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India health summit 2025 : भारत में डिजिटल के विकास से चिकित्सा क्षेत्र में क्या होगी प्रगति, जानें एक्सपर्ट्स की राय

Times Network India Health Summit 2025: हैदराबाद में चल रहे टाइम्स नेटवर्क इंडिया हेल्थ समिट 2025 में मेडिकल और हेल्थकेयर क्षेत्र से जुड़े तमाम मुद्दों पर सकारात्मक डिस्कशन हो रहा है। कार्यक्रम में भारत के स्वास्थ्य सेवा के बुनियादी ढांचे को डिजिटल पावर की मदद से किस तरह से मजबूत किया जा सकता है, पर गहन चर्चा हुई।

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Times Network India Health Summit 2025

Times Network India Health Summit 2025: भारत के स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र ने बुनियादी ढांचे, तकनीक और पहुंच में प्रगति के साथ महत्वपूर्ण परिवर्तन देखे हैं। सार्वजनिक स्वास्थ्य को सशक्त बनाने की यह यात्रा सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को प्राप्त करने के केंद्रित प्रयासों और स्वास्थ्य सेवा बुनियादी ढांचे को मज़बूत करने की प्रतिबद्धता से प्रेरित हुई है। टाइम्स नेटवर्क इंडिया हेल्थ समिट 2025 इस गति का प्रतीक है, जो चिकित्सा, नीति और उद्योग के विशेषज्ञों के दिग्गजों को एक मंच पर लाया है जिससे एक ऐसा मार्ग तैयार किया जा सके जहां अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी पारंपरिक प्रथाओं से मिले।

Times Network India Health Summit 2025 – South Edition का आयोजन 3 मई को हैदराबाद में किया जा रहा है। इस समिट में मेडिकल और हेल्थकेयर क्षेत्र से जुड़े तमाम मुद्दों पर सकारात्मक डिस्कशन हो रहा है। कार्यक्रम में भारत के स्वास्थ्य सेवा के बुनियादी ढांचे को डिजिटल पावर की मदद से किस तरह से मजबूत किया जा सकता है, पर भी गहन चर्चा हुई। चर्चा का संचालन किया टाइम्स नाऊ डिजीटल की हेल्थ एडिटर कल्पना शर्मा ने।

चर्चा के पैनल में कॉन्टिनेंटल हॉस्पिटल्स के फाउंडर व चेयरमैन डॉ. गुरु एन रेड्डी, KIMS Sunshine Hospital के मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. एवी गुरावा रेड्डी, अपोलो हॉस्पिटल्स इंटरनेशनल व आंध्र प्रदेश के सीईओ येदवल्ली सुब्रमण्यम, क्वालिटी केयर इडिया प्राइवेट विमिटेड के ग्रुप एमडी वरुण खन्ना और मेडिकवर हॉस्पिटल्स के कार्यकारी निदेशक पी हरि कृष्ण मौजूद रहे। इस पूरे डिस्कशन से ढेर सारी सार्थक और महत्वपूर्ण बातें सामने निकल कर आईं जो भारत के पब्लिक हेल्थ सेक्टर को और भी आगे ले जाने में काफी मददगार साबित हो सकती हैं।

डॉ. गुरु एन रेड्डी, ने लागत-प्रभावशीलता और गुणवत्तापूर्ण देखभाल के बीच संतुलन की आवश्यकता पर बात की। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बुनियादी ढांचे को कुशल मानव संसाधनों और प्रौद्योगिकी के साथ-साथ चलना चाहिए। डॉ. रेड्डी ने 2013-14 से चले आ रहे अपने उस मॉडल की सफलता के बारे में भी बताया, जिसमें उन्होंने तेज़ डायगनॉस्टिक प्रोसेस और रेगुलेटरी अलाइनमेंट के महत्व पर जोर दिया ताकि देरी और अनावश्यक खर्चों को कम किया जा सके।

केआईएमएस-सनशाइन हॉस्पिटल्स के प्रबंध निदेशक डॉ. ए वी गुरवा रेड्डी ने स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी को सस्ता बनाने पर जोर दिया और सोच-समझकर अनुकूलन के महत्व को समझाया। उन्होंने कहा कि, 'पश्चिमी देशों में, स्वास्थ्य सेवा पर भारी मात्रा में धन बर्बाद होता है। हम वैसी गलती से सीख लेते हुए अपने यहां हेल्थ सिस्टम को थोड़ा सस्ता बनाना चाहिए। बिना किसी जरूरी बात से समझौता किये हुए भी ऐसा किया जा सकता है।'

अपोलो हॉस्पिटल्स (इंटरनेशनल एंड एपी) के सीईओ येदावल्ली सुब्रमण्यम ने अपनी बात रखते हुए कहा कि, भारत विशाल देश है। हम हर कोने में एक्सपर्ट नहीं रख सकते लेकिन डिजिटल टूल्स के जरिए, हम वहां एक्सपर्टाइज पहुंचा सकते हैं। रिमोट आईसीयू मॉनिटरिंग से लेकर टेलीमेडिसिन ड्रिवेन एमरजेंसी केयर जैसे डिजिटल माध्यम फिजिकल हेल्थ सर्विस को पूरा करते हैं।

वहीं मेडिकवर हॉस्पिटल्स के कार्यकारी निदेशक पी हरि कृष्णा ने बताया कि कैसे मेडिकवर ने अपने यूरोपीय मॉडल को भारतीय माहौल के हिसाब से ढाला। उन्होंने कहा कि कहा कि विदेशी टेक्नोलॉजी, प्रोटोकॉल और ऑडिट को भारत के सर्वश्रेष्ठ डॉक्टरों के एक्सपर्टाइजेशन के साथ मिलाया, और उसके बेहद शानदार नतीजे सामने आए हैं।

Suneet Singh
सुनीत सिंहauthor

सुनीत सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन में स्पेशल स्टोरीज प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों के अनुभव के साथ, सुनीत उन बहुमुखी पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने न्यूजरूम और फील्ड—दोनों मोर्चों पर खुद को साबित किया है। माइक, कैमरा और एडिटिंग डेस्क तीनों से उनकी सहज जुगलबंदी ने उन्हें एक संतुलित और विश्वसनीय मीडिया प्रोफेशनल के रूप में स्थापित किया है। पिछले 10 वर्षों से सुनीत लाइफस्टाइल, लिटरेचर, सिनेमा और संस्कृति से जुड़ी गहन व विश्लेषणात्मक स्टोरीज लिखते रहे हैं और अबतक 12,000 से अधिक आर्टिकल पब्लिश कर चुके हैं। उनकी लेखन शैली गहराई, मौलिक दृष्टिकोण और रिसर्च-आधारित प्रस्तुति से पहचानी जाती है। वे विषयों की बारीकियों को पकड़कर उन्हें सरल, प्रभावी और पाठकों से जुड़ने वाली भाषा में ढालने में दक्ष हैं।

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