Ebola Virus Health Emergency 2026: पूरी दुनिया में एक बार फिर इबोला वायरस को लेकर चिंता बढ़ गई है। World Health Organization ने अफ्रीकी देशों में तेजी से फैल रहे इबोला संक्रमण को 'पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी ऑफ इंटरनेशनल कंसर्न (PHEIC)' घोषित कर दिया है। यानी अब इसे वैश्विक स्तर की गंभीर स्वास्थ्य आपात स्थिति माना जा रहा है।
इसके साथ ही Africa Centres for Disease Control and Prevention ने भी इसे 'पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी ऑफ कॉन्टिनेंटल सिक्योरिटी' घोषित किया है। हेल्थ एजेंसियों का मानना है कि यदि समय रहते संक्रमण को नियंत्रित नहीं किया गया तो यह कई देशों में तेजी से फैल सकता है।
क्या है बुंडीबुग्यो स्ट्रेन
इबोला वायरस का बुंडीबुग्यो स्ट्रेन बेहद खतरनाक माना जाता है। यह एक गंभीर वायरल हेमरेजिक फीवर है, जिसमें संक्रमित व्यक्ति को तेज बुखार, अत्यधिक कमजोरी, उल्टी, दस्त और कई मामलों में अंदरूनी रक्तस्राव जैसी समस्याएं हो सकती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार इस बीमारी की मृत्यु दर काफी अधिक होती है। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि फिलहाल बुंडीबुग्यो स्ट्रेन के लिए कोई अप्रूव्ड वैक्सीन या स्पेसिफिक ट्रीटमेंट उपलब्ध नहीं है।
भारत सरकार ने जारी की एडवाइजरी
भारत सरकार ने हालात को देखते हुए भारतीय नागरिकों के लिए विशेष ट्रैवल एडवाइजरी जारी की है। सरकार ने कहा है कि अगली सूचना तक डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो, युगांडा और साउथ सुडान की गैर-जरूरी यात्रा से बचें। जो भारतीय नागरिक इन देशों में रह रहे हैं या यात्रा कर रहे हैं, उन्हें स्थानीय हेल्थ डिपार्टमेंट्स द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करने और अतिरिक्त सावधानी बरतने को कहा गया है।
एयरपोर्ट और हेल्थ एजेंसियां अलर्ट पर
केंद्र सरकार ने एयरपोर्ट अथॉरिटीज और हेल्थ एजेंसियों को भी सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। विदेश से आने वाले यात्रियों की स्क्रीनिंग और निगरानी बढ़ाई जा रही है ताकि किसी भी संभावित संक्रमण को समय रहते रोका जा सके। सरकार के अनुसार फिलहाल भारत में बुंडीबुग्यो स्ट्रेन इबोला वायरस का कोई मामला सामने नहीं आया है। हालांकि हेल्थ मिनिस्ट्री लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और एहतियात के तौर पर निगरानी बढ़ा दी गई है।
कितना खतरनाक है इबोला वायरस
इबोला वायरस को दुनिया की सबसे खतरनाक वायरल बीमारियों में गिना जाता है। यह संक्रमण बहुत तेजी से फैल सकता है और गंभीर मामलों में मरीज के शरीर के अंदरूनी अंगों को नुकसान पहुंचाने लगता है। इस बीमारी में तेज बुखार, कमजोरी, उल्टी, दस्त और अंदरूनी रक्तस्राव जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। कई मामलों में मरीज की हालत अचानक बेहद गंभीर हो सकती है। हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार इबोला की मृत्यु दर काफी ज्यादा होती है, इसलिए इसे हाई रिस्क वायरस माना जाता है। सबसे चिंता की बात यह है कि बुंडीबुग्यो स्ट्रेन के लिए फिलहाल कोई अप्रूव्ड वैक्सीन या स्पेसिफिक ट्रीटमेंट उपलब्ध नहीं है, जिस वजह से WHO और दुनिया भर की हेल्थ एजेंसियां इसे लेकर अलर्ट मोड पर हैं।
किन देशों में फैल रहा है इबोला वायरस
रिपोर्ट्स के मुताबिक डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो और युगांडा में इबोला वायरस के बुंडीबुग्यो स्ट्रेन का संक्रमण तेजी से फैल रहा है। इसके अलावा आसपास के देशों, खासकर South Sudan यानी साउथ सुडान में भी संक्रमण फैलने का खतरा काफी बढ़ गया है। WHO ने चेतावनी दी है कि बॉर्डर वाले क्षेत्रों में संक्रमण का रिस्क ज्यादा है।
WHO ने क्यों बढ़ाई निगरानी
WHO की इमरजेंसी कमेटी ने 22 मई 2026 को विशेष सिफारिशें जारी करते हुए कहा कि एयरपोर्ट और एंट्री पॉइंट्स पर निगरानी बढ़ाई जाए। खासतौर पर उन यात्रियों की जांच की जाए जो प्रभावित क्षेत्रों से आ रहे हैं और जिनमें बुखार या अन्य संदिग्ध लक्षण दिखाई दे रहे हों। इसके साथ ही WHO ने लोगों को उन इलाकों की यात्रा से बचने की सलाह दी है जहां बुंडीबुग्यो वायरस डिटेक्शन की पुष्टि हो चुकी है।
इबोला के मुख्य लक्षण क्या हैं
इबोला संक्रमण होने पर मरीज में ये लक्षण दिखाई दे सकते हैं। इसमें आपको तेज बुखार, शरीर में दर्द और कमजोरी, उल्टी और दस्त, गले में दर्द, अत्यधिक थकान, गंभीर मामलों में अंदरूनी रक्तस्राव का सामना करना पड़ सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि संक्रमित व्यक्ति के शारीरिक संपर्क, संक्रमित तरल पदार्थ या संक्रमित वस्तुओं के संपर्क से वायरस फैल सकता है।
क्यों बढ़ी पूरी दुनिया की चिंता
WHO का कहना है कि अफ्रीकी देशों में तेजी से बढ़ रहे मामलों को देखते हुए इंटरनेशनल लेवल पर सतर्कता जरूरी हो गई है। इसी वजह से ग्लोबल हेल्थ अलर्ट जारी किया गया है।हेल्थ एक्सपर्ट्स लोगों से अपील कर रहे हैं कि वे अफवाहों से बचें, केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करें और विदेश यात्रा के दौरान जरूरी सावधानियां जरूर बरतें।
