Brain Tumor In India: हम भारतीयों की एक आदत होती है छोटी-मोटी तकलीफों को नजरअंदाज करना। खासकर सिरदर्द को तो हम चाय की चुस्की या पेनकिलर की गोली से टाल देते हैं। ऑफिस का तनाव हो या नींद की कमी, हम हर सिरदर्द को थकान का नतीजा मान लेते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि अगर ये सिरदर्द बार-बार हो रहा है, दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है या इसके साथ कुछ और लक्षण भी हैं तो ये कोई सामान्य दर्द नहीं बल्कि ब्रेन ट्यूमर जैसी गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है?
डॉ. आनंद बालासुब्रमण्यम, जो अमृता हॉस्पिटल, फरीदाबाद में न्यूरोसर्जरी विभाग के प्रमुख (HOD) हैं, कहते हैं कि “हर साल भारत में 40,000 से ज्यादा ब्रेन ट्यूमर के केस सामने आते हैं, लेकिन लोगों को तब तक इसका अंदाज़ा नहीं होता जब तक दिक्कत बढ़ न जाए।” इसलिए जरूरी है कि हम सिरदर्द और ब्रेन हेल्थ को हल्के में न लें और समय पर सही कदम उठाएं।
सिरदर्द हमेशा थकान नहीं होता
हममें से कई लोग दिन भर की भागदौड़ के बाद जब सिर में हल्का दर्द महसूस करते हैं, तो सोचते हैं कि‘बस नींद पूरी नहीं हुई होगी’ या ‘ऑफिस का स्ट्रेस है’। लेकिन डॉ. आनंद के अनुसार, कई मरीज ओपीडी में ऐसे आते हैं जो महीनों से सिरदर्द झेल रहे होते हैं। कई बार जब मरीज अस्पताल आते हैं, तब तक ट्यूमर इतना बढ़ चुका होता है कि इलाज मुश्किल और लंबा हो जाता है।
अगर सिरदर्द पहले जैसा नहीं है यानी नया है, ज्यादा तेज हो रहा है या हर दिन हो रहा है, तो इसे नजरअंदाज़ नहीं करना चाहिए।

Symptoms Of Brain Tumor In Hindi
ब्रेन ट्यूमर के ये लक्षण दिखें तो अलर्ट हो जाइए - Symptoms Of Brain Tumor In Hindi
हर सिरदर्द ट्यूमर नहीं होता, ये बात सही है। लेकिन कुछ लक्षण ऐसे होते हैं जिन्हें कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए,
- सिरदर्द जो हर दिन हो और समय के साथ बढ़ता जाए
- सुबह उठते ही सिरदर्द होना या नींद में दर्द के कारण जागना
- उल्टी के साथ सिरदर्द लेकिन मितली न हो
- धुंधला या डबल दिखना
- बोलने में परेशानी, याददाश्त कमजोर होना या व्यवहार में बदलाव
- बिना किसी हिस्ट्री के दौरे पड़ना
डॉ. आनंद कहते हैं, “ये सब लक्षण ब्रेन की तरफ से मदद की पुकार हो सकते हैं। इन्हें नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है।”
महिलाएं और बुज़ुर्ग अक्सर कर देते हैं बड़ी गलती
भारतीय समाज में खासकर महिलाएं और बुज़ुर्ग अकसर अपनी सेहत को दूसरों की जिम्मेदारियों के पीछे रख देते हैं। सिरदर्द, चक्कर, थकान, मूड स्विंग आदि को वे "कमजोरी", "हार्मोनल बदलाव" या "उम्र का असर" समझकर झेलते रहते हैं।
डॉ. आनंद बताते हैं कि कई बार मरीज तब अस्पताल आते हैं जब स्थिति गंभीर हो चुकी होती है। अगर परिवार के सदस्य शुरू से सतर्क रहें और लक्षणों को पहचानें, तो ट्यूमर का जल्दी इलाज मुमकिन हो सकता है।

Brain Tumor Diagnosis
देरी से निदान बढ़ा देता है मुश्किलें
एक 2023 की रिसर्च (Neurology India) के अनुसार, भारत के टियर-2 शहरों में ब्रेन ट्यूमर के लक्षण शुरू होने से लेकर सही डायग्नोस मिलने तक औसतन 12 से 16 हफ्ते लगते हैं।
ये देरी अकसर इस वजह से होती है कि लोग लक्षणों को गंभीरता से नहीं लेते या फिर सामान्य बीमारी समझकर घरेलू इलाज करते रहते हैं। लेकिन जब ट्यूमर बढ़ चुका होता है, तब इलाज जटिल, लंबा और महंगा हो जाता है।
समय रहते जांच कराएं
अब पहले जैसी बात नहीं रही। MRI और CT स्कैन जैसी जांचें आजकल छोटे शहरों और कस्बों में भी उपलब्ध हैं।
डॉ. आनंद कहते हैं, “अगर सिरदर्द बार-बार हो रहा है या ऊपर बताए लक्षण दिख रहे हैं, तो नजदीकी न्यूरोलॉजिस्ट से मिलें। सही समय पर की गई जांच ट्यूमर को शुरुआती स्टेज में पकड़ सकती है, जब इलाज आसान और असरदार होता है।”

Brain tumor prevention
ब्रेन की जांच भी होनी चाहिए
जैसे हम नियमित ब्लड शुगर या बीपी की जांच करते हैं, वैसे ही दिमाग की सेहत पर भी ध्यान देना चाहिए।
डॉ. आनंद कहते हैं कि स्कूल, ऑफिस, और सोसाइटी लेवल पर ब्रेन हेल्थ को लेकर बातचीत होनी चाहिए। बच्चों से लेकर बुज़ुर्ग तक सभी को ये पता होना चाहिए कि सिरदर्द सिर्फ एक दर्द नहीं, कभी-कभी ये शरीर का अलार्म हो सकता है।
क्या सलाह देते हैं डॉक्टर
अगली बार कोई सिरदर्द की शिकायत करे, तो उसे पेनकिलर नहीं, समझदारी दीजिए। अब वक्त है सोच बदलने का। जब कोई कहे कि “सिर कई दिनों से भारी लग रहा है”, तो उन्हें सिर्फ आराम करने या गोली खाने की सलाह न दें। उनसे पूछिए दर्द कब से है? कैसा है? और जरूरत पड़े तो जांच करवाइए।
हो सकता है ये एक छोटा-सा कदम किसी की ज़िंदगी बचा ले। जैसा कि डॉ. आनंद बालासुब्रमण्यम कहते हैं, “ब्रेन हमारे शरीर का कंट्रोल सेंटर है। इसकी पुकार को अनसुना करना, पूरे सिस्टम को खतरे में डाल सकता है।”
