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नींद की कमी से जूझ रहे आधे से ज्यादा भारतीय, रिपोर्ट में हुआ खुलासा, जानें कारण और समाधान

Sleep Crisis in India: भारत में तेजी से बदलती लाइफस्टाइल के कारण नींद की समस्या गंभीर होती जा रही है। हाल ही में जारी एक रिपोर्ट की मानें तो आधे से ज्यादा लोग पूरी नींद नहीं ले पा रहे हैं। जिससे कई तरह की हेल्थ प्रॉब्लम का खतरा बढ़ता जा रहा है। आइए जानते हैं इसके बारे में...

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नींद की समस्या से जूझ रहे लोग

Sleep Crisis in India: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में अच्छी नींद किसी लक्जरी से कम नहीं रह गई है। अगर आप अपने आसपास नजर डालें, तो हर दूसरा व्यक्ति यही कहता मिलेगा कि उसे रात में ठीक से नींद नहीं आती या आज उसकी नींद पूरी नहीं हो पाई है। यह समस्या अब सिर्फ किसी एक व्यक्ति की नहीं रही है, बल्कि पूरे देश में तेजी से फैलती एक बड़ी हेल्थ चिंता बन चुकी है। जी हां हाल ही में वेकफिट की नई रिपोर्ट के अनुसार देश में नींद की कमी एक गंभीर समस्या के रूप में सामने आ रही है। जिसे पीछे कई कारण जिम्मेदार माने जा रहे हैं। आइए जानते हैं क्यों बढ़ रही नींद की समस्या और कैसे होगा बचाव?

क्यों बढ़ रही है नींद की समस्या?

वेकफिट की एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय शहरों में लोगों की नींद लगातार कम होती जा रही है। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह है, बढ़ता स्क्रीन टाइम, अनियमित दिनचर्या और काम का बढ़ता दबाव है। आजकल लोग देर रात तक मोबाइल, लैपटॉप और टीवी में बुरी तरह उलझे रहते हैं, जिससे उनकी स्लीप साइकिल बिगड़ रही है।

रिपोर्ट के अनुसार, करीब 87.6% लोग सोने से पहले फोन का इस्तेमाल करते हैं, जो नींद की क्वालिटी को बुरी तरह प्रभावित करता है। इसके अलावा सोशल मीडिया स्क्रॉल करना और वेब सीरीज देखना अब लोगों की आम आदत बन चुकी है। ये सभी मिलकर हमारी नींद के दुश्मन बनते जा रहे हैं।

भारत के शहरों की स्लीप रिपोर्ट देखें कौन आगे, कौन पीछे?

इस रिपोर्ट में भारत के बड़े-बड़े शहरों में नींद के पैटर्न को लेकर भी दिलचस्प आंकड़े सामने आए हैं। नींद के मामले में चेन्नई को सबसे अनुशासित शहर माना गया, जहां लोग समय पर सोते और जागते हैं। इसके बाद हैदराबाद के लोगों में नींद का पैटर्न सबसे संतुलित पाया गया है। वहीं गुरुग्राम को ‘रेजिलिएंट स्लीपर सिटी’ कहा गया। यानी इस शहर में रहने वाले युवा बिजी शेड्यूल के बाद भी नींद को बैलेंस रखने में सफल रहे हैं।

वहीं बेंगलुरु के लोगों में ‘स्लीप पैराडॉक्स’ देखने को मिला। यानी यहां लोग सोते हैं, लेकिन उठने पर फ्रेश महसूस नहीं करते हैं। जबकि देश की राजधानी दिल्ली में लोग सबसे ज्यादा देर से उठते हैं। वहीं कोलकाता को ‘लेट-नाइट सिटी’ कहा गया है। इस रिपोर्ट में मुंबई को सबसे ज्यादा नींद से जूझता शहर बताया गया है। मुंबई के 62.6 प्रतिशत लोग सुबह उठकर थकान महसूस करते हैं।

सेहत पर क्या पड़ रहा असर?

अधूरी नींद का असर सिर्फ थकान तक सीमित नहीं है। इससे कई गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। नींद की कमी के चलते दिल की बीमारी, मोटापा, डायबिटीज, एंग्जायटी और डिप्रेशन जैसी समस्याएं होने लगती हैं। इसके अलावा, नींद पूरी न होने से ध्यान केंद्रित करने में दिक्कत होती है और छोटे-छोटे फैसले लेना भी मुश्किल हो जाता है।

नींद में सुधार कैसे करें?

  • बेहतर नींद के लिए सोने से पहले स्क्रीन टाइम कम करें।
  • रोजाना एक निश्चित समय पर सोने और उठने की आदत डालें।
  • डिनर में हल्का खाना और लाइफस्टाइल में योग और मेडिटेशन अपनाएं।
  • रात में सोने से पहले कैफीन और भारी भोजन से बचें।
  • रात में सोते समय कमरा शांत और डार्क रखने की कोशिश करें।

क्या हैं रिपोर्ट के आंकड़े

वेकफिट की रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 57.8% लोग काम के दौरान नींद महसूस करते हैं। यह पिछले साल के मुकाबले काफी ज्यादा है। देश बड़े शहरों में नींद की समस्या और गंभीर है, जहां दिल्ली, बेंगलुरु और मुंबई में सबसे ज्यादा लोग दिन में थकान और नींद महसूस करते हैं।

gulshan kumar
गुलशन कुमारauthor

गुलशन कुमार टाइम्स नाउ हिंदी डिजिटल के हेल्थ सेक्शन से जुड़े हैं। फिटनेस और योग के प्रति उनकी रुचि उन्हें हेल्थ जर्नलिज्म की ओर लेकर आई, जहां वे आम लोगों की जीवनशैली, सेहत और वेलनेस से जुड़े विषयों पर लगातार काम कर रहे हैं। गुलशन अबतक 2,000 से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं। उनके लेखों में आसान भाषा में दी गई जानकारी, रिसर्च-बेस्ड टिप्स और रोजमर्रा की सेहत से जुड़े विषयों की स्पष्ट समझ दिखाई देती है। हेल्थ अवेयरनेस को बढ़ावा देना, फिटनेस को सरल तरीके से समझाना और बेहतर लाइफस्टाइल के लिए उपयोगी सुझाव देना—गुलशन की लेखन शैली की खासियत है।

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