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High Uric Acid के मरीज रोजाना खाएं ओट्स! शरीर से बाहर होगा एक्ट्रा प्यूरीन

Oats in Uric Acid: सुबह नाश्ते में ओट्स का इस्तेमाल हम अक्सर करते हैं, लेकिन क्या आप यह भी जानते हैं कि आपका यह पसंदीदा नाश्ता आपके यूरिक एसिड को खींचकर शरीर से बाहर कर देता है। आइए जानते हैं यूरिक एसिड के मरीजों के लिए लिए कैसे फायदेमंद हैं ओट्स?

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Oats for Uric Acid

जब हम प्रोटीन की मात्रा ज्यादा इंटेक करने लगते हैं, तो हमारे शरीर में प्यूरीन की मात्रा बढ़ जाती है। जो हमारे शरीर में यूरिक एसिड को बढ़ाने का काम करता है। वहीं जब यूरिक एसिड की मात्रा शरीर में ज्यादा होने लगती है, तो यह हमारे जोडों में जमा होने लगता है। जोड़ों में जमा यूरिक एसिड हमारे जॉइंट्स पेन का एक बड़ा कारण बन जाता है। ऐसे में आप अपनी डाइट में ओट्स को शामिल कर सकते हैं। यह बेहतरीन अनाज आपके यूरिक एसिड को तेजी से कम कर सकता है।

यूरिक एसिड में ओट्स खाने के फायदे (Health benefits of Oats in High Uric Acid)

ओट्स में फाइबर की उच्च मात्रा पाई जाती है, जो इसे हमारे शरीर से प्यूरीन को सोखने के कारगर बनाती है। ओट्स हमारे शरीर में जमा प्यूरीन को अपने साथ जोड़कर मल के रास्ते शरीर से बाहर निकाल देता है। इसके अलावा यह हमारे मेटॉबॉलिक रेट को बढ़ाता है, जो हमारी यूरिक एसिड की समस्या को ठीक करने में काफी मदद करता है।

कितनी बार करें ओट्स का सेवन?

पिट्सबर्ग यूनिवर्सिटी की एक रिपोर्ट के अनुसार, यदि आपके शरीर में यूरिक एसिड का लेवल बढ़ गया है तो आपको सप्ताह में कम से कम 2 बार ओट्स का सेवन जरूर करना चाहिए। इसमें आज सीजनल सब्जियों को मिलाकर भी खा सकते हैं। यह आपको यूरिक एसिड के साथ कब्ज की समस्या से भी दूर रखेगा।

डिस्क्लेमर: प्रस्तुत लेख में सुझाए गए टिप्स और सलाह केवल आम जानकारी के लिए हैं और इसे पेशेवर चिकित्सा सलाह के रूप में नहीं लिया जा सकता। किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी तरह का बदलाव करने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।

gulshan kumar
गुलशन कुमारauthor

गुलशन कुमार टाइम्स नाउ हिंदी डिजिटल के हेल्थ सेक्शन से जुड़े हैं। फिटनेस और योग के प्रति उनकी रुचि उन्हें हेल्थ जर्नलिज्म की ओर लेकर आई, जहां वे आम लोगों की जीवनशैली, सेहत और वेलनेस से जुड़े विषयों पर लगातार काम कर रहे हैं। गुलशन अबतक 2,000 से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं। उनके लेखों में आसान भाषा में दी गई जानकारी, रिसर्च-बेस्ड टिप्स और रोजमर्रा की सेहत से जुड़े विषयों की स्पष्ट समझ दिखाई देती है। हेल्थ अवेयरनेस को बढ़ावा देना, फिटनेस को सरल तरीके से समझाना और बेहतर लाइफस्टाइल के लिए उपयोगी सुझाव देना—गुलशन की लेखन शैली की खासियत है।

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