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भारत में संक्रमण नहीं, अब शुगर-हार्ट जैसी लाइफस्टाइल बीमारियां ले रहीं हैं सबसे ज्यादा जानें, लैंसेट स्टडी का खुलासा

Lifestyle Diseases Killing Indians Study Reveals: हाल ही में आई लैंसेट की एक ताजा रिपोर्ट में भारत में बढ़ती लाइफस्टाइल डिजीज के कारण होने वाली मौत को लेकर चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। रिपोर्ट की मानें तो भारत में अब संक्रमण नहीं बल्कि हार्ट डिजीज, डायबिटीज और स्ट्रोक जैसी लाइफस्टाइल बीमारियां सबसे बड़ी जानलेवा बन चुकी हैं। 1990 के मुकाबले 2021 में इन बीमारियों से मरने वालों की संख्या कई गुना बढ़ गई है। जानिए क्यों बढ़ रहीं हैं ऐसी बीमारियां और क्या हैं इससे बचने के आसान तरीके।

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Lifestyle Diseases Killing Indians Study Reveals

Lifestyle Diseases Killing Indians Study Reveals: एक समय था जब भारत में मलेरिया, टीबी और डेंगू जैसे संक्रमण लोगों की जान लेते थे। लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। लैंसेट जर्नल में प्रकाशित एक नई स्टडी के मुताबिक, भारत में अब सबसे ज्यादा मौतें संक्रमण से नहीं, बल्कि लाइफस्टाइल बीमारियों से हो रही हैं जैसे हार्ट अटैक, डायबिटीज, स्ट्रोक और हाई ब्लड प्रेशर। यह बदलाव बताता है कि हमारी जीवनशैली किस तरह धीरे-धीरे हमारी सेहत को नुकसान पहुंचा रही है। खराब खानपान, तनाव और बैठा-बैठा जीवन अब धीरे-धीरे देश की सबसे बड़ी सेहत की चुनौती बन चुका है।

संक्रमण से ज्यादा जानलेवा लाइफस्टाइल

लैंसेट की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में पिछले तीन दशकों में संक्रमण से होने वाली मौतें कम हुई हैं, लेकिन इसके साथ ही लाइफस्टाइल बीमारियों से मरने वालों की संख्या तेजी से बढ़ी है। 1990 में जहां टीबी और डायरिया जैसी बीमारियां मौत का बड़ा कारण थीं, वहीं 2021 में हार्ट डिजीज, स्ट्रोक और डायबिटीज प्रमुख वजह बन गईं। इसका मतलब है कि आज हमारे देश में 'खराब लाइफस्टाइल' संक्रमण से भी बड़ी चुनौती बन गई है।

आंकड़े बता रहे हैं सेहत की बड़ी चेतावनी

स्टडी के मुताबिक, 1990 में भारत में होने वाली कुल मौतों में से करीब आधी संक्रमण से होती थीं। लेकिन अब यह आंकड़ा घटकर 20% से भी कम रह गया है। वहीं नॉन-कम्युनिकेबल डिजीज यानी लाइफस्टाइल बीमारियों से होने वाली मौतें अब कुल मौतों का लगभग 60% हिस्सा बन चुकी हैं। यह बदलाव दिखाता है कि जैसे-जैसे देश शहरीकरण की ओर बढ़ रहा है, वैसे-वैसे खानपान और जीवनशैली में आई गिरावट हमारे शरीर को बीमार बना रही है।

शहरों में बढ़ रहे हैं के केस

दिलचस्प बात यह है कि यह खतरा सिर्फ बुजुर्गों तक सीमित नहीं रहा। लैंसेट स्टडी बताती है कि 30 से 50 साल की उम्र के बीच भी हार्ट अटैक, ब्लड प्रेशर और डायबिटीज के केस तेजी से बढ़े हैं। खासतौर पर दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और चेन्नई जैसे मेट्रो शहरों में अस्वस्थ खानपान, तनाव, नींद की कमी और एक्सरसाइज की कमी बड़ी वजह बन रही है। यही वजह है कि आज कई युवा भी 'लाइफस्टाइल डिजीज' के शिकार बन रहे हैं।

महिलाओं में भी तेजी से बढ़ रही बीमारियां

पहले माना जाता था कि हार्ट डिजीज या शुगर जैसी बीमारियां पुरुषों में ज्यादा होती हैं, लेकिन अब आंकड़े बता रहे हैं कि महिलाएं भी तेजी से इनका शिकार हो रही हैं। लैंसेट की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में महिलाओं में मोटापा, थायरॉइड और डायबिटीज के केस दोगुने से भी ज्यादा बढ़े हैं। इसका कारण है बदलती दिनचर्या, कम फिजिकल एक्टिविटी और हार्मोनल असंतुलन।

क्या है वजह बचाव

एक्सपर्ट्स का मानना है कि हमारी बदलती जीवनशैली, जंक फूड, कम नींद, तनाव और प्रदूषण जैसी चीजें इन बीमारियों की जड़ हैं। पहले लोग खुली हवा में काम करते थे, चलना-फिरना ज्यादा होता था, लेकिन अब सब कुछ मशीनों और स्क्रीन पर सिमट गया है। इससे शरीर की एक्टिविटी कम और फैट स्टोरेज ज्यादा हो गया है। अगर हम रोज थोड़ा एक्सरसाइज करें, हेल्दी खाना खाएं और नींद पूरी लें, तो इन बीमारियों के खतरे को काफी हद तक घटाया जा सकता है।

एक्सपर्ट्स की राय

हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि लैंसेट की यह रिपोर्ट भारत के लिए एक चेतावनी है। अगर अभी भी लोगों ने अपनी आदतें नहीं बदलीं, तो आने वाले सालों में भारत में हार्ट अटैक और डायबिटीज से होने वाली मौतें कई गुना बढ़ सकती हैं। सरकार और लोगों दोनों को मिलकर इस दिशा में काम करना होगा - पब्लिक हेल्थ पॉलिसी से लेकर जागरूकता अभियानों तक, ताकि लाइफस्टाइल बीमारियों की यह लहर रोकी जा सके।

भारत के लिए यह वक्त है अपने स्वास्थ्य पर गंभीरता से ध्यान देने का। संक्रमण पर काबू पा लेने के बाद अब हमारी सबसे बड़ी चुनौती खुद हमारी जीवनशैली बन चुकी है। अगर समय रहते बदलाव नहीं किया गया तो आने वाली पीढ़ियां भी इसी दायरे में फंस सकती हैं।

डिस्क्लेमर: प्रस्तुत लेख में सुझाए गए टिप्स और सलाह केवल आम जानकारी के लिए हैं और इसे पेशेवर चिकित्सा सलाह के रूप में नहीं लिया जा सकता। किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी तरह का बदलाव करने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।

Vineet
विनीतauthor

विनीत टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में हेल्थ डेस्क के साथ बतौर चीफ कॉपी एडिटर जुड़े हैं। दिल्ली के रहने वाले विनीत को हेल्थ, फिटनेस और न्यूट्रिशन जैसे विषयों पर गहरी समझ है। इन्होंने हेल्थ, फिटनेस, न्यूट्रिशन और सप्लीमेंट के फील्ड में प्रोफेशनल सर्टिफिकेशन भी किए हैं। वे 6 साल से इस फील्ड से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर 7,000 से अधिक लेख लिख चुके हैं। विनीत की खासियत उनकी रिसर्च-बेस्ड लेखन शैली और जनहित को ध्यान में रखते हुए लिखी गई जानकारीपूर्ण स्टोरीज हैं।

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