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अरबपति होकर भी क्यों परिवार में हो जाती है फूट,जानें कहां चूक जाते हैं भारतीय कारोबारी

  • Authored by: प्रशांत श्रीवास्तव
  • Updated Apr 21, 2023, 08:00 PM IST

Why Indian Rich Failed in succession plan:जिस तरह भारत में कारोबारी घरानों के विवाद सामने आते हैं, वहीं विदेशी कंपनियों के उदाहरण देखे तो वहां पर ऐसे मामले कम दिखते हैं। चाहे बात Apple की हो या फिर गूगल, माइक्रोसॉफ्ट की बात करें तो वहां पर ऐसे विवाद नहीं दिखते हैं।

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जानें भारतीय अरबपतियों से कहां हो जाती है चूक

Photo : iStock

Why Indian Rich failed in succession plan: अभी कुछ ही महीने हुए जब IPL के पूर्व चेयरमैन और मोदी ग्रुप में प्रमुख पोजीशन रखने वाले ललित मोदी ने ट्वीट कर अपने पिता की गलती का जिक्र कर, कहा था कि उन्होंने फैमिली में बंटवारा नहीं किया। साफ है मोदी अपनी मां और बहन के साथ चले पारिवारिक विवाद की बात कर रहे थे। मोदी का मामला सुर्खियों में आए तीन महीने ही बीते हैं कि अब फिर एक और अरबपति फैमिली का मामला सामने आ गया है।

नया विवाद Bharat Forge के सीएमडी बाबा कल्याणी और उनकी बहन सुगंधा हीरेमठ के बीच का है। नए विवाद में सुगंधा ने बाबा कल्याणी पर यह आरोप लगाया है कि उनकी मां के मरने के बाद जो हिस्सेदारी उन्हें मिलनी चाहिए थी, वह उनके भाई बाबा कल्याणी नहीं दे रहे है। इन दो मामलों से मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि अरबों का कारोबार करने वाले भारतीय अरबपति अपने उत्तराधिकारी क्यों नहीं चुन पाते और दूसरा वह क्यों नहीं कारोबार को बांटते हैं, जिससे उनके बाद परिवार में विवाद न हो।

पारिवारिक विवाद का लंबा है सिलसिला

  • IPL के पूर्व चेयरमैन ललित मोदी का अपनी मां,बहन के साथ संपत्ति को लेकर विवाद चल रहा है। मोदी ग्रुप के विवाद को मोदी ने लंबा,थकाऊ और मुश्किल बताया है।
  • रेमण्ड ब्रांड चलाने वाले सिंघानिया परिवार में पिता-पुत्र में विवाद हो चुका है। यह भी आरोप लगा कि गौतम सिंघानिया ने पिता विजयपत सिंघानिया को घर से बाहर निकाल दिया था। पिता विजयपत सिंघानिया ने यहां तक कह दिया कि जिस बेटे को 5000 करोड़ का कारोबार सौंपा उसने मुझे सड़क पर ला दिया।
  • 108 साल पुराने हिंदुजा ग्रुप को चार भाइयों के बीच 14 अरब डॉलर का साम्राज्य को लेकर विवाद हो गया था। और मामला लंदन कोर्ट तक पहुंचा तब जाकर समझौता हुआ।
  • धीरूभाई अंबानी के बाद मुकेश और अनिल अंबानी में विवाद हो गया था। जो बाद में सुलझाया गया।

बाबा कल्याणी और सुगंधा में क्या है विवाद

बाबा कल्याणी और सुगंधा के बीद विवाद फरवरी 2023 के बाद शुरू हुआ। जब बाबा कल्याणी और सुगंधा हीरेमठ की मां का 25 फरवरी 2023 को निधन हुआ। मां के निधन के बाद सुगंधा का आरोप है कि साल 1994 में हुए समझौते के तहत कल्याणी को सारी हिस्सेदारी उन्हें ट्रांसफर करनी थी। लेकिन इसकी जगह वह अपनी हिस्सेदारी बढ़ाकर उन्हें और उनके पति को Hikal कंपनी से बाहर करने की कोशिश कर रहे हैं। Hikal की मार्केट करीब 3500 करोड़ रुपये है।

विदेशी कंपनियों के आगे यहां जाते हैं चूक

  • जिस तरह भारत में कारोबारी घरानों के विवाद सामने आते हैं, वहीं विदेशी कंपनियों के उदाहरण देखे तो वहां पर ऐसे मामले कम दिखते हैं। चाहे बात Apple की हो या फिर गूगल, ट्विटर, माइक्रोसॉफ्ट की बात करें तो वहां पर ऐसे विवाद नहीं दिखते हैं। गूगल की कमान एक भारतीय सुंदर पिचाई के पास है। एप्पल में स्टीव जॉब्स के बाद टिम कुक को आसानी से उत्तराधिकार मिल गया। माइक्रोसॉफ्ट में भी बिल गेट्स के बाद नई कमान देने के समय कोई विवाद नहीं हुआ।
  • असल में भारतीय और विदेश की प्रमुख कंपनियों के उत्तराधिकारी प्लान को देखे जाय तो सबसे अहम अंतर यह है कि भारत में जहां उत्तराधिकार परिवार को देने की कवायद रहती है, वहीं विदेशी कंपनियों में प्रोफेशनल को चुना जाता है।
  • इसके अलावा भारतीय कारोबारियों के विवाद को देखा जाय तो कई प्रमुख मामलों में यह समस्या रही की उन्होंने अपने जीवन में ही उत्तराधाकिरी का चयन और कारोबार का बंटवारा नहीं किया। जिसकी वजह से उनके बाद कारोबार के बंटवारे को लेकर विवाद हुआ।
  • अमेरिका-यूरोप की कंपनियों की तुलना में ज्यादातर भारतीय कॉरपोरेट घराने एक-दो पीढ़ी पुराने हैं। ऐसे में वहां पर प्रोफेशनल रवैये से ज्यादा भावनात्मक रवैये पर ज्यादा जोर रहता है।
प्रशांत श्रीवास्तव
प्रशांत श्रीवास्तवauthor

करीब 17 साल से पत्रकारिता जगत से जुड़ा हुआ हूं। और इस दौरान मीडिया की सभी विधाओं यानी टेलीविजन, प्रिंट, मैगजीन, डिजिटल और बिजनेस पत्रकारिता में काम करने का मौका मिला। इस समय Timesnowhindi.com में टीम लीड के रुप में बिजनेस, ऑटो, यूटीलिटी, टेक सेक्शन में अपना योगदान दे रहा हूं। करियर का पहला ब्रेक हैदराबाद स्थित मीडिया संस्थान ईटीवी से टेलीविजन के जरिए हुआ। यहां पर टेलीविजन पत्रकारिता की बारीकियों को समझने का मौका मिला। और उसके बाद अगला पड़ाव दिल्ली स्थित दैनिक भास्कर समूह का बिजनेस भास्कर रहा। यहां से बिजनेस पत्रकारिता में कदम रखा। और यह सफर वित्त मंत्रालय की रिपोर्टिंग से लेकर बैंकिंग, इंश्योरेंस, ऑटो, एफएमसीजी, एमएमएमई, टेलीकॉम सेक्टर की ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर कॉरपोरेट जगत की खबरें और इकोनॉमी से जुड़ी खबरों से गुजरते हुए अमर उजाला, मनी भास्कर वेबसाइट से होकर आउटलुक मैगजीन पहुंचा। यहां पर पॉलिटिकल खबरों को करने का मौका मिला। आउटलुक में रहते हुए भाजपा और कांग्रेस पार्टी को भी कवर किया। इस दौरान दिल्ली दंगों पर ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर सीएए आंदोलन, किसान आंदोलन और कृषि जगत, वाइल्ड लाइफ से जुड़ी ग्राउंड रिपोर्ट भी करने का मौका मिला। करियर के इस सफर में 2014 लोक सभा चुनाव, 2019 लोक सभा चुनाव, इसके अलावा उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव, राजस्थान विधान सभा, मध्य प्रदेश विधान सभा चुनाव की ग्राउंड रिपोर्ट भी की। पिछले 16 साल से केंद्रीय बजट की बारीकियों को समझकर उसे आम भाषा में लोगों तक पहुंचाने का भी प्रयास किया है। 17 साल के करियर में करीब 10 साल डिजिटल मीडिया का अनुभव रहा है। पिछले 3 साल से टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। पत्रकारिता का ककहरा माखन लाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से सीखा है।

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