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National Dengue Day 2025 : डेंगू में प्लेटलेट काउंट कम होना कितना खतरनाक होता है? डॉक्टर से जानें इसके बारे में विस्तार से

National Dengue Day 2025 : डेंगू बुखार होने पर आपको कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है, लेकिन डेंगू में प्लेटलेट्स का कम होना सबसे चिंताजनक समस्या है। हालांकि डेंगू होने पर प्लेटलेट्स में होने वाली कमी काफी आम बात है। लेकिन एक स्तर से नीचे जाने पर ये जानलेवा हो जाती है। आज हम आपको डेंगू की सबसे खतरनाक कंडीशन के बारे में विस्तार से बताने जा रहे हैं।

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National Dengue Day

National Dengue Day 2025 : गर्मियों में बारिश शुरु होते ही मच्छरों का प्रकोप काफी बढ़ने लगता है। जिससे मच्छर से फैलने वाले रोगों जैसे डेंगू-मलेरिया का खतरा भी बढ़ जाता है। आज यानी 16 मई के दिन राष्ट्रीय डेंगू दिवस के रूप में मनाया जाता है। जिसका उद्देश्य डेंगू के बारे में लोगों में जागरूकता लाना और डेंगू की रोकथाम के उपायों को और कारगर बनाना है। डेंगू में प्लेटलेट्स कम होना काफी आम बात है, लेकिन जब ये एक स्तर से नीचे चली जाएं तो आपकी जान के लिए खतरा पैदा हो जाता है। डेंगू में प्लेटलेट्स कम होने के खतरे को लेकर हमने बात की यशोदा हॉस्पिटल, हैदराबाद के वरिष्ठ जर्नल फिजिशियन, डॉ. एम.वी. राव से.....

डेंगू में प्लेटलेट्स का गिरना

डॉ. एम.वी. राव ने बताया कि डेंगू में प्लेटलेट का गिरना काफी परेशानी का कारण हो सकता है। लेकिन उससे भी ज्यादा डॉक्टर लक्षणों को लेकर चिंता में रहते हैं। प्लेटलेट्स की संख्याओं के लेकर नहीं। आपको बता दें कि डेंगू में प्लेटलेट की संख्या में भारी कमी आ सकती है। गंभीर कंडीशन में प्लेटलेट्स 1 लाख से भी कम हो जाती है। वहीं जब प्लेटलेट्स 20,000 से भी कम हो जाएं तो कंडीशन जानलेवा हो जाती है। प्लेटलेट्स की इतनी कम संख्या के कारण थ्रोम्बोसाइटोपेनिया हो सकता है। क्योंकि डेंगू का वायरस आपके अस्थि मज्जा को नुकसान पहुंचाता है। अस्थि मज्जा में ही प्लेटलेट का उत्पादन होता है।

Dengue Fever

Dengue Fever

डेंगू में डॉक्टरों की चिंता

डेंगू होने पर आमलोग केवल प्लेटलेट्स का कम होना ही चिंता की विषय मानते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि डेंगू में कई और भी कारण हैं, जिसके लिए डॉक्टर्स काफी परेशान रहते हैं। डॉ. एम.वी. राव ने ऐसे ही कुछ कारण विस्तार से बताएं हैं।

  • प्लाज्मा रिसाव (Plasma Leakage): डेंगू के गंभीर मामलों में रक्त वाहिकाओं से प्लाज्मा का रिसाव हो सकता है। जिससे शरीर में पानी की कमी और रक्तचाप में तेजी से गिरावट हो सकती है।
  • ब्लीडिंग (Bleeding): डेंगू का वायरस शरीर में प्लेटलेट्स को तेजी से कम करता है। जिसके कारण मसूड़ों, नाक, पेट या आंतों से रक्तस्राव हो सकता है।
  • ब्लड प्रेशर: डेंगू के बुखार में ब्लड प्रेशर का कम होना काफी खतरनाक माना जाता है। बुखार कम होने के बाद भी रक्तचाप की निगरानी करना आवश्यक है। क्योंकि प्लाज्मा रिसाव के कारण ब्लड प्रेशर में गिरावट हो सकती है।
Low Platelet Count

Low Platelet Count

डेंगू में कब कम होना शुरू होती हैं प्लेटलेट्स?

डॉ. एम.वी. राव की मानें तो डेंगू के ज्यादातर मामलों में प्लेटलेट्स का स्तर संक्रमण के चौथे दिन ही कम होने लगता है। लेकिन कुछ मामलों में ये 5-7 दिन बाद भी हो सकता है। वहीं कुछ मरीजों में प्लेटलेट्स काउंट पहले ही दिन से कम होने लगता है। इसलिए मरीज का उपचार केवल प्लेटलेट्स काउंट के आधार पर नहीं बल्कि वास्तविक कंडीशन के आधार पर किया जाता है। प्लेटलेट्स काउंट के लक्षण भी अलग-अलग हो सकते हैं। इसलिए इसके लिए जिम्मेदार किसी भी चीज पर अंतिम निर्णय डॉक्टर को ही लेने दें।

प्लेटलेट्स काउंट कम होने के साइड इफेक्ट्स

शरीर में प्लेटलेट्स काउंट कम होने पर कई तरह के लक्षण दिख सकते हैं। लेकिन लक्षण हमेशा मरीज की कंडीशन पर निर्भर करते हैं। वहीं प्लेटलेट्स की संख्या भी काफी हद तक रोग की गंभीरता को बताती है। एक्सपर्ट्स की मानें तो 50 हजार तक आई प्लेटलेट्स को आसानी से कबर किया जा सकता है। लेकिन प्लेटलेट्स की संख्या घटकर 10 हजार के नीचे चली गई है, तो इस कंडीशन से मरीज को बाहर निकालना बेहद मुश्किल होता है। आइए जानते हैं प्लेटलेट्स कम होने के साइड इफेक्ट्स...

  1. प्लेटलेट काउंट कम होने पर मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द की समस्या काफी आम है। जिससे आपको चलने-फिरने में भी परेशानी हो सकती है।
  2. प्लेटलेट काउंट कम होने पर आपको खून की उल्टी आने का खतरा हो सकता है। इसके अलावा जरा सी चोट लगने पर भी बहुत अधिक ब्लीडिंग भी हो सकती है।
  3. डेंगू में प्लेटलेट कम होने पर आपको स्किन की परेशानियां होती हैं। इसके कारण स्किन पर लाल और नीले रंग के निशान दिखाई दे सकते हैं।
  4. डेंगू के कारण प्लेटलेट्स कम होने पर आपके मसूड़ों, नाक और कान से खून आ सकता है। क्योंकि इसकी कमी से आपकी नसों की दीवार टूट जाती हैं।
डिस्क्लेमर: प्रस्तुत लेख में सुझाए गए टिप्स और सलाह केवल आम जानकारी के लिए हैं और इसे पेशेवर चिकित्सा सलाह के रूप में नहीं लिया जा सकता। किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी तरह का बदलाव करने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।
gulshan kumar
गुलशन कुमारauthor

गुलशन कुमार टाइम्स नाउ हिंदी डिजिटल के हेल्थ सेक्शन से जुड़े हैं। फिटनेस और योग के प्रति उनकी रुचि उन्हें हेल्थ जर्नलिज्म की ओर लेकर आई, जहां वे आम लोगों की जीवनशैली, सेहत और वेलनेस से जुड़े विषयों पर लगातार काम कर रहे हैं। गुलशन अबतक 2,000 से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं। उनके लेखों में आसान भाषा में दी गई जानकारी, रिसर्च-बेस्ड टिप्स और रोजमर्रा की सेहत से जुड़े विषयों की स्पष्ट समझ दिखाई देती है। हेल्थ अवेयरनेस को बढ़ावा देना, फिटनेस को सरल तरीके से समझाना और बेहतर लाइफस्टाइल के लिए उपयोगी सुझाव देना—गुलशन की लेखन शैली की खासियत है।

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