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क्या प्रोटीन डाइट से बिगड़ता है बॉडी में यूरिक एसिड लेवल, बढ़ जाता है जोड़ों का दर्द, एक्सपर्ट से जानें सच्चाई

Does High Protein Cause Uric Acid: अक्सर हम देखते हैं कि जिन लोगों को शरीर में हाई यूरिक एसिड की समस्या रहती है, वह डाइट मे ज्यादा प्रोटीन लेने से बचते हैं। क्योंकि एक आम धारणा है कि ज्यादा प्रोटीन लेने से यूरिक एसिड का लेवल और भी बढ़ जाता है। लेकिन क्या वाकई प्रोटीन खाने से यूरिक एसिड बढ़ता है? हाल ही में एक हेल्थ एक्सपर्ट और डायटीशियन ने इसको लेकर महत्वपूर्ण जानकारी शेयर की है। इस लेख में हम आपको इसके बारे में विस्तार से बता रहे हैं....

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Does High Protein Cause Uric Acid

Does High Protein Cause Uric Acid: आजकल फिटनेस ट्रेंड में हाई प्रोटीन डाइट बहुत पॉपुलर है। लेकिन जिन लोगों को हाई यूरिक एसिड या गाउड जैसी जोड़ों की समस्याएं हैं वह इसके सेवन से बचते नजर आते हैं। आमतौर पर लोग मानते हैं कि ज्यादा प्रोटीन खाने से यूरिक एसिड बढ़ता है और जोड़ों का दर्द शुरू हो जाता है। दाल, दूध, पनीर या व्हे प्रोटीन जैसे सोर्स को कई बार मुख्य कारण मान लिया जाता है। लेकिन क्या वाकई ऐसा है?

हेल्थ इन्फ्लूएंसर, न्यूट्रिशनिस्ट और डाइटीशियन प्रियंका कहती हैं कि यह पूरी तरह सच नहीं है। असल में यूरिक एसिड बढ़ने के पीछे सबसे बड़ा रोल रिफाइंड कार्ब्स और शुगर का होता है। अगर शरीर बार-बार आपको थकान, अचानक जोड़ों का दर्द, सुबह-सुबह जकड़न या सूजन जैसे सिग्नल दे रहा है तो इन्हें हल्के में न लें। सही समय पर जांच और बैलेंस्ड डाइट ही इसका समाधान है।

ये चीजें हैं हाई यूरिक एसिड की असली वजह - Reasons For High Uric Acid In Hindi

डायटीशियन प्रियंका बताती हैं कि दाल, दूध, अंडा या व्हे प्रोटीन जैसी रोजमर्रा की डाइट में शामिल की जाने वाली चीजों को यूरिक एसिड का बड़ा कारण मानना गलत है। आपको बता दें कि असल में यह समस्या ज्यादा मैदा, जंक फूड और मीठे ड्रिंक्स के अधिक सेवन के कारण होती है। क्योंकि ये चीजें शरीर में प्यूरीन मेटाबोलिज्म को प्रभावित करती हैं और यूरिक एसिड को तेजी से बढ़ा सकती हैं।

यूरिक एसिड बढ़ने पर शरीर देता है ये संकेत - Signs And Symptoms Of Increased Uric Acid in body

आपको जानकर हैरानी हो सकती है कि जब शरीर में यूरिक एसिड स्तर बढ़ता है, तो यह कई बार चुपचाप असर करता है और इसके लक्षण आमतौर पर नोटिस नहीं हो पाते हैं। लेकिन समय रहते कुछ लक्षण दिखने लगते हैं जैसे,

  • अचानक जोड़ों में तेज दर्द, खासकर अंगूठे में
  • जोड़ों में सूजन और लालिमा
  • सुबह उठते ही जकड़न
  • किडनी स्टोन का खतरा
  • लगातार थकान और बेचैनी

बॉडी में यूरिक एसिड की हेल्दी रेंज क्या है?

डायटीशियन प्रियंका के अनुसार, जोड़ों से जुड़ी किसी भी तरह की समस्या के लिए शरीर में यूरिक एसिड का सही लेवल जानना जरूरी है। यह पुरुष और महिलाओं में अलग-अलग हो सकता है जैसे,

  • महिलाओं के लिए: 6 mg/dL से कम
  • पुरुषों के लिए: 7 mg/dL से कम

अगर रिपोर्ट इससे ज्यादा आती है तो तुरंत डॉक्टर या डाइटीशियन की सलाह लेना चाहिए।

बैलेंस्ड डाइट से होगा कंट्रोल

डायटीशियन प्रियंका कहती हैं कि यूरिक एसिड को कंट्रोल करने के लिए बैलेंस्ड डाइट अपनाना जरूरी है। डाइट में ज्यादा सब्जियां, फल, फाइबर और पानी शामिल करें। इसके साथ ही मीठे ड्रिंक्स, फ्राइड स्नैक्स और रिफाइंड कार्ब्स से दूरी बनाएं। आपको यूरिक एसिड से बचने के लिए प्रोटीन को पूरी तरह छोड़ने की जरूरत नहीं, बस बैलेंस्ड मात्रा में लेने की जरूरत है।

समय रहते जांच कराएं

अगर आपके जोड़ों में बार-बार दर्द या सूजन होती है तो इसे नजरअंदाज न करें। ब्लड टेस्ट से यूरिक एसिड की जांच आसान है। शुरुआती स्तर पर ही पता चल जाए तो डाइट और लाइफस्टाइल से इसे काबू में किया जा सकता है।

हाई प्रोटीन डाइट को यूरिक एसिड का सीधा कारण मानना एक मिथ है। डाइटीशियन प्रियंका के अनुसार, रिफाइंड कार्ब्स और शुगर इसका असली कारण हैं। बैलेंस्ड डाइट, समय पर जांच और सही लाइफस्टाइल अपनाकर आप यूरिक एसिड को नियंत्रित रख सकते हैं और जोड़ों के दर्द से बच सकते हैं।

डिस्क्लेमर: प्रस्तुत लेख में सुझाए गए टिप्स और सलाह केवल आम जानकारी के लिए हैं और इसे पेशेवर चिकित्सा सलाह के रूप में नहीं लिया जा सकता। किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी तरह का बदलाव करने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।

Vineet
विनीतauthor

विनीत टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में हेल्थ डेस्क के साथ बतौर चीफ कॉपी एडिटर जुड़े हैं। दिल्ली के रहने वाले विनीत को हेल्थ, फिटनेस और न्यूट्रिशन जैसे विषयों पर गहरी समझ है। इन्होंने हेल्थ, फिटनेस, न्यूट्रिशन और सप्लीमेंट के फील्ड में प्रोफेशनल सर्टिफिकेशन भी किए हैं। वे 6 साल से इस फील्ड से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर 7,000 से अधिक लेख लिख चुके हैं। विनीत की खासियत उनकी रिसर्च-बेस्ड लेखन शैली और जनहित को ध्यान में रखते हुए लिखी गई जानकारीपूर्ण स्टोरीज हैं।

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