सहायक उपकरण लगाना

नियमित दृष्टि जांच कराना

संतुलन और शक्ति बढ़ाने वाले व्यायाम करना

डॉ. शेख ने यह भी कहा कि 60 वर्ष से अधिक उम्र के व्यक्तियों को नियमित रूप से हड्डी स्वास्थ्य की जांच करानी चाहिए और चोट लगने के बाद तुरंत चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए। इस प्रकार, समय पर सर्जरी, पुनर्वास और पारिवारिक समर्थन के माध्यम से, कई वरिष्ठ नागरिक अपनी गतिशीलता और स्वतंत्रता को पुनः प्राप्त कर सकते हैं।

प्रभात शर्मा
प्रभात शर्मा author

प्रभात शर्मा टाइम्स नाउ हिंदी डिजिटल के फीचर डेस्क में कार्यरत ट्रैवल और लाइफस्टाइल राइटर हैं। यात्राओं के प्रति उनका गहरा जुनून और नई जगहों को समझने–... और देखें

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