हेल्थ

डर से हार्ट अटैक तक, पीछा किए जाने से महिलाओं में 40% ज्यादा बढ़ता है हार्ट डिजीज का रिस्क, स्टडी में हुआ खुलासा

Stalked women face 40% higher heart health risk: हार्वर्ट की 20 साला स्टडी में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। स्टडी में यह पाया गया है कि स्टॉकिंग या रिट्रेनिंग ऑर्डर का अनुभव कर चुकी महिलाओं में दिल का दौरा या स्ट्रोक का खतरा 40% तक बढ़ जाता है। जानिए कैसे मानसिक तनाव और डर से हृदय स्वास्थ्य पर असर होता है।

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Stalked women face 40% higher heart health risk

Stalked women face 40% higher heart health risk: क्या आपने कभी सोचा है अगर कोई आपका बार-बार पीछा करे, आपको डराए या परेशान करे, तो ये सिर्फ मानसिक तकलीफ ही नहीं देगा, बल्कि दिल पर भी भारी असर डाल सकता है। हार्वर्ड की एक बड़ी स्टडी में पता चला है कि जिन महिलाओं ने कभी स्टॉकिंग (पीछा किए जाने) या रिस्ट्रैनिंग ऑर्डर जैसी स्थिति झेली है, उनमें आने वाले समय में हार्ट अटैक या स्ट्रोक का खतरा करीब 40% ज्यादा होता है। मतलब, ये डर मन में तो बैठता ही है, लेकिन चुपचाप आपके दिल की सेहत को भी खराब कर देता है। आइए जानते हैं ये स्टडी क्या कहती है और इससे सबक क्या लेना चाहिए।

20 साल तक चली रिसर्च

इस स्टडी में अमेरिका की 66,000 से ज्यादा महिलाएं शामिल थीं, जिनकी उम्र 36 से 56 साल के बीच थी। शुरुआत में किसी को हार्ट डिजीज नहीं थी। लेकिन 20 साल तक ट्रैक करने के बाद पता चला कि जिन महिलाओं ने स्टॉकिंग या रिस्ट्रैनिंग ऑर्डर का अनुभव किया, उनमें हार्ट अटैक या स्ट्रोक की संभावना लगभग 40% ज्यादा थी।

सिर्फ डर नहीं दिल पर भी असर

अक्सर लोग सोचते हैं कि पीछा किया जाना सिर्फ मानसिक परेशानी है, लेकिन हकीकत ये है कि लगातार डर और तनाव आपके दिल पर भी असर डालता है। शरीर में स्ट्रेस हार्मोन बढ़ जाते हैं, जिससे ब्लड प्रेशर और दिल पर दबाव बढ़ सकता है।

40% बढ़ा खतरा

रिपोर्ट में साफ कहा गया कि इस तरह की घटना झेलने वाली महिलाओं में दिल की बीमारी का खतरा बाकी महिलाओं की तुलना में करीब डेढ़ गुना ज्यादा है। यानी असर सिर्फ उस वक्त नहीं, बल्कि सालों तक रह सकता है।

क्यों है ये पब्लिक हेल्थ का मुद्दा

स्टॉकिंग को हल्के में लेना गलत है। ये सिर्फ पर्सनल प्रॉब्लम नहीं, बल्कि पब्लिक हेल्थ का मामला भी है। अगर समय रहते इन महिलाओं को मानसिक सहारा, कानूनी मदद और सुरक्षा मिले, तो उनके दिल की सेहत को बचाया जा सकता है।

जागरूकता और मदद जरूरी

जरूरी है कि महिलाएं और उनका परिवार इस खतरे को समझें। डर या पीछा किए जाने की घटना को छुपाने के बजाय रिपोर्ट करें, मदद लें और मानसिक व शारीरिक सेहत का ख्याल रखें।

दिल की सेहत के लिए और क्या करें

सिर्फ स्टॉकिंग से जुड़े डर ही नहीं, बल्कि रोजमर्रा का तनाव, खराब खान-पान और अनहेल्दी लाइफस्टाइल भी महिलाओं में दिल की बीमारी बढ़ाते हैं। हेल्दी डाइट, एक्सरसाइज और स्ट्रेस मैनेजमेंट से खतरा कम हो सकता है।

निष्कर्ष

ये स्टडी हमें बताती है कि डर और तनाव सिर्फ दिमाग पर नहीं, बल्कि दिल पर भी गहरी चोट छोड़ते हैं। अगर किसी महिला को स्टॉकिंग जैसी स्थिति का सामना करना पड़े, तो उसे गंभीरता से लें, मदद दें और समय पर इलाज करवाएं। सुरक्षित माहौल और जागरूकता से न सिर्फ मानसिक, बल्कि दिल की सेहत भी बेहतर रह सकती है।

Vineet
विनीतauthor

विनीत टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में हेल्थ डेस्क के साथ बतौर चीफ कॉपी एडिटर जुड़े हैं। दिल्ली के रहने वाले विनीत को हेल्थ, फिटनेस और न्यूट्रिशन जैसे विषयों पर गहरी समझ है। इन्होंने हेल्थ, फिटनेस, न्यूट्रिशन और सप्लीमेंट के फील्ड में प्रोफेशनल सर्टिफिकेशन भी किए हैं। वे 6 साल से इस फील्ड से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर 7,000 से अधिक लेख लिख चुके हैं। विनीत की खासियत उनकी रिसर्च-बेस्ड लेखन शैली और जनहित को ध्यान में रखते हुए लिखी गई जानकारीपूर्ण स्टोरीज हैं।

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