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मानसून में घुस सकता है दिमाग में कीड़ा, भूलकर भी नजरअंदाज न करें ये लक्षण, खराब होगी दिमागी सेहत

Monsoon Mein Dimag Mein Keeda Ke Lakshan: मॉनसून में दिमाग में कीड़ा (ब्रेन पैरासाइट) घुसने का खतरा बढ़ जाता है। हाल ही में मुंबई के वॉकहार्ट हॉस्पिटल्स की भी इसको लेकर रिपोर्ट सामने आई, जिसमें ऐसे मामलों में बढ़ोतरी देखी जा रही है। सिरदर्द, दौरे और उल्टी जैसे लक्षण नजरअंदाज करने पर दिमागी सेहत बिगड़ सकती है। जानें किन लोगों को है ज्यादा खतरा और कैसे करें बचाव।

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Monsoon Mein Dimag Mein Keeda Ke Lakshan

Monsoon Mein Dimag Mein Keeda Ke Lakshan: शायद ही कोई हो सकता है जिसे मॉनसून का मौसम पसंद न हो। इस दौरान रिमझिम बारिश का मजा हम सभी लेने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं। वहीं, इसके साथ ठंडक और चाय-पकोड़े का मजा ही कुछ और है। लेकिन इसी मौसम में कई छिपे हुए खतरे भी साथ आते हैं, जो दिखते नहीं लेकिन सेहत पर गहरा असर डालते हैं। मुंबई स्थित वॉकहार्ट हॉस्पिटल्स की एक रिपोर्ट की मानें तो मुंबई में दिमाग में पैरासाइट यानी कीड़ा घुसने के मामलों को लेकर चिंता जताई है।

बारिश के मौसम में गंदगी और नमी की वजह से ऐसे पैरासाइट पनपते हैं और फिर इंसान के दिमाग तक पहुंच जाते हैं। ये संक्रमण धीरे-धीरे दिमाग को नुकसान पहुंचाता है। इसलिए जरूरी है कि मानसून में थोड़ा और सतर्क रहें और हर लक्षण को समझें। आइए जानते हैं इस बीमारी के पीछे की वजहें, लक्षण और बचाव।

मानसून में क्यों होता है ज्यादा खतरा?

बारिश के मौसम में नमी और गंदगी बढ़ जाती है। इसी वजह से बैक्टीरिया, वायरस और पैरासाइट्स को पनपने का अच्छा मौका मिल जाता है। जब हम दूषित पानी या गंदा खाना खाते हैं, तो ये कीड़े शरीर के जरिए दिमाग तक पहुंच जाते हैं। खासकर जो लोग बाहर खाना खाते हैं या साफ-सफाई का ध्यान नहीं रखते, उन्हें खतरा और भी ज्यादा होता है।

दिमाग में कीड़ा पहुंचता कैसे है?

ये पैरासाइट एक खास तरह के कीड़े होते हैं, जिन्हें टैपवर्म कहा जाता है। जब यह शरीर में पहुंचता है और दिमाग तक चला जाता है, तो धीरे-धीरे मस्तिष्क की कोशिकाओं पर असर डालता है। इसे मेडिकल भाषा में न्यूरो-सिस्टिसर्कोसिस कहा जाता है। ये स्थिति बेहद गंभीर हो सकती है, खासकर अगर समय पर इलाज न हो।

कौन-कौन से लक्षण दिखते हैं?

शुरुआत में इसके लक्षण मामूली लगते हैं, लेकिन धीरे-धीरे ये गंभीर रूप ले सकते हैं। जैसे सिर में लगातार दर्द रहना, चक्कर आना, उल्टी होना या अचानक दौरे पड़ना। कभी-कभी याददाश्त कमजोर हो जाती है या सोचने-समझने में दिक्कत आने लगती है। ऐसे में तुरंत डॉक्टर से जांच करवाना चाहिए।

किन लोगों को है ज्यादा खतरा?

जिनकी इम्यूनिटी कमजोर है, उन्हें ये बीमारी जल्दी पकड़ती है। बच्चे, बुजुर्ग और वो लोग जो साफ-सफाई का कम ध्यान रखते हैं, उन्हें भी इसका खतरा ज्यादा होता है। इसके अलावा, जो लोग सड़क किनारे का खाना खाते हैं या खुले में रहते हैं, उन्हें भी सतर्क रहना चाहिए।

क्या है इलाज और कैसे करें बचाव?

दिमाग में कीड़े का इलाज संभव है। अगर समय रहते इसके लक्षणों को पहचान लिया जाता है, तो डॉक्टर कुछ दवाओं की मदद से इसका आसानी से इलाज कर सकते हैं। गंभीर मामलों में डॉक्टर MRI या CT स्कैन करवा कर दिमाग की स्थिति देखते हैं। इससे बचाव के लिए साफ पानी पिएं, खाना पूरी तरह पका हो, बाहर का खाना टालें और हाथ साफ रखें। बारिश के मौसम में खास ध्यान रखें कि कोई भी लक्षण नजरअंदाज न करें।

निष्कर्ष

मानसून सिर्फ ठंडक और ताजगी का मौसम नहीं है, बल्कि इसमें सेहत से जुड़ी गंभीर परेशानियां भी हो सकती हैं। दिमाग में कीड़ा घुसने जैसी बीमारी को हल्के में लेना जानलेवा हो सकता है। इसलिए जरूरी है कि आप सजग रहें, अपने खानपान और साफ-सफाई का ध्यान रखें और किसी भी लक्षण को नज़रअंदाज न करें। सेहत से बड़ा कुछ नहीं होता।

डिस्क्लेमर: प्रस्तुत लेख में सुझाए गए टिप्स और सलाह केवल आम जानकारी के लिए हैं और इसे पेशेवर चिकित्सा सलाह के रूप में नहीं लिया जा सकता। किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी तरह का बदलाव करने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।

Vineet
विनीतauthor

विनीत टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में हेल्थ डेस्क के साथ बतौर चीफ कॉपी एडिटर जुड़े हैं। दिल्ली के रहने वाले विनीत को हेल्थ, फिटनेस और न्यूट्रिशन जैसे विषयों पर गहरी समझ है। इन्होंने हेल्थ, फिटनेस, न्यूट्रिशन और सप्लीमेंट के फील्ड में प्रोफेशनल सर्टिफिकेशन भी किए हैं। वे 6 साल से इस फील्ड से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर 7,000 से अधिक लेख लिख चुके हैं। विनीत की खासियत उनकी रिसर्च-बेस्ड लेखन शैली और जनहित को ध्यान में रखते हुए लिखी गई जानकारीपूर्ण स्टोरीज हैं।

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