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रीढ़ की हड्डी की चोट का हो सकेगा इलाज, बैज्ञानिकों बना लिया इम्प्लांटेबल डिवाइस, रिसर्च में भी पाया गया कारगर

Researchers Have Developed An Implantable Device For Spinal Cord Injury: वैज्ञानिकों ने रीढ़ की हड्डी की चोट के इलाज के लिए नया इम्प्लांटेबल डिवाइस विकसित किया है, जो रिसर्च में कारगर और सुरक्षित साबित हुआ है। इससे रीढ़ की हड्डी में चोट की वजह से होने वाली चलने-फिरने में होने वाली दिक्कत को दूर करने में मदद मिलेगी। चलिए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं....

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Researchers Have Developed An Implantable Device For Spinal Cord Injury

Researchers Have Developed An Implantable Device For Spinal Cord Injury: रीढ़ की हड्डी की चोट अब लाइलाज नहीं रहेगी। वैज्ञानिकों ने ऐसा इम्प्लांटेबल डिवाइस (शरीर में लगाया जाने वाला उपकरण) विकसित किया है, जिससे रीढ़ की गंभीर चोटों का इलाज संभव हो सकता है। ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के वैज्ञानिकों की इस सफलता से हजारों मरीजों और पालतू जानवरों को नई उम्मीद मिली है। जानवरों पर की गई इस स्टडी में यह डिवाइस न सिर्फ सुरक्षित पाया गया, बल्कि इससे चलने-फिरने की क्षमता में सुधार भी देखने को मिला है।

वैज्ञानिकों ने बनाया खास इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस

न्यूजीलैंड की ऑकलैंड यूनिवर्सिटी के वाइपापा तौमाता राउ में वैज्ञानिकों की टीम ने एक बेहद पतला इलेक्ट्रॉनिक उपकरण तैयार किया है, जिसे रीढ़ की हड्डी पर चोट वाले हिस्से में लगाया जाता है। इसका मकसद है- रीढ़ की चोट के कारण बंद हो चुके शारीरिक कार्यों को दोबारा शुरू करना।

डिवाइस देता है हल्का विद्युत प्रवाह

प्रमुख शोधकर्ता डॉ. ब्रूस हारलैंड ने बताया कि यह डिवाइस चोटग्रस्त हिस्से में हल्का और नियंत्रित विद्युत प्रवाह भेजता है। इससे रीढ़ की मरम्मत में मदद मिलती है, जैसे त्वचा पर लगे घाव भरते हैं। यही तकनीक अब रीढ़ की चोट में भी कारगर साबित हुई है।

नतीजे बेहद सकारात्मक

शोध में यह तकनीक पहले चूहों पर आजमाई गई। जिन चूहों को रोजाना विद्युत स्टिमुलेशन दिया गया, वे चार हफ्तों में बेहतर ढंग से चलने-फिरने लगे। 12 हफ्तों के अध्ययन में यह भी देखा गया कि वे हल्के स्पर्श पर तेजी से प्रतिक्रिया देने लगे।

सुरक्षित भी साबित हुआ इलाज

इस तकनीक से इलाज करने पर चूहों की रीढ़ की हड्डी में किसी तरह की सूजन या नुकसान नहीं देखा गया, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि यह डिवाइस पूरी तरह से सुरक्षित है। इससे चलने और महसूस करने की क्षमता में भी सुधार दर्ज किया गया।

भविष्य में इंसानों के लिए भी बनेगा डिवाइस

चाल्मर्स यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर मारिया एस्पलंड ने कहा कि आगे चलकर इस तकनीक को इंसानों के लिए मेडिकल डिवाइस के रूप में विकसित किया जाएगा। अब अगला लक्ष्य यह तय करना है कि इलाज की ताकत, उसकी अवधि और बारंबारता कितनी होनी चाहिए, जिससे सबसे अच्छे परिणाम मिल सकें।

News Source: IANS

Vineet
विनीतauthor

विनीत टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में हेल्थ डेस्क के साथ बतौर चीफ कॉपी एडिटर जुड़े हैं। दिल्ली के रहने वाले विनीत को हेल्थ, फिटनेस और न्यूट्रिशन जैसे विषयों पर गहरी समझ है। इन्होंने हेल्थ, फिटनेस, न्यूट्रिशन और सप्लीमेंट के फील्ड में प्रोफेशनल सर्टिफिकेशन भी किए हैं। वे 6 साल से इस फील्ड से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर 7,000 से अधिक लेख लिख चुके हैं। विनीत की खासियत उनकी रिसर्च-बेस्ड लेखन शैली और जनहित को ध्यान में रखते हुए लिखी गई जानकारीपूर्ण स्टोरीज हैं।

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