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तुर्किए का 'पाकिस्तान प्रेम...', जानें क्यों इतना मेहरबान, क्या ये है असल मकसद?

तुर्किए के राष्ट्रपति एर्दोगन हाल के दिनों में लगातार चर्चा में बने हुए हैं, इसका एक प्रमुख कारण यह है कि उन्होंने पाकिस्तान के साथ मिलकर भारत के खिलाफ उसकी सैन्य कार्रवाई में समर्थन दिया और साथ ही बराबर भारत के खिलाफ जहर उगल रहे हैं...

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तुर्की पाकिस्तान के पक्ष में क्यों है?

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने 'ऑपरेशन सिंदूर' के माध्यम से, पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में स्थित आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया, यह कार्रवाई पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में की गई थी, इस ऑपरेशन में भारत ने अपनी सैन्य शक्ति से पाकिस्तान को करारा सबक सिखाया इसके बाद से पाकिस्तान के समर्थन में एक देश का नाम प्राथमिकता से सामने आ रहा है और वो है तुर्किए... समय-समय पर दुनिया ने तुर्किए का पाकिस्तान प्रेम देखा भी है।

तुर्किए के राष्ट्रपति रेसेप तैय्यप एर्दोगन ने न सिर्फ पाकिस्तान को ड्रोन मुहैया कराए, बल्कि PoK में भारतीय कार्रवाई की निंदा करते हुए अंतरराष्ट्रीय जांच की पाकिस्तान की मांग का समर्थन भी किया, एर्दोगन इससे पहले भी वह संयुक्त राष्ट्र में कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान के समर्थन में बोल चुके हैं।

कई मुस्लिम देशों के साथ राजनीतिक व व्यापारिक संबंध

तुर्किए के राष्ट्रपति एर्दोगन ने अपने शासनकाल में मुस्लिम देशों में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। एर्दोगन का मुस्लिम देशों पर प्रभाव, आर्थिक और राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण है। तुर्किए ने कई मुस्लिम देशों के साथ व्यापारिक संबंध स्थापित किए हैं और कुछ देशों में राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

'तमाम मुस्लिम देशों की सहानुभूति हासिल करना चाहते हैं'

कहा जाता है कि तुर्किए का भारत के साथ विरोध एर्दोगन के मुस्लिम जगत में अपना वर्चस्व स्थापित करने की दिशा में अहम कदम है, जिससे वो तमाम मुस्लिम देशों की सहानुभूति हासिल करना चाहते हैं वहीं एर्दोगन पाकिस्तान के माध्यम से दक्षिण एशिया में भी अपने प्रभाव को मजबूत करना चाहते हैं।

Why Turkey favour for Pakistan

Why Turkey favour for Pakistan

हाल ही में तुर्किए ने रूस-यूक्रेन शांति वार्ता की मेजबानी की, जिसमें पुतिन, जेलेंस्की और ट्रम्प के शामिल होने की संभावना थी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका, कहते हैं कि इस वार्ता के जरिए एर्दोगन खुद को एक निर्णायक शक्ति के रूप में पोट्रेट करना चाह रहे थे।

'मजबूत मुस्लिम नेतृत्व' के रूप में उभरने की चाह

माना जा रहा है कि एर्दोगन पाकिस्तान, बांग्लादेश और अजरबैजान जैसे देशों का समर्थन कर और भारत जैसे देश का विरोध कर खुद को 'मजबूत मुस्लिम नेतृत्व' के रूप में उभारना चाह रहे हैं और ये इच्छा उनकी काफी समय से है जिसे फलीभूत करने में वो लगे हुए हैं। एर्दोगन पाकिस्तान के मामलों में दखलअंदाजी करके एशिया में अपना वर्चस्व बनाने की कवायद में जुटे हैं और पाकिस्तान इसमें उसका भरपूर साथ दे रहा है।

शहबाज शरीफ ने एर्दोगन की सराहना की

वैसे भारत और तुर्किए के बीच गहरे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध हैं, लेकिन हाल के वर्षों में कुछ तनाव सामने आते रहे हैं, 1948 में भारत और तुर्किए के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना के बाद से, राजनीतिक और द्विपक्षीय संबंधों में आमतौर पर गर्मजोशी रही है, पर तुर्किए द्वारा पाकिस्तान को समर्थन के कारण कुछ तनाव बने हुए हैं, हाल ही में भारत-पाक सीजफायर की घोषणा के बाद, पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने एर्दोगन की भूमिका की सार्वजनिक रूप से सराहना की थी।

Why Turkey favour for Pakistan

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...ये एर्दोगन के लिए परेशानी का सबब

भारत का विरोध करने वाले एक और पड़ोसी इस्लामिक देश बांग्लादेश भी पाकिस्तान के नक्शे कदम पर आगे बढ़ रहा है अगर दुनिया के मुस्लिम देशों की बात करें तो एशिया-प्रशांत क्षेत्र में दुनिया में सबसे अधिक मुसलमान रहते हैं। वहीं तुर्किए के दुश्मन माने जाने वाले सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात से भारत की निकटता बढ़ती जा रही है और ये एर्दोगन के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है।

Ravi Vaish
रवि वैश्यauthor

रवि वैश्य टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क पर कार्यरत एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें पत्रकारिता में 20 वर्षों का व्यापक अनुभव हासिल है। खबरों की बारीकियों को समझने और तेजी से प्रस्तुत करने में उनकी विशेष दक्षता है। टीवी पत्रकारिता में रिपोर्टिंग और डेस्क—दोनों क्षेत्रों में अनुभव होने के कारण वे समाचारों को बहुआयामी दृष्टिकोण से देखते हैं। देश–दुनिया की ताजातरीन अपडेट्स, ब्रेकिंग न्यूज, एक्सप्लेनर और विशेष स्टोरीज तैयार करने में वे सिद्धहस्त हैं। उनकी प्राथमिकता हमेशा यही रही है कि हर खबर तेज, सटीक और जानकारीपूर्ण रूप में पाठकों तक पहुंचे। रवि वैश्य अब तक 22,000 से अधिक खबरें लिख चुके हैं, जिनमें कई एक्सक्लूसिव रिपोर्ट्स, इंटरव्यू, ग्राउंड रिपोर्ट्स, विश्लेषण और एक्सप्लेनर शामिल हैं।

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