Side effects of tea for children: बेशक ही आपकी सुबह की शुरुआत और सुहानी शाम का आगाज भी चाय पीने के साथ ही होता होगा। लेकिन अगर आपसे कहा जाए कि चाय पीना किसी की मौत का कारण बन सकता है, तो ये मानना काफी मुश्किल हो सकता है। हालांकि जितना सोच में डालने वाला ये सवाल है इसका जवाब उतना ही आश्चर्यचकित करने वाला है। हाल ही में मध्य प्रदेश के देवास शहर से खबर आई कि चाय पीने के बाद डेढ़ साल के बच्चे की मौत हो गई।
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अक्सर ही आप भी चाय पीते पीते बच्चों को थोड़ी सी चाय और कोई बिस्किट दे ही देते होंगे। बिना ये सोचे की क्या वाकई में चाय पिलाना बच्चों के लिए सही है? हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक देवास का ये बच्चा अपने नाना-नानी के घर था और चाय पीते के साथ ही उसकी सांसे अचानक रुक गईं। अस्पताल ले जाने पर पुष्टि हुई की बच्चे की मृत्यु पहले ही हो चुकी थी। अब सवाल ये है कि, क्या सच में बच्चों को चाय पिलाना जानलेवा है और कितनी उम्र तक बच्चों को चाय का सेवन नहीं करने देना चाहिए, यहां देखें आपके सारे सवालों के जवाब।
Is drinking chai safe for children?
चाय पीने का चस्का बच्चों से लेकर बड़ों तक को भी खूब होता है, लेकिन सवाल ये है कि चाय पीना छोटे बच्चों के लिए कितना सुरक्षित है। और अगर नहीं तो इसकी वजह और नुकसान क्या हैं? विशेषज्ञ डॉक्टरों के मुताबिक चाय की पत्तियों में प्राकृतिक रूप से ही कैफीन जैसे तत्व मौजूद होते हैं। जो सीधे तौर पर दिमाग पर अपना असर दिखाते हैं, जो बेशक ही बच्चों के लिए सही नहीं होता है। डॉक्टर्स के अनुसार कम से कम 12 साल से कम उम्र की बच्चों को चाय पिलाने से बचना ही चाहिए, क्योंकि इतनी छोटी आयू में किसी भी प्रकार से कैफीन की लत ठीक नहीं है।
बच्चों के लिए चाय के नुकसान, Side effects of Tea
- चाय में मौजूद तत्वों में दिमाग पर हावि होने की शक्तियां होती हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक शरीर में कैफीन का इनटेक करने से बच्चों की पूरी की पूरी दिनचर्या पर नकारात्मक असर होता है। चाय पीने से बच्चों को नींद में कमी महसुस होगी जिसके परिणामस्वरूप उन्हें दिन भर थकान और नींद का अनुभव होता रहेगा।
- रोज रोज बच्चों द्वारा चाय का सेवन करने से उनको इसकी गंभीर लत लग सकती है। और नियमित रुप से चाय न मिलने पर उनको सिर दर्द समेत चिड़चिड़ आदि की शिकायत हो सकती है।
- चाय में मौजूद तरल पदार्थों के कारण बच्चों को बार बार पेशाब आने की भी शिकायत हो सकती है।
हालांकि इस बात की अभी तक कोई पुष्टि नहीं हुई है कि, देवास के बच्चे की मृत्यु कम उम्र में चाय पीने के कारण हुई है। लेकिन कई विशेषज्ञों का ये मानना है कि छोटे बच्चों द्वारा तरल पदार्थ पीते वक्त गले में अटकने की समस्या बहुत हद तक बढ़ जाती है, और इस स्थिति में भी ऐसा ही कुछ होने की संभावना है। खैर न केवल बच्चों के लिए बल्कि बड़ों के लिए भी चाय का अत्यधिक सेवन जहर समान है। चाय पीने से चक्कर आना, सिरदर्द, जी मिचलाना, नींद न आना, तनाव, चिंता, डर का अत्यधिक अनुभव होना आम माना जाता है। इसलिए यही सलाह है कि 12 साल से कम उम्र वाले बच्चों को चाय, कॉफी आदि जैसे कैफीन युक्त पदार्थों की लत न लगवाए।
