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Blindness in children: बच्चों में अंधापन की समस्या को न करें नजरअंदाज, जानें क्या हैं इसके लक्षण

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Jan 27, 2023, 08:36 PM IST

Blindness in children: उम्र के बढ़ने पर नजर कमजोर होना, मोतियाबिंद जैसी समस्याएं होना कोई नई बात नहीं है। बच्चों में अंधापन गंभीर परेशानी है। इसके लक्षणों में आंखों में लालिमा, आंखों में पानी आना आदि शामिल हैं। वैसे आंखों से जुड़ी समस्या होने पर इग्नोर नहीं करना चाहिए और बीमारी का इलाज जल्द से जल्द करवाना चाहिए।

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बच्चों में अंधापन

KEY HIGHLIGHTS
  • अन्य हेल्थ कंडिशंस की तरह आई प्रॉब्लम्स होना भी सामान्य है।
  • बच्चों में अंधापन का एक कारण पोषण में कमी हो सकता है।
  • बच्चों में इस परेशानी के इलाज के लिए डॉक्टर चश्मा या कॉन्टैक्ट लैंस की सलाह दे सकते हैं।

Blindness in children: हमारी आंखें भगवान का दिया वो खूबसूरत तोहफा है, जिससे हम पूरी दुनिया को देखते हैं। लेकिन, अन्य हेल्थ कंडिशंस की तरह आई प्रॉब्लम्स होना भी सामान्य है। यही नहीं, उम्र के बढ़ने पर नजर कमजोर होना, मोतियाबिंद जैसी समस्याएं होना कोई नई बात नहीं है। लेकिन, कम उम्र में आंखों की परेशानी गंभीर हो सकती है। बच्चों में अंधापन का एक कारण पोषण में कमी हो सकता है। ऐसी बहुत सी आई कंडिशंस होती हैं जो शिशु को जन्म के बाद होती हैं लेकिन कुछ जन्मजात भी हो सकती हैं।आइए जानें बच्चों में अंधापन की समस्या के बारे में और जानें क्या हैं इसके लक्षण?

बच्चों में अंधेपन के क्या हो सकते हैं लक्षण?

बच्चों में ब्लाइंडनेस होने पर उन्हें आंखों में रेडनेस, आंखों में पानी आना, किसी भी चीज पर कॉन्संट्रेट न कर पाना आदि शामिल हैं। यही नहीं बच्चों में इसके अन्य लक्षण भी नजर आ सकते हैं। इसलिए अगर आपको अपने बच्चे में कोई भी समस्या नजर आए, तो डॉक्टर से सलाह अवश्य लें। यह भी समझें कि बच्चों में ब्लाइंडनेस अलग तरह की भी हो सकती है।

बच्चों में अंधेपन के क्या हैं कारण?

बच्चों में अंधापन प्रेग्नेंसी के दौरान भी हो सकता है। अगर गर्भ में शिशु का विकास सही न हो रहा हो, तो इससे यह समस्या हो सकती है। इसके अन्य कारण इस प्रकार हैं:

  • जेनेटिकल
  • दुर्घटना
  • आंख में इंफेक्शन
  • मोतियाबिंद
  • क्रॉस्ड आई
  • कॉन्जेनिटल ग्लूकोमा
  • डायबिटीज
बच्चों में अंधेपन का इलाज

बच्चों में इस परेशानी के इलाज के लिए डॉक्टर चश्मा या कॉन्टैक्ट लैंस की सलाह दे सकते हैं। इसके साथ ही कई स्थितियों में सर्जरी के लिए भी कहा जा सकता है। ब्लाइंडनेस का एक कारण पर्याप्त न्यूट्रिशन का न मिल पाना भी हो सकता है। ऐसे में, अपने बच्चे के आहार में भरपूर्ण विटामिन और मिनरल्स आदि को शामिल करें।

संपूर्ण हेल्थ के साथ ही बच्चों के आंखों का ध्यान रखना भी जरूरी है। लेकिन अगर आपके बच्चे को यह समस्या है तो इससे परेशान न हों और तुरंत डॉक्टर की सलाह लें। आजकल ब्लाइंड बच्चों के लिए भी उपयुक्त स्कूल आदि मौजूद हैं। अपने बच्चे के आत्मविश्वास को बढ़ाएं और स्वावलम्बी बनने में मदद करें।

(डिस्क्लेमर: प्रस्तुत लेख में सुझाए गए टिप्स और सलाह केवल आम जानकारी के लिए हैं और इसे पेशेवर चिकित्सा सलाह के रूप में नहीं लिया जा सकता। किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी तरह का बदलाव करने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।)

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