Pakistan on Pahalgam Terror Attack: पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत के तेवर देख युद्ध की धमकी देने वाले पाकिस्तान फिर पैंतरा बदलने लगा है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सुर बदलते हुए कहा है कि वह इस घटना की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच के लिए तैयार है। एक सैन्य कार्यक्रम में शहबाज ने ये बात कही, हालांकि, कश्मीर को लेकर फिर पुराना राग अलापते हुए उसे पाकिस्तान के गले की नस बताया। शहबाज ने पाकिस्तान को आंतक पीड़ित होने का रोना भी रोया। सवाल है कि कल तक युद्ध की धमकी देने वाले पाकिस्तान के तेवर आखिर क्यों नरम पड़ गए, इसे समझने की कोशिश करेत हैं।
भारत के तेवर देख पाकिस्तान घबराया
पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत के तेवर देख पाकिस्तान कहीं न कहीं तनाव में है। भारत ने पांच बड़े फैसले लेते हुए उसे बड़ा झटका दिया है। सबसे बड़ा झटका सिंधु जल समझौता स्थगित करके दिया। इससे पाकिस्तान इस कदर बौखलाया कि युद्ध की धमकियों पर उतर आया और इसे युद्ध का उकसावा करार दिया। उसके एक पूर्व राजनयिक ने यहां तक कह दिया कि अगर पानी नहीं बहा तो खून जरूर बहेगा। बिलावल भुट्टो ने भी सिंधु नदी में खून बहाने की बात कही। लेकिन, पाकिस्तान खुद जानता है कि गलती उसकी तरफ से ही हुई है। पहलगाम हमले को अंजाम देने वाले आतंकियों का रिश्ता सीधे पाकिस्तान से ही है, आज नहीं तो कल इसके सबूत भी मिल जाएंगे।
पाकिस्तान को साथ नहीं मिल रहा
इस बीच अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी पाकिस्तान को साथ नहीं मिल रहा है। दुनियाभर के तमाम देशों ने हमले की कड़ी निंदा की है। अमेरिका ने आतंकवाद के खिलाफ भारत का खुलकर साथ देने की बात कही। यूएनएससी ने भी हमले की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि दोषियों को न्याय के कटघरे में लाना जरूरी है। भारत ने कई देशों को ब्रीफ किया है कि पहलगाम में किस क्रूरता से हमले को अंजाम दिया गया है। धर्म पूछकर पर्यटकों की हत्या की गई है।
मुस्लिम देशों का भी समर्थन नहीं
मुस्लिम देशों से भी पाकिस्तान को साथ नहीं मिल रहा है। एक भी मुस्लिम देश ने उसका खुलकर साथ नहीं दिया है। ईरान और सऊदी अरब जैसे बडे़ मुस्लिम देश भी तटस्थ रुख अपनाए हुए हैं। ईरान ने जहां मध्यस्तथा की पेशकश करते हुए दोनों देशों से बात की है, वहीं सऊदी अरब ने भी इस तनाव पर चिंता जताते हुए भारत-पाक से चर्चा की है। हवा के रुख को पाकिस्तान भी भांप रहा है। उसका सदाबहार दोस्त तुर्की भी खामोश है। अगर वह अपनी जिद पर अड़ा रहा तो नुकसान उसी का होगा। शायद यही वजह है कि उसने पैंतरा बदलते हुए अब निष्पक्ष जांच की बात कही है।
शहबाज शरीफ ने क्या-क्या कहा
प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने शनिवार को कहा कि पाकिस्तान इस हफ्ते कश्मीर के पहलगाम में 26 लोगों की हत्या की किसी भी निष्पक्ष और पारदर्शी जांच के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने आतंकवाद के सभी रुपों की आलोचना की है और देश खुद इसका शिकार रहा है। डॉन.कॉम के मुताबिक काकुल में पाकिस्तान मिलिट्री अकादमी में पासिंग-आउट परेड को संबोधित करते हुए, शहबाज शरीफ ने कहा कि भारत बिना किसी विश्वसनीय जांच या सत्यापन योग्य सबूत के आधारहीन और झूठे आरोप पाकिस्तान पर लगा रहा है।
खुद को बताया आतंकवाद पीड़ित
पाकिस्तानी पीएम ने कहा, एक जिम्मेदार देश के रूप में अपनी भूमिका को जारी रखते हुए, पाकिस्तान किसी भी निष्पक्ष, पारदर्शी और विश्वसनीय जांच में भाग लेने के लिए तैयार है। इस दौरान शहबाज शरीफ ने एक बार फिर जम्मू कश्मीर का राग अलापा। उन्होंने कहा कि मुझे कश्मीर के महत्व को रेखांकित करना होगा, जैसा कि राष्ट्र के संस्थापक कायदे-आजम मोहम्मद अली जिन्ना ने सही कहा था, कश्मीर पाकिस्तान की गर्दन की नस है। प्रधानमंत्री ने कहा, पाकिस्तान ने हमेशा आतंकवाद के सभी रूपों और अभिव्यक्तियों की निंदा की है। उन्होंने पाकिस्तान को आतंकवाद के खिलाफ दुनिया का अग्रणी देश बताते हुए कहा कि हमने भारी नुकसान उठाया, जिसमें 90,000 लोग हताहत हुए और 600 बिलियन डॉलर से अधिक की आर्थिक हानि हुई।
पहलगाम हमले के बाद जवाबी कार्रवाई
बता दें कि आतंकियों ने 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर में एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल पहलगाम स्थित बैसरन घाटी में पर्यटकों पर अंधाधुंध गोलियां चला दी थीं। हमले में कम से कम 26 लोगों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए। पहलगाम हमले के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है। नई दिल्ली ने इस्लामबाद के खिलाफ कई सख्त कूटनीतिक और रणनीतिक कदम उठाए हैं। इनमें 1960 के सिंधु जल समझौते को तुरंत प्रभाव से निलंबित करने, अटारी इंटिग्रेटेड चेक पोस्ट को बंद करने, पाकिस्तानी नागरिकों के लिए वीजा सेवाओं को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने, जैसे कई कदम उठाए हैं। भारत के इन फैसलों के बाद पाकिस्तान ने शिमला समझौते को स्थगित करने और भारतीय उड़ानों के लिए अपने हवाई क्षेत्र को बंद करने जैसे कुछ कदम उठाए हैं।
