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देश में कुपोषण के शिकार मिले 3 करोड़ से ज्यादा बच्चे, बच्चों को भरपूर पोषण देने के लिए फॉलो करें ये हेल्दी डाइट प्लान

Malnutrition in India : हमारे खाने का मतलब सिर्फ पेट भरना नहीं होना चाहिए, बल्कि इससे हमें भरपूर मात्रा में पोषण भी होना बहुत जरूरी है। आज हम आपको एक ऐसी रिपोर्ट के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसमें बताया गया कि देश में लगभग 3 करोड़ बच्चों में कुपोषण की समस्या सामने आई है। आइए जानते हैं बच्चों को कुपोषण से कैसे बचाया जाए।

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kuposan in india

Photo : iStock

भारत को देसी खाने पीने वालों का देश कहा जाता है। लेकिन आज बदलते परिवेश में खाने पान के शौकीन हमारे भारत में कुपोषण एक बड़ी समस्या बनता जा रहा है। हाल ही में आए कुछ आंकड़ों के मुताबिक भारत की कुल आबादी का लगभग 16% लोग कुपोषण के शिकार हैं। वहीं ग्लोबल हंगर इंडेक्स के मुताबिक भारत को कुल 125 देशों की सूची में 111 वें स्थान पर रखा गया है। इस इंडेक्स के रेटिंग से आप समझ सकते हैं, कि भारत में क्यों कुपोषण का कहर लगातार बढ़ता जा रहा है। इसी रिपोर्ट में यह बात भी सामने आई है कि भारत में 5 साल से कम उम्र के लगभग 3 करोड़ बच्चों में कुपोषण की समस्या देखी गई है। जो एक गंभीर स्थिति को दिखाता है। आज इस लेख के माध्यम से हम आपको बताएंगे कि बच्चों को कुपोषण से बचाने के लिए कैसी हो उनकी डाइट?

कुपोषण के बचने के आसान उपाय

कुपोषण से बचाने के लिए जरूरी है कि आपको बच्चों की डाइट में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, और विटामिन से भरपूर चीजों को शामिल करना चाहिए। इसके लिए आप मिल्क प्रोडक्ट्स सीजनल फल और सब्जियां बच्चों को जरूर खिलाएं।

आप हमेशा ध्यान रखें कि बच्चों को दिन में कम से कम 3 बार खाना खिलाना बहुत जरूरी है। हालांकि कम कम खिलाएं लेकिन 3-4 बार खाना खिलाना बहुत जरूरी है।

यदि आपके शरीर में किसी तरह के पोषक तत्वों की कमी रिपोर्ट हुई है, तो आपको डॉक्टर की सलाह पर आयरन जिंक और आयोडीन जैसे तत्वों को अपनी डाइट में शामिल कर लेना चाहिए।

डिस्क्लेमर: प्रस्तुत लेख में सुझाए गए टिप्स और सलाह केवल आम जानकारी के लिए हैं और इसे पेशेवर चिकित्सा सलाह के रूप में नहीं लिया जा सकता। किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी तरह का बदलाव करने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।

gulshan kumar
गुलशन कुमारauthor

गुलशन कुमार टाइम्स नाउ हिंदी डिजिटल के हेल्थ सेक्शन से जुड़े हैं। फिटनेस और योग के प्रति उनकी रुचि उन्हें हेल्थ जर्नलिज्म की ओर लेकर आई, जहां वे आम लोगों की जीवनशैली, सेहत और वेलनेस से जुड़े विषयों पर लगातार काम कर रहे हैं। गुलशन अबतक 2,000 से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं। उनके लेखों में आसान भाषा में दी गई जानकारी, रिसर्च-बेस्ड टिप्स और रोजमर्रा की सेहत से जुड़े विषयों की स्पष्ट समझ दिखाई देती है। हेल्थ अवेयरनेस को बढ़ावा देना, फिटनेस को सरल तरीके से समझाना और बेहतर लाइफस्टाइल के लिए उपयोगी सुझाव देना—गुलशन की लेखन शैली की खासियत है।

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