Diabetes side effects among youth: पहले डायबिटीज और बांझपन की समस्या ज्यादातर उम्र बढ़ने के बाद नजर आती थी। लेकिन अब 20 से 30 साल के युवाओं में भी यह तेजी से बढ़ रहा है। डायबिटीज शरीर में हार्मोन और मेटाबॉलिज्म को खराब कर देती है, जिससे बच्चे होने में परेशानी होती है। यहां तक कि प्री-डायबिटीज या इंसुलिन रेजिस्टेंस भी युवा लड़के-लड़कियों में प्रजनन हार्मोन और महिलाओं के पीरियड्स को प्रभावित कर सकता है। इस वजह से गर्भधारण करने में दिक्कत आती है। इसके रोकथाम के लिए डायबिटीज कंट्रोल करने के लिए दवा लें, नियमित व्यायाम करें और पौष्टिक आहार का सेवन करना काफी जरूरी हैं।
क्या है डायबिटीज, जानें इसके लक्षण
डायबिटीज तब होती है जब शरीर इंसुलिन नहीं बना पाता या शरीर इंसुलिन पर ठीक से रिएक्ट नहीं करता। इससे शुगर लेवल बढ़ जाता है और धीरे-धीरे शरीर के कई अंग खराब हो सकते हैं। बार-बार पेशाब आना, ज्यादा प्यास लगना, भूख बढ़ना, घाव का देर से भरना और धुंधला दिखना यह डायबिटीज के लक्षण हैं। आनुवांशिक, गलत खानपान, मोटापा, बैठने वाली जीवनशैली और हार्मोनल विकास जैसे की पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम इसके मुख्य कारण हैं।
डायबिटीज और इनफर्टिलिटी का क्या कनेक्शन है
नोएडा स्थित मदरहुड फर्टिलिटी एवं आयवीएफ स्पेशालिस्ट डॉ. वर्षा अग्रवाल बताती हैं - डायबिटीज पुरुषों और महिलाओं दोनों की प्रजनन क्षमता को प्रभावित करती है। डायबिटीज से पुरुषों में स्पर्म काउंट कम होना, स्पर्म की क्वालिटी खराब होना और इरेक्शन की समस्या हो सकती है। महिलाओं में ओवुलेशन में दिक्कत, PCOS का खतरा और अंडे की क्वालिटी में कमी आ सकती है। अगर डायबिटीज कंट्रोल न हो तो गर्भपात और प्रीमैच्योर डिलीवरी का खतरा भी बढ़ जाता है। दुर्भाग्यवश, कई युवा तब तक डायबिटीज से अनजान रहते हैं जब तक उन्हें गर्भधारण में परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता। हमारे पास हर महीने कम से कम 3 से 4 युवा दंपत्ति अनियंत्रित डायबिटीज के साथ आते हैं और उन्हें प्री-कॉन्सेप्शन केयर की सलाह दी जाती है। परिवार नियोजन कर रहे लोगों को शुरू से ही डायबिटीज कंट्रोल कर फर्टिलिटी को सुरक्षित रखना बेहद जरूरी है।
वहीं दिल्ली के नोवा आईवीएफ सेंटर में फर्टिलिटी स्पेशालिस्ट डॉ. संदीप तलवार कहते हैं - 20 के अंत और 30 की शुरुआत में कई युवा डायबिटीज से अनजान होते हैं और हार्मोनल असंतुलन व फर्टिलिटी की समस्याओं के साथ आते हैं, जिससे मानसिक तनाव भी बढ़ जाता है। खराब लाइफस्टाइल, गलत खानपान, नींद की कमी और तनाव से डायबिटीज और हार्मोनल समस्याएं बढ़ रही हैं। डायबिटीज की जल्दी जांच और कंट्रोल से भविष्य की कई दिक्कतों को रोका जा सकता है, साथ ही प्रजनन क्षमता भी सुरक्षित रहती है। इसी के साथ शादी से पहले डायबिटीज की जांच करवाना भी बेहतर होता है।
क्या डायबिटीज से जुड़े बांझपन का कोई इलाज है
इस डॉ. वर्षा उम्मीद जगाती हैं। उनका कहना है कि इसका निदान है लेकिन इलाज ले रहे व्यक्ति को अनुशासन में रहना होगा। डायबिटीज से जुड़ा बांझपन अक्सर जीवनशैली में शुरुआती बदलाव, दवाइयों और समय पर मेडिकल केयर से नियंत्रित किया जा सकता है। सही खानपान (जैसे हरी सब्जियां, एवोकाडो, दालें, मछली आदि), नियमित व्यायाम और ब्लड शुगर कंट्रोल से डायबिटीज और बांझपन को काफी हद तक रोका जा सकता है।
अगर आप इस एज ग्रुप में हैं और फैमिली प्लान कर रहे हैं तो समय रहते शुगर टेस्ट और हेल्थ चेकअप कराना जरूरी है। जागरूकता और सही देखभाल से इनफर्टिलिटी को बदला जा सकता है।
