Dussehra can be dangerous for the lungs: दशहरा बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व है, लेकिन आज के समय में इस त्यौहार के साथ एक बड़ी चिंता भी जुड़ गई है। जब रावण दहन होता है तो आसमान में उठने वाला धुआं सिर्फ दिखने में भव्य लगता है, लेकिन असल में यह बच्चों और बुजुर्गों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। खासकर जिन लोगों को अस्थमा, एलर्जी या पहले से ही सांस लेने की समस्या है, उनके लिए यह धुआं किसी मुसीबत से कम नहीं होता। छोटे बच्चे जिनकी इम्यूनिटी अभी मजबूत नहीं होती और बुजुर्ग जिनके फेफड़े कमजोर हो चुके होते हैं, उनके स्वास्थ्य पर इसका सीधा असर पड़ता है। ऐसे में जरूरी है कि हम इस त्यौहार को पूरे उत्साह के साथ मनाते हुए भी अपनी सेहत और अपनों की सुरक्षा का पूरा ख्याल रखें।
रावण दहन के धुएं में छिपा खतरा
रावण दहन के दौरान पटाखों, आतिशबाजी और रसायनों से बनी सामग्री जलने पर भारी मात्रा में जहरीला धुआं निकलता है। इसमें कार्बन मोनोऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड और अन्य प्रदूषक कण होते हैं, जो फेफड़ों के अंदर जाकर सांस लेने में दिक्कत पैदा करते हैं। बच्चों और बुजुर्गों में यह धुआं खांसी, जलन और सीने में भारीपन का कारण बन सकता है।
बच्चों के फेफड़ों पर असर
बच्चों के फेफड़े पूरी तरह विकसित नहीं होते, इसलिए धुएं का असर उन पर ज्यादा तेजी से होता है। धुएं के संपर्क में आने से बच्चों को सांस लेने में तकलीफ, एलर्जी और गले में खराश जैसी समस्याएं हो सकती हैं। जिन बच्चों को अस्थमा की परेशानी है, उनके लिए यह धुआं अटैक को ट्रिगर कर सकता है।
बुजुर्गों की सेहत पर खतरा
बुजुर्गों में फेफड़ों और दिल की कार्यक्षमता पहले से कम हो जाती है। ऐसे में रावण दहन का धुआं उनके लिए और भी ज्यादा खतरनाक हो जाता है। यह धुआं उनके ब्लड प्रेशर और हार्ट पर दबाव डाल सकता है और सांस लेने में दिक्कत बढ़ा सकता है। जिनको पहले से शुगर या हाई बीपी की समस्या है, उन्हें और भी ज्यादा सावधान रहना चाहिए।
रावण दहन देखते समय बरतें सावधानियां
त्योहार के मजे लेते वक्त कुछ सावधानियां अपनाना बहुत जरूरी है। अगर आप बच्चों और बुजुर्गों को साथ ले जा रहे हैं तो कोशिश करें कि वे धुएं से दूरी बनाए रखें। मास्क पहनना, भीड़ से थोड़ा दूर रहना और रावण दहन के तुरंत बाद वहां से निकल जाना बेहतर विकल्प हो सकते हैं।
घर लौटने के बाद करें ये उपाय
धुएं वाले माहौल से लौटने के बाद सबसे पहले चेहरा और हाथ अच्छे से धोएं। बच्चों को गुनगुना पानी पिलाएं ताकि गले और छाती की जलन कम हो। बुजुर्ग अगर सांस लेने में परेशानी महसूस करें तो डॉक्टर की सलाह जरूर लें। घर के अंदर खिड़कियां बंद रखकर एयर प्यूरिफायर या पौधों की मदद से हवा को शुद्ध करने की कोशिश करें।
त्योहार का मजा और सेहत दोनों रखें सुरक्षित
दशहरा खुशी और उत्साह का पर्व है। हमें इसे पूरी श्रद्धा और जोश के साथ मनाना चाहिए, लेकिन इस दौरान सेहत के प्रति भी सतर्क रहना जरूरी है। थोड़ी सी सावधानी और जागरूकता से हम इस पर्व को सुरक्षित और यादगार बना सकते हैं।
डिस्क्लेमर: प्रस्तुत लेख में सुझाए गए टिप्स और सलाह केवल आम जानकारी के लिए हैं और इसे पेशेवर चिकित्सा सलाह के रूप में नहीं लिया जा सकता। किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी तरह का बदलाव करने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।
