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कौन हैं संजय झा? जिनका कभी BJP से था नाता, अब हैं नीतीश कुमार के सबसे खास

Bihar Politics: संजय झा को नीतीश कुमार के सबसे करीबी नेता में गिना जाता है। उन्होंने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत भाजपा से की थी। हालांकि वो बाद में नीतीश के जनता दल (यूनाइटेड) का रुख कर लिया। वो बिहार सरकार में मंत्री रहे और पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष बनने से पहले राष्ट्रीय महासचिव का पद भी संभाला।

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संजय कुमार झा को जानिए।

Photo : Times Now Digital

Who is Sanjay Jha: बिहार की सियासत में नीतीश कुमार के सबसे करीबी नेताओं में संजय कुमार झा और ललन सिंह की गिनती अव्वल दर्जे पर की को कोई नकार नहीं सकता है। शायद यही वजह है कि कभी राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह जेडीयू के अध्यक्ष रहे और अब संजय झा को नीतीश ने अपनी पार्टी जनता दल यूनाइटेड की बागडोर सौंप दी है। जद(यू) सांसद संजय झा को पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया है। क्या आप जानते हैं कि आखिर जेडीयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय सिंह ने राजनीति में कब और कैसे कदम रखा, उनका कद कैसे दिन पर दिन इतना बढ़ता चला गया कि आज नीतीश को उन पर सबसे अधिक भरोसा हो गया है।

संजय झा के कंधों पर नीतीश ने सौंपा सबसे बड़ा जिम्मा

लोकसभा चुनाव 2024 में दमदार जीत हासिल करने के बाद जनता दल (यूनाइटेड) अब अगले साल होने वाले बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की तैयारियों में जुट गई है। यही वजह है कि नीतीश ने पार्टी में उलटफेर का सिलसिला तेज कर दिया है। अपने करीबी और राज्यसभा सदस्य संजय झा के कंधों पर एक बार फिर सीएम नीतीश ने बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। उन्हें शनिवार को पार्टी का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया गया।

Nitish Kumar

नीतीश कुमार, मुख्यमंत्री, बिहार।

संजय झा ने भाजपा से की थी सियासी सफर की शुरुआत

बिहार सरकार में जल संसाधन मंत्री रह चुके झा ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत भाजपा से की थी। बाद में, वह जद (यू) में शामिल हो गए। वह जद(यू) के राष्ट्रीय महासचिव और राज्य योजना परिषद के सदस्य भी रह चुके हैं। संजय झा को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का काफी करीबी माना जाता है।

बिहार सरकार में तीन बार संभाली मंत्री पद की जिम्मेदारी

संजय कुमार ने बिहार सरकार में मंत्री के रूप में तीन बार काम कर चुके हैं, उन्हें बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सबसे करीबी और सबसे भरोसेमंद नेता के रूप में भी जाना जाता है। उन्होंने बिहार सरकार में जल संसाधन विभाग (डब्ल्यूआरडी) और सूचना और जनसंपर्क विभाग (आईपीआरडी) सहित महत्वपूर्ण विभागों का जिम्मा उठाया है, अब उनके कंधों पर पार्टी की जिम्मेदारी सौंप दी गई है।

Sanjay Jha JDU Working President Nitish Kumar

नीतीश कुमार और संजय झा।

जानकारी के मुताबिक संजय झा ने सक्रिय राजनीति में वर्ष 2004-05 में एंट्री की थी, जिसके बाद साल 2006 में वो बिहार विधान परिषद के सदस्य (MLC) बने थे। वो 2024 तक एमएलसी रहे और तीन बार बिहार सरकार में जल संसाधन मंत्री रहे। फरवरी 2024 में वशिष्ठ नारायण सिंह की जगह संजय झा जनता दल (यूनाइटेड) से निर्विरोध राज्यसभा सांसद चुने गए।

राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में लिया गया बड़ा फैसला

जद (यू) नेता नीरज कुमार ने पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकिारिणी की बैठक के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए कहा, 'कार्यकारिणी में दो महत्वपूर्ण प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किये गए। पहला, राजनीतिक और दूसरा संगठनात्मक। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष व मुख्यमंत्री (नीतीश कुमार) जी ने पार्टी के राज्यसभा में संसदीय दल के नेता संजय झा को कार्यकारी अध्यक्ष बनाया।'

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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