What is Digital Dementia : आज की हमारी दुनिया एक क्लिक पर सिमट गई है। मोबाइल फोन, इंटरनेट और सोशल मीडिया ने जिंदगी को काफी आसान बनाया है, लेकिन इस सुविधा की कीमत हमारे दिमाग को चुकानी पड़ रही है। जी हां हमारी याददाश्त और मानसिक क्षमता मोबाइल के ज्यादा इस्तेमाल से कमजोर हो रहे है। हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो इस स्थिति को डिजिटल डिमेंशिया कहते हैं। यह एक ऐसी मानसिक अवस्था है जिसमें लगातार डिजिटल डिवाइस पर निर्भरता बढ़ने से हमारे दिमाग की स्मरण शक्ति कमजोर होने लगती है। आइए जानते हैं इसके बारे में...
डिजिटल डिमेंशिया क्या है - What is Digital Dementia
डिजिटल डिमेंशिया कोई बीमारी नहीं, बल्कि एक मानसिक समस्या है। जिससे हमारे दिमाग पर प्रभाव पड़ता है। जब हमें छोटी-छोटी बातों को याद रखने में मुश्किल होने लगे और हर चीज के लिए मोबाइल पर निर्भर होना पड़े तो ये कमजोर याददाश्त की निशानी है। जैसे आज लोगों को नंबर, रास्ते, तारीखें याद करने के लिए मोबाइल का इस्तेमाल करना पड़ता है। इस तरह धीरे-धीरे हमारा दिमाग आलसी होने लगता है और याददाश्त कमजोर पड़ने लगती है।
मोबाइल फोन और मल्टीटास्किंग का दिमाग पर असर
आज हम लगातार नोटिफिकेशन, कॉल, मैसेज और सोशल मीडिया स्क्रॉलिंग में लगे रहते हैं, जो हमारे दिमाग को एक काम पर टिकने नहीं देता है। इस आदत को मल्टीटास्किंग कहा जाता है, जो आपको सुनने में स्मार्ट लग सकती है लेकिन दिमाग की सेहत के लिए बेहद नुकसानदायक है। ये याददाश्त कमजोर और निर्णय लेने की क्षमता को प्रभावित करता है।
डिजिटल डिमेंशिया से कैसे बचें
डिजिटल डिमेंशिया से बचने का सबसे कारगर तरीका डिजिटल डिटॉक्स करना है। इसके लिए आप दिन में कुछ समय मोबाइल से दूर रहें, किताबें पढ़ना, लिखने की आदत डालना और दिमागी खेल खेलना बेहद भी आपको डिजिटल डिमेंशिया से बचाने में मदद कर सकता है। इसके साथ ही पर्याप्त नींद, नियमित व्यायाम और आसपास लोगों से मिलना दिमाग को सक्रिय बनाए रखते हैं।
