Rising Pollution Is Claiming Thousands Of Lives Daily In Hindi: वायु प्रदूषण अब सिर्फ आंखों में जलन या सांस की परेशानी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह धीरे-धीरे लोगों की जान ले रहा है। हाल ही में हुई एक नई स्टडी जो बीमएजे (British Medical Journal) में पब्लिश हुई है, उसने दिखाया है कि प्रदूषण के कारण दुनिया भर में मौतों का आंकड़ा तेजी से बढ़ रहा है। छोटे-छोटे प्रदूषक कण (PM2.5) अब हमारे फेफड़ों से लेकर दिमाग तक को नुकसान पहुंचा रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि जिन जगहों पर हवा "थोड़ी बेहतर" मानी जाती थी, वहां भी मौतों का खतरा बढ़ा है।
BMJ की स्टडी ने खोला बड़ा सच
बीएमजे में पब्लिश इस ताजा अध्ययन में पाया गया है कि वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ने से मौतों का खतरा सीधे-सीधे जुड़ा हुआ है। इसमें दुनियाभर के कई देशों से डेटा इकट्ठा किया गया और पाया गया कि PM2.5 नामक महीन धूल कण, जो हवा में मौजूद रहते हैं, सांस के जरिए शरीर में जाकर दिल, फेफड़ों और यहां तक कि दिमाग को भी प्रभावित करते हैं।
WHO के मानकों से भी नीचे प्रदूषण
अध्ययन में सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि जिन इलाकों में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मानकों से नीचे प्रदूषण दर्ज किया गया, वहां भी मौतों में बढ़ोतरी देखने को मिली। यानी साफ-सुथरी दिखने वाली हवा भी अब पूरी तरह से सुरक्षित नहीं है। विशेषज्ञों का कहना है कि प्रदूषक कण इतने सूक्ष्म होते हैं कि वे खून की नसों में घुसकर शरीर के अंदर सूजन और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस पैदा करते हैं।
कौन हैं सबसे ज्यादा खतरे में?
डॉक्टरों के मुताबिक, बुजुर्ग, बच्चे, गर्भवती महिलाएं और पहले से हृदय या श्वसन रोग से पीड़ित लोग प्रदूषण के ज्यादा शिकार होते हैं। खासतौर पर सर्दियों के मौसम में हवा भारी हो जाती है और धूल-धुएं के कण लंबे समय तक वातावरण में बने रहते हैं। ऐसे में सांस की बीमारियां, अस्थमा अटैक और दिल की दिक्कतें अचानक बढ़ जाती हैं।
सिर्फ बाहर नहीं घर के अंदर भी छिपा खतरा
स्टडी के मुताबिक, सिर्फ बाहर की हवा ही नहीं, बल्कि घर के अंदर की हवा (Indoor Air Pollution) भी उतनी ही खतरनाक है। कुकिंग ऑयल का धुआं, धूपबत्ती, सिगरेट और बंद कमरों में वेंटिलेशन की कमी भी PM2.5 बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाते हैं। इससे नींद की कमी, थकान, सिरदर्द और आंखों में जलन जैसी समस्याएं लगातार बनी रहती हैं।
खुद को कैसे बचाएं
विशेषज्ञों के मुताबिक, प्रदूषण से बचाव के लिए कुछ आसान कदम अपनाए जा सकते हैं जैसे,
- सुबह या रात के समय जब AQI ज्यादा हो, तब बाहर एक्सरसाइज से बचें।
- N95 या N99 मास्क पहनें
- घर में एयर प्यूरिफायर लगाएं
- घर में पौधे जैसे स्नेक प्लांट या पीस लिली रखें जो हवा को शुद्ध करते हैं।
- इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए विटामिन-C और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर डाइट लें।
यह स्टडी एक चेतावनी की तरह है कि अब वायु प्रदूषण को हल्के में नहीं लिया जा सकता। हवा साफ दिखे तो भी जरूरी नहीं कि वह सेहतमंद हो। इसलिए जरूरत है जागरूक रहने की, छोटे-छोटे कदम उठाने की और यह समझने की कि अगर हम अब नहीं संभले, तो यह “साइलेंट किलर” हमारी जिंदगी का हिस्सा बन जाएगा।
डिस्क्लेमर: प्रस्तुत लेख में सुझाए गए टिप्स और सलाह केवल आम जानकारी के लिए हैं और इसे पेशेवर चिकित्सा सलाह के रूप में नहीं लिया जा सकता। किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी तरह का बदलाव करने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।
