Plastic Has Become The Enemy Of Both Health And Nature: हम रोजमर्रा की जिंदगी में प्लास्टिक का खूब इस्तेमाल करते हैं। इसमें बोतलें, पैकेजिंग, थैलियां और न जाने कितनी चीजें शामिल हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि यह प्लास्टिक हमारी सेहत और पर्यावरण को कितनी गंभीर हानि पहुंचा रही है? मशहूर मेडिकल जर्नल 'द लैंसेट' की नई रिपोर्ट इसी खतरे की ओर इशारा करती है। रिपोर्ट बताती है कि प्लास्टिक, जिसमें माइक्रोप्लास्टिक और खतरनाक केमिकल्स शामिल हैं, न सिर्फ इंसानों की सेहत को नुकसान पहुंचा रहे हैं, बल्कि पर्यावरण को भी बर्बाद कर रहे हैं।
प्लास्टिक से जुड़ी बीमारियों का बढ़ता खतरा
लैंसेट रिपोर्ट के अनुसार, प्लास्टिक मानव जीवन के हर चरण पर बीमारियों का कारण बनता है - चाहे वह जन्म हो या बुज़ुर्गावस्था। प्रोफेसर फिलिप लैंडरिगन के मुताबिक, इससे हर साल 1.5 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा का हेल्थ नुकसान हो रहा है।
सांस के जरिए शरीर में घुस रहे जहरीले कण
प्लास्टिक के उत्पादन के समय निकलने वाले पीएम 2.5, सल्फर डाइऑक्साइड, और नाइट्रोजन ऑक्साइड जैसे कण वायुमार्ग से होते हुए सीधे शरीर में पहुंचते हैं। यह कण फेफड़ों, दिल और यहां तक कि मस्तिष्क पर असर डाल सकते हैं।
माइक्रोप्लास्टिक अब शरीर के अंदर
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि माइक्रोप्लास्टिक इंसानी ऊतकों (टिशू) और शरीर के तरल पदार्थों में पाए गए हैं। हालांकि इनका पूरी तरह से प्रभाव समझने के लिए और रिसर्च की ज़रूरत है, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि ये शरीर के लिए खतरा हैं।
केमिकल्स की पारदर्शिता की भारी कमी
प्लास्टिक में कौन-कौन से केमिकल्स होते हैं, उनकी मात्रा क्या होती है, और वे कितने जहरीले हैं इसकी कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है। अमेरिका, जर्मनी और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों के विशेषज्ञों ने इस पारदर्शिता की कमी को बड़ी चिंता बताया है।
जलता प्लास्टिक बना हवा का जहर
निम्न और मध्यम आय वाले देशों में करीब 57% प्लास्टिक खुले में जलाया जाता है, जिससे न केवल हवा ज़हरीली होती है, बल्कि यह मच्छरों और हानिकारक बैक्टीरिया के पनपने में भी मदद करता है।
समाधान संभव लेकिन इच्छाशक्ति जरूरी
प्रोफेसर लैंडरिगन का कहना है कि प्लास्टिक प्रदूषण से निपटना मुश्किल नहीं, बस पारदर्शी और मजबूत नीतियों की जरूरत है। 2022 में UN के सदस्य देशों ने एक ग्लोबल प्लास्टिक ट्रीटी बनाने का संकल्प लिया था, जिसकी अगली बैठक 5 अगस्त को होनी है। इसके साथ ही, 'लैंसेट काउंटडाउन ऑन हेल्थ एंड प्लास्टिक्स' नाम से एक नया प्रोजेक्ट शुरू हुआ है, जो 2026 तक प्लास्टिक के हेल्थ इम्पैक्ट्स पर पहली रिपोर्ट देगा।
निष्कर्ष
प्लास्टिक अब सिर्फ कूड़ा नहीं, बल्कि एक जहर बन चुका है जो हमारी हवा, शरीर और पर्यावरण तीनों को बीमार बना रहा है। 'द लैंसेट' की रिपोर्ट एक चेतावनी है कि अगर अब भी समय रहते नहीं चेते, तो आने वाले दशकों में यह संकट और भी गहराएगा। समय आ गया है कि हम प्लास्टिक के उपयोग पर नियंत्रण लगाएं और स्वास्थ्य व पर्यावरण की सुरक्षा को प्राथमिकता दें।
Inputs: IANS
