हेल्थ

एंटीबायोटिक अब बेअसर! भारत में तेजी से बढ़ा सुपरबग का खतरा, लैंसेट की रिपोर्ट में खुलासा

India Superbug Crisis : भारत में 'सुपरबग' का संकट तेजी से बढ़ रहा है और हाल ही में Lancet में प्रकाशित एक अध्ययन ने इस बात पर गंभीर चेतावनी जारी की है। यह रिपोर्ट देश के हेल्थ क्षेत्र के लिए बड़ी चुनौती पेश करता है। आइए जानते हैं क्या होता है सुपरबग जिसको लेकर किया गया सचेत?

Image

भारत में सुपरबग का खतरा!

India Superbug Crisis : हमारे देश ने बीते कुछ सालों में मेडिकल फील्ड में बड़ी-बड़ी सफलताएं हासिल की हैं। कोरोना की वैक्सीन बनाने से लेकर दुनिया भर में भेजने तक भारत के मेडिकल क्षेत्र क्षमता का लोहा दुनिया भर ने माना था। लेकिन इन सफलताओं के बीच कुछ लापरवाही भी होती है, जिसका खामियाजा लोगों को चुकाना होता है। लैंसेट ई-क्लिनिकल मेडिसिन जर्नल में हाल ही में छपी एक रिपोर्ट की मानें तो देश में 83% लोगों में 'सुपरबग' मौजूद है। आइए जानते हैं इसके बारे में विस्तार से…

क्या होता है सुपरबग? - What Is Superbug?

यह खास तरह के बैक्टीरिया होते हैं जो एंटीबायोटिक्स के प्रति प्रतिरोधी हो जाते हैं। यानी इन बैक्टीरिया पर एंटीबायोटिक दवाओं का असर नहीं होता है। यही कारण है कि इनसे पीड़ित व्यक्ति का इलाज करना लगभग असंभव हो जाता है। यह देश के लिए एक बड़ी मेडिकल चुनौती बनकर सामने आ रहा है। इसलिए इससे एक साथ मिलकर लड़ने की जरूरत है।

क्या कहता है लैंसेट का अध्ययन?

लैंसेट के इस अध्ययन में चार देशों - भारत, इटली, नीदरलैंड और संयुक्त राज्य अमेरिका के 1,200 से अधिक रोगियों को शामिल किया गया। जिसमें भारत के 83.1% मरीजों में कम-से-कम एक मल्टी-ड्रग-रेसिस्टेंट ऑर्गेनिज्म (MDRO) पाया गया। जो कि अन्य देशों के लोगों के मुकाबले बहुत ज्यादा है। इटली के लोगों में यह आंकडा महज 31.5% था, वहीं संयुक्त राज्य अमेरिका में 20.1% लोगों में सुपरबग मिला। जबकि नीदरलैंड के लोगों में इसका आंकडा मजह 10.8% था। रिपोर्ट में बताया गया कि भारत के लगभग 23.5% लोगों के शरीर में ऐसे बैक्टीरिया मिले हैं, जिनके ऊपर कार्बापेनेम जैसी 'आखिरी उम्मीद' वाली दवा भी बेअसर हैं।

क्यों बढ़ा भारत में सुपरबग का खतरा?

लैंसेट के अध्ययन में कुछ मुख्य कारण बताए गए हैं, जो भारत में सुपरबग के संकट और गंभीरता को बता रहे हैं।

  • एंटीबायोटिक्स का दुरुपयोग- बिना डॉक्टर की पर्ची के एंटीबायोटिक्स की आसानी से उपलब्धता और सेल्फ-मेडिकेशन इसकी बड़ी वजह है।
  • संक्रमण नियंत्रण में कमी- अस्पतालों में संक्रमण नियंत्रण प्रणाली की असमानता और सुरक्षा सावधानियाँ पर्याप्त नहीं हैं जो सुपरबग का खतरा बढ़ा रही हैं।
  • इलाज बीच में छोड़ना- हमारे देश में कई मरीज ट्रीटमेंट पूरा नहीं करते, जिससे बैक्टीरिया के विकास और अधिक प्रतिरोधक बनने की संभावना बढ़ जाती है।

बढ़ता वैश्विक खतरा

भारत का यह AMR संकट सिर्फ देश के स्तर तक सीमित समस्या नहीं है, बल्कि यह एक वैश्विक खतरा है। अगर इस समस्या को समय रहते काबू नहीं पाया गया तो यह देश की मेडिकल प्रगति को पीछे धकेल सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) भी AMR को एक सबसे बड़ी स्वास्थ्य चुनौती मानता है। क्योंकि इसकी वजह से दवाओं का कम असर और जांच विधियों की कमी गंभीर चिंता का विषय है।

gulshan kumar
गुलशन कुमारauthor

गुलशन कुमार टाइम्स नाउ हिंदी डिजिटल के हेल्थ सेक्शन से जुड़े हैं। फिटनेस और योग के प्रति उनकी रुचि उन्हें हेल्थ जर्नलिज्म की ओर लेकर आई, जहां वे आम लोगों की जीवनशैली, सेहत और वेलनेस से जुड़े विषयों पर लगातार काम कर रहे हैं। गुलशन अबतक 2,000 से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं। उनके लेखों में आसान भाषा में दी गई जानकारी, रिसर्च-बेस्ड टिप्स और रोजमर्रा की सेहत से जुड़े विषयों की स्पष्ट समझ दिखाई देती है। हेल्थ अवेयरनेस को बढ़ावा देना, फिटनेस को सरल तरीके से समझाना और बेहतर लाइफस्टाइल के लिए उपयोगी सुझाव देना—गुलशन की लेखन शैली की खासियत है।

और पढ़ें
End of Article