Mobile Addiction and Spine Damage: एक समय था जब रीढ़ और हड्डियों से जुड़ी समस्याएं बढ़ती उम्र की पहचान मानी जाती थीं, लेकिन अब हालात बदल रहे हैं। स्मार्टफोन की बढ़ती लत के कारण 15 से 25 साल की उम्र के युवा बड़ी संख्या में अस्पतालों की ऑर्थोपेडिक OPD में गर्दन, पीठ और रीढ़ दर्द की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं। डॉक्टर इसे भविष्य के एक बड़े स्वास्थ्य संकट का संकेत मान रहे हैं।
क्यों बढ़ रही हैं स्पाइन की समस्याएं
दिल्ली के मैक्स हॉस्पिटल के ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ डॉ. दीपक अरोड़ा के अनुसार, घंटों तक मोबाइल पर झुककर स्क्रॉल करना, लेटकर फोन चलाना और शारीरिक गतिविधियों की कमी युवाओं की रीढ़ को समय से पहले कमजोर बना रही है। लगातार गलत पोस्चर में बैठने से रीढ़ की डिस्क पर दबाव बढ़ता है, जिससे नसें प्रभावित होने लगती हैं।
कम उम्र में दिख रहे गंभीर लक्षण
डॉक्टरों के मुताबिक, अब युवाओं में गर्दन दर्द, पीठ दर्द, झनझनाहट, सुन्नपन और मांसपेशियों में खिंचाव जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। कई मरीजों में लंबे समय तक गलत पोस्चर की वजह से स्पाइन से जुड़ी जटिल समस्याएं भी देखने को मिल रही हैं।
डॉक्टरों को किस बात की सबसे ज्यादा चिंता
विशेषज्ञों का कहना है कि कम उम्र में ही स्पाइन डिफॉर्मिटी यानी रीढ़ की बनावट में बदलाव के मामले सामने आ रहे हैं। यदि रीढ़ की संरचना में गंभीर परिवर्तन हो जाए तो उसे पूरी तरह ठीक करना बेहद मुश्किल हो सकता है। कई बार मरीजों को लंबे समय तक इलाज और जीवनभर तक परेशानी का सामना करना पड़ता है।
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सिर्फ रीढ़ नहीं, पूरी सेहत पर पड़ रहा असर
यह समस्या केवल गर्दन या पीठ दर्द तक सीमित नहीं है। देर रात तक मोबाइल इस्तेमाल करने से नींद की गुणवत्ता खराब होती है, आंखों पर दबाव बढ़ता है और मानसिक स्वास्थ्य भी प्रभावित हो सकता है। लगातार स्क्रीन पर समय बिताने से शारीरिक सक्रियता भी कम हो जाती है, जिससे कई अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है।
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रीढ़ को सुरक्षित रखने के लिए अपनाएं ये उपाय
विशेषज्ञ युवाओं को कुछ आसान आदतें अपनाने की सलाह देते हैं -
- हर 30 मिनट में स्क्रीन से ब्रेक लें।
- मोबाइल को आंखों के स्तर पर रखकर इस्तेमाल करें।
- सोने से कम से कम एक घंटा पहले स्क्रीन बंद कर दें।
- रोजाना व्यायाम, स्ट्रेचिंग और पैदल चलने की आदत डालें।
- लंबे समय तक एक ही पोस्चर में बैठने से बचें।
समय रहते संभलना जरूरी
डॉ. अरोड़ा कहते हैं, 'कम उम्र में बढ़ता स्पाइन दर्द सिर्फ एक सामान्य परेशानी नहीं, बल्कि आने वाले बड़े स्वास्थ्य संकट का संकेत है। अगर अभी सावधानी नहीं बरती गई तो भविष्य में इसके गंभीर परिणाम देखने को मिल सकते हैं।'
