देर शाम तक काम करना और देर रात में सोना आज शहरी लोगों की लाइफस्टाइल में शामिल हो गया है। कॉरपोरेट में काम करने वाले लोग सुबह 10 से शाम 7 बजे तक ऑफिस में काम करते हैं, और फिर महानगरों में लगने वाले ट्रैफिक जाम को पार करते हुए 8-9 बजे तक अपने घरों में पहुंचते हैं। जिसके बाद कुछ दैनिक कामों को निपटा कर अपना डिनर प्लान करते हैं। यही कारण है कि आज महानगरों में डिनर का समय लगभग रात में 9 बजे हो गया है। रात में देर से खाना खाने के कारण फिर सोने में लेट होना भी लाजमी है। क्योंकि खाने और सोने में लगभग 2 घंटे का अंतर करना भी जरूरी होता है। आज हम आपको रात में देर से सोने को लेकर हुए एक अध्ययन के बारे में बताने जा रहे हैं। आइए जानते हैं इसके बारे में विस्तार से...
क्या हैं शोध के आंकड़े?
हाल ही में प्रकाशित हुई एक रिपोर्ट के अनुसार रात में 1 बजे के बाद सोने से आपको मानसिक और शारीरिक समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। Psychiatry Research जर्नल में प्रकाशित इस शोध के आंकड़ों की मानें तो इसमें लगभग 75000 लोगों के शामिल किया गया था। 8 साल साल तक लोगों पर किए गए अध्ययन की मानें तो आपको रात में 1 बजे के बाद सोना कई तरह की समस्याओं का शिकार बना सकता है।
दिमाग पर पड़ता है गहरा असर
हेल्थ रिसर्च की मानें तो देर रात तक सोने वाले लोगों को डिप्रेशन एंग्जाइटी और तनाव जैसे मेंटल रोगों का सामना ज्यादा करना पड़ता है। शोधकर्ता स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर जेमी डाइटजर की मानें तो देर रात तक जागने वाले लोगों की मेंटल हेल्थ का नुकसान सबसे ज्यादा होता है। क्योंकि रात में देर से सोने वाले लोग अक्सर कुछ गलत फैसले करते हैं, जिसका असर उनकी मानसिक स्थिति पर देखने को मिलता है।
शोध की मानें तो रात में 1 बजे के बाद सोने वाले लोग कई तरह की बुरी आदतों के शिकार हो जाते हैं। जिसमें आत्मघाती विचार, हिंसक अपराध, नशा जैसे शराब और ड्रग्स की लत, ओवरईटिंग जैसी आदतें शामिल हैं। इन सभी आदतों से बचाव के लिए आपको रात में 10-11 बजे तक सो जाना चाहिए।
