युवाओं पर भी बढ़ रहा कैंसर का खतरा, गर्दन और थायरॉयड के मामलों में तेजी
- Authored by: गुलशन कुमार
- Updated Feb 10, 2026, 06:14 PM IST
भारत में सिर, गर्दन और थायरॉयड कैंसर के मामले युवाओं में तेजी से बढ़ रहे हैं। विशेषज्ञ जीवनशैली में बदलाव, तनाव, तंबाकू-शराब का बढ़ता उपयोग और पर्यावरणीय प्रदूषण को इसके प्रमुख कारण मानते हैं, जिससे युवाओं में कैंसर जोखिम बढ़ रहा है।
युवाओं में बढ़ा कैंसर का खतरा
Head And Neck Cancer: भारत में कैंसर के मामलों में तेजी से वृद्धि हो रही है, खासकर सिर, गर्दन, और थायरॉयड कैंसर के मामलों में। यह समस्या अब केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि युवा जनसंख्या में भी इसके मामले बढ़ रहे हैं। हाल के आंकड़ों के अनुसार, 40 वर्ष से कम उम्र के लोगों में इन कैंसरों की पहचान में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। यह स्थिति चिंताजनक है और इसके पीछे कई कारण हैं। इस बदलाव का कारण जीवनशैली में बदलाव, जल्दी जोखिम वाले कारकों का संपर्क और पर्यावरणीय प्रभाव हैं। डॉक्टरों का कहना है कि शहरीकरण, तनावपूर्ण दिनचर्या, और नशीले पदार्थों की आसान उपलब्धता इन कैंसरों की बढ़ती दरों में योगदान कर रहे हैं। आइए जानते हैं इसके बारे में विस्तार से...
क्या कहते हैं एक्सपर्ट
डॉक्टर सुरेंद्र कुमार डाबास, का कहना है कि भारत में सिर और गर्दन के कैंसर का बोझ विश्व में सबसे अधिक है। पहले इसे उम्र से संबंधित जोखिमों से जोड़ा जाता था, लेकिन अब यह स्पष्ट है कि युवा पीढ़ी भी इस समस्या से प्रभावित हो रही है। उन्होंने बताया कि जल्दी शुरू होने वाली हानिकारक आदतें और लंबे समय तक जोखिम में रहना इस वृद्धि के मुख्य कारण हैं।
शहरीकरण और तनावपूर्ण जीवनशैली भी इस समस्या को बढ़ाने में सहायक हैं। आजकल, युवा लोग जल्दी से धूम्रपान और शराब जैसे नशीले पदार्थों की ओर आकर्षित हो रहे हैं। इन पदार्थों की आसान उपलब्धता और तनावपूर्ण दिनचर्या ने इस समस्या को और बढ़ा दिया है। कैंसर के मामलों में वृद्धि के साथ-साथ, जागरूकता की कमी भी एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। कई लोग प्रारंभिक लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे कैंसर का पता देर से लगता है। इस संदर्भ में, विशेषज्ञों का कहना है कि नियमित स्क्रीनिंग और स्वास्थ्य शिक्षा को बढ़ावा देना आवश्यक है।
कैंसर के मामले और उनका असर
भारत में, कैंसर के मामलों की बढ़ती संख्या केवल युवा पीढ़ी तक सीमित नहीं है। महिलाओं में गर्भाशय ग्रीवा कैंसर और फेफड़ों के कैंसर के मामले भी बढ़ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इन कैंसरों की पहचान भी अक्सर देर से होती है, जो जागरूकता की कमी और स्क्रीनिंग की कमी के कारण है। सरकार और स्वास्थ्य संगठनों ने इस समस्या से निपटने के लिए कई कदम उठाए हैं। जैसे, एचपीवी वैक्सीनेशन कार्यक्रम और कैंसर स्क्रीनिंग अभियानों का आयोजन किया जा रहा है। हालांकि, इसके बावजूद, जागरूकता और शिक्षा की कमी से निपटने के लिए अधिक प्रयासों की आवश्यकता है।
अंत में, यह स्पष्ट है कि भारत में सिर, गर्दन और थायरॉयड कैंसर की बढ़ती दरें एक गंभीर चिंता का विषय हैं। इसके समाधान के लिए जागरूकता, शिक्षा और नियमित स्क्रीनिंग को बढ़ावा देना आवश्यक है।
