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टीवी कम देखने से 40% घट सकता है डिप्रेशन, नई स्टडी में चौंकाने वाला खुलासा, जानें कितनी देर देखना है सुरक्षित

नई स्टडी बताती है कि टीवी देखने का समय कम करने से डिप्रेशन यानी अवसाद का जोखिम लगभग 40% तक घट सकता है। जानिए कितनी देर टीवी देखना सुरक्षित है और इसे बदलकर आप अपनी सेहत कैसे सुधार सकते हैं।

डिप्रेशन से बचना है तो कम कर दें टीवी देखना

डिप्रेशन से बचना है तो कम कर दें टीवी देखना

हम सब जानते हैं कि आजकल टीवी और स्क्रीन के सामने बैठना हमारी रोजमर्रा की आदत बन चुका है। लेकिन क्या आपने सोचा है कि इसी आदत का सीधा असर आपके मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ सकता है? एक नई स्टडी में वैज्ञानिकों ने यह पाया है कि यदि हम रोज की टीवी देखने की आदत को थोड़ा सीमित करें और वह समय कुछ और गतिविधियों में लगाएं, तो डिप्रेशन यानी अवसाद का जोखिम काफी कम हो सकता है। खास बात यह है कि यह शोध रोसा पालाजुएलोस-गोंजालेज और उनकी टीम ने नीदरलैंड के ग्रोनिंगन विश्वविद्यालय में किया और इसे यूरोपीय मनोचिकित्सा जर्नल में प्रकाशित किया गया।

यह स्टडी 65,000 से अधिक वयस्कों पर चार साल तक चली और इसके नतीजे खासकर मध्य उम्र के लोगों के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। शोध के मुताबिक टीवी का समय हर दिन एक से दो घंटे कम करने से डिप्रेशन होने की संभावना लगभग 40% तक घट सकती है। आइए जानें कि इस शोध में क्या-क्या बातें सामने आईं और कैसे आप अपनी आदतों को बदलकर अपने मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बना सकते हैं।

टीवी देखने का समय और डिप्रेशन का सीधा कनेक्शन

इस बड़े शोध में यह देखा गया कि जिन लोगों ने अपनी टीवी देखने की अवधि को कम किया और वह समय किसी और गतिविधि में लगाया, उनमें डिप्रेशन यानी गंभीर अवसाद का जोखिम कम हुआ। शोध टीम ने पाया कि टीवी देखने की जगह यदि आप थोड़ी एक्सरसाइज करें, खेल गतिविधि करें या पर्याप्त नींद लें तो डिप्रेशन की संभावना घटती है। वैज्ञानिकों ने कहा कि यह सिर्फ बैठ कर टीवी देखने वाला समय नहीं, बल्कि उस समय को सक्रिय गतिविधियों में बदलने से मानसिक स्वास्थ्य बेहतर होता है।

एक घंटे से दो घंटे टीवी कम करने के फायदे

स्टडी के मुताबिक यदि रोजाना आप टीवी देखने का समय केवल एक घंटा कम करते हैं और उसे अन्य गतिविधियों में लगाते हैं, तो डिप्रेशन का जोखिम लगभग 11% तक घट सकता है। अगर आप इसे 90 मिनट या दो घंटे तक बढ़ाते हैं तो यह कमी और अधिक प्रभावी होती है, कुछ लोगों में लगभग 43% तक की कमी भी देखी गई। यानी जितना अधिक समय आप टीवी की बजाय सक्रिय गतिविधियों में बिताएंगे, उतना बेहतर आपका मानसिक स्वास्थ्य रहेगा।

टीवी के बजाय क्या करें?

शोध में यह भी देखा गया कि टीवी का समय अगर आप खेल, व्यायाम या किसी भी शारीरिक गतिविधि में लगाएं तो डिप्रेशन का खतरा और भी अधिक घटता है। खासकर 30 मिनट खेल गतिविधि करने से लगभग 18% तक डिप्रेशन का जोखिम कम हुआ। वहीं अगर आप इसी समय को सोने, काम या स्कूल में सक्रिय रहने या घर के कार्यों में लगाते हैं तो भी डिप्रेशन के जोखिम में कमी पाई गई।

कौन सबसे ज्यादा फायदा पा सकता है?

इस स्टडी में बड़ा फायदा मध्य उम्र के लोगों को मिला। मध्य उम्र में टीवी देखने का समय कम करके यदि दूसरे कामों में लगाया गया तो डिप्रेशन जोखिम में उल्लेखनीय कमी देखी गई। हालांकि पुराने वयस्कों और युवा लोगों पर इसी तरह का असर उतना स्पष्ट नहीं मिला, शायद इसलिए कि युवा पहले से ही थोड़ी अधिक सक्रियता रखते हैं।

साइंटिफिक रूप से यह क्यों काम करता है?

जब हम लंबा समय टीवी के सामने बैठकर बिताते हैं, तो शरीर और दिमाग दोनों निष्क्रिय हो जाते हैं। इससे मूड, ऊर्जा और सोच पर नकारात्मक असर पड़ता है, जो धीरे-धीरे अवसाद या डिप्रेशन जैसा मानसिक स्वास्थ्य समस्या पैदा कर सकता है। दूसरी ओर, शारीरिक गतिविधि, खेल या पर्याप्त नींद लेने से शरीर में “हैप्पी हॉर्मोन” बढ़ता है और तनाव कम होता है, जिससे मानसिक स्वास्थ्य बेहतर रहता है।

टीवी समय को थोड़ा नियंत्रित करना और उसे सक्रिय, सकारात्मक गतिविधियों में बदलना आसान बदलाव है, लेकिन इसका असर आपके मानसिक स्वास्थ्य पर बहुत बड़ा हो सकता है। इस स्टडी से यह बात साफ़ होती है कि छोटी-छोटी आदतें हमारी सेहत को बेहतर बना सकती हैं - बस जरूरी है कि हम उसे अपनाने की कोशिश करें।

विनीत
विनीत author

विनीत टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में हेल्थ डेस्क के साथ बतौर चीफ कॉपी एडिटर जुड़े हैं। दिल्ली के रहने वाले विनीत को हेल्थ, फिटनेस और न्यूट्रिशन जैसे विष... और देखें

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