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क्या सच में हेल्दी है बच्चों का पैकेज्ड फूड, जानें लेबल की असल कहानी

Children Food Labels: हेल्दी का मतलब केवल वादा नहीं, बल्कि प्रमाणित होना चाहिए। बच्चों के खाद्य पदार्थों पर 'हेल्दी' लेबल का उपयोग कई बार भ्रामक होता है। माता-पिता को सही विकल्प चुनने के लिए सिर्फ लेबल पर ध्यान नहीं देना चाहिए। हाल के अध्ययन बताते हैं कि बच्चों के लिए अधिकांश पैकेज्ड फूड में सुगर की मात्रा अधिक होती है।

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क्या सच में हेल्दी है बच्चों का पैकेज्ड फूड

Kids Packaged Food: जब माता-पिता बच्चों के लिए खाने का सामान खरीदने दुकान जाते हैं, तो पैकेटों पर बड़े-बड़े दावे दिखते हैं जैसे-हेल्दी, पोषक, इम्युनिटी बढ़ाने वाला, दूध से बना, नो एक्स्ट्रा शुगर वगैरह। ये शब्द देखकर लगता है कि सामने रखा प्रोडक्ट बच्चों के लिए एकदम सही होगा। लेकिन हकीकत कई बार इससे बिल्कुल अलग होती है। पिछले कुछ सालों में न्यूट्रिशन एक्सपर्ट्स और पेरेंट्स लगातार इस बात को लेकर चिंता जता रहे हैं कि बच्चों के फूड प्रोडक्ट्स में हेल्दी शब्द का इस्तेमाल जरूरत से ज्यादा और भ्रामक तरीके से किया जा रहा है।

असल दिक्कत ये है कि पैकेज्ड फूड पर हेल्दी कहने की कोई एक साफ और सख्त परिभाषा नहीं है। भारत में कई कंपनियों को बस कुछ बेसिक नियम पूरे करने होते हैं, उसके बाद वे अपने प्रोडक्ट को हेल्दी बताने लगती हैं। भले ही उस खाने में चीनी ज्यादा हो, नमक ज्यादा हो या वो पूरी तरह प्रोसेस्ड ही क्यों ना हो। नतीजा ये होता है कि माता-पिता अच्छे इरादे से जो चीज खरीदते हैं, वो बच्चों की सेहत के लिए उतनी अच्छी नहीं होती, जितनी पैकेट देखकर लगती है।

2022 में किए गए एक अध्ययन के अनुसार, बच्चों के लिए बनाए गए 60% से ज्यादा पैकेज्ड फूड में रोजाना की अनुशंसित सीमा से अधिक चीनी पाई गई। यानी पैकेट पर बड़े-बड़े हेल्दी दावे होते हैं, लेकिन असल पोषण संबंधी जानकारी अक्सर छोटे अक्षरों में छिपी रहती है। इस वजह से माता-पिता के मन में पैकेज्ड फूड के प्रति भरोसे की कमी पैदा हो गई है। ज्यादातर पेरेंट्स बड़े वादों पर ध्यान देते हैं, सामग्री सूची पढ़ना कम ही करते हैं। और कंपनियां भी ये अच्छी तरह जानती हैं।

लेकिन अब बदलाव भी दिख रहा है। कुछ ब्रांड जैसे लिटिल जॉयज ने माता-पिता का भरोसा जीतने के लिए कदम उठाए हैं। उन्होंने अपने प्रोडक्ट न्यूट्रिमिक्स के लिए बैच-वार, थर्ड-पार्टी लैब टेस्ट रिपोर्ट देना शुरू किया है। यानी माता-पिता अब असल टेस्ट रिपोर्ट देखकर ही समझ सकते हैं कि फूड सच में कितना सुरक्षित और पोषणयुक्त है।

हाल के वर्षों में, पैकेज्ड बच्चों के खाद्य पदार्थों पर कई विवाद सामने आए हैं। उदाहरण के लिए, 2018-2019 में एक अध्ययन ने कई स्वास्थ्य पेय पदार्थों के पोषण संबंधी दावों पर सवाल उठाया। इसके बाद, 2020 में अंतर्राष्ट्रीय रिपोर्ट ने विकासशील बाजारों में बेचे जाने वाले बेबी फूड्स में चीनी की अधिकता को उजागर किया।

उपभोक्ता अब केवल लेबल पर भरोसा नहीं कर रहे हैं। वे स्पष्टता की मांग कर रहे हैं। स्वास्थ्य पेशेवरों का मानना है कि जब ब्रांड अपने दावों को डेटा के साथ समर्थन करते हैं, तो उत्पादों का फॉर्मूलेशन बेहतर होता है। माता-पिता को सलाह दी जाती है कि वे केवल पैकेज के सामने के दावों पर भरोसा न करें, बल्कि सामग्री सूची का सावधानीपूर्वक अध्ययन करें।

प्रभात शर्मा
प्रभात शर्मा author

प्रभात शर्मा टाइम्स नाउ हिंदी डिजिटल के फीचर डेस्क में कार्यरत ट्रैवल और लाइफस्टाइल राइटर हैं। यात्राओं के प्रति उनका गहरा जुनून और नई जगहों को समझने–... और देखें

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