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दीपिका कक्कर को हुआ स्टेज-2 का कैंसर, डॉक्टर से जानें क्या है Liver Cancer और कैसे करें इलाज?

Dipika Kakkar Liver Cancer : बॉलीवुड एक्ट्रेस दीपिका कक्कर को लिवर में एक ट्यूमर का पता हाल ही में कुछ दिन पहले चला था। लेकिन बीते रोज आई खबर में उन्हें स्टेज-2 के कैंसर का पता चला है। आइए जानते हैं क्या होता है लिवर कैंसर और किस स्टेज पर जाकर ये जानलेवा हो सकता है?

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dipika kakkar liver cancer

बॉलीवुड एक्ट्रेस दीपिका कक्कर को लिवर में एक ट्यूमर का पता हाल ही में कुछ दिन पहले चला था। लेकिन बीते रोज आई खबर में उन्हें स्टेज-2 के कैंसर का पता चला है। टीवी एक्ट्रेस दीपिका कक्कड़ को स्टेज 2 का लिवर कैंसर है इस खबर ने उनके फैंस को चिंता में डाल दिया है। लोग लगातार सवाल कर रहे हैं कि स्टेज 2 का लिवर कैंसर कितना खतरनाक होता है। और इससे क्या जान का खतरा भी हो सकता है? आपके इन सभी सवालों को ध्यान में रखते हुए हमने बात की अमृता हॉस्पिटल फरीदाबाद, के प्रिंसिपल कंसल्टेंट और लिवर ट्रांसप्लांट और एचपीबी सेवाओं के प्रमुख डॉ. शालीन अग्रवाल से...

बढ़ेगी जागरूकता

डॉ. शालीन अग्रवाल ने कहा कि अभिनेत्री दीपिका कक्कड़ ने उनके स्टेज 2 लिवर कैंसर की जानकारी आम लोगों के बीच साझा की है मैं उनके इस साहस के लिए उनकी सराहना करता हूं। उनका खुलापन न केवल जागरूकता बढ़ाएगा बल्कि लिवर कैंसर की प्रारंभिक पहचान और सक्रिय स्वास्थ्य प्रबंधन के महत्व को भी रेखांकित करता है।

क्या होता है स्टेज 2 का लिवर कैंसर?

डॉ. शालीन अग्रवाल की मानें तो स्टेज 2 लिवर कैंसर में आम तौर पर 2 सेमी से बड़ा लेकिन 5 सेमी से छोटा एक ट्यूमर या 2-3 ट्यूमर होते हैं। जिनमें से कोई भी 3 सेमी से बड़ा नहीं होता है। इस तरह के लिवर कैंसर की शुरूआत में आपको अक्सर पेट में तकलीफ, थकान या तेजी से वजन घटने जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। यही कारण है कि इसका समय से इलाज काफी मुश्किल हो जाता है।

लिवर कैंसर का उपचार कैसे करें?

डॉ. शालीन अग्रवाल ने बताया कि स्टेज 2 लिवर कैंसर के लिए कई तरह के उपचार विकल्प हैं लेकिन यह लिवर की कंडीशन, कैंसर की स्टेज और रोगी की वास्तविक कंडीशन पर अलग-अलग हो सकते हैं। उपचारात्मक दृष्टिकोणों में सर्जिकल रिसेक्शन या लिवर प्रत्यारोपण भी शामिल है। जो रोगी सर्जरी के लिए अनुपयुक्त होते हैं, वह ट्रांसआर्टेरियल कीमोएम्बोलाइजेशन (टीएसीई), ट्रांसआर्टेरियल रेडियोएम्बोलाइज़ेशन (टीएआरई) या रेडियोफ्रीक्वेंसी एब्लेशन (आरएफए) जैसे उपचारों का सहारा भी ले सकते हैं। ये सभी विकल्प ट्यूमर के विकास को नियंत्रित करने और कैंसर के लक्षणों को कम करने के लिए प्रभावी हो सकते हैं।

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गुलशन कुमारauthor

गुलशन कुमार टाइम्स नाउ हिंदी डिजिटल के हेल्थ सेक्शन से जुड़े हैं। फिटनेस और योग के प्रति उनकी रुचि उन्हें हेल्थ जर्नलिज्म की ओर लेकर आई, जहां वे आम लोगों की जीवनशैली, सेहत और वेलनेस से जुड़े विषयों पर लगातार काम कर रहे हैं। गुलशन अबतक 2,000 से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं। उनके लेखों में आसान भाषा में दी गई जानकारी, रिसर्च-बेस्ड टिप्स और रोजमर्रा की सेहत से जुड़े विषयों की स्पष्ट समझ दिखाई देती है। हेल्थ अवेयरनेस को बढ़ावा देना, फिटनेस को सरल तरीके से समझाना और बेहतर लाइफस्टाइल के लिए उपयोगी सुझाव देना—गुलशन की लेखन शैली की खासियत है।

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