Madhya Pradesh Politics: सोशल मीडिया पर अक्सर अदालत की सुनवाई वाले ऐसे वीडियो वायरल होते हैं, जिनमें जिलाधिकारियों, पुलिस अधिकारियों और सरकारी अफसरों को जज फटकार लगाते नजर आते हैं। कई वीडियोज में अधिकारियों को जो जज डांटते नजर आते हैं, उन्होंने अब राजनीति में अपनी किस्मत आजमाने का मन बना लिया है। यहां बात मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के पूर्व जस्टिस रोहित आर्य की हो रही है। आपको इस लेख में बताते हैं कि पूर्व जस्टिस रोहित आर्य कौन हैं, जिनकी वीडियो क्लिप ने सोशल मीडिया पर जमकर सुर्खियां बंटोरी।
पीएम मोदी से प्रभावित होकर भाजपा से जुड़े पूर्व जस्टिस
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश रोहित आर्य ने सेवानिवृत्त होने के तीन महीने बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का दामन थामकर सियासत में अपनी किस्मत आजमाने का फैसला किया है। उन्होंने भाजपा में शामिल होने के पीछे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जनोन्मुख विकास कार्य और पार्टी की नीतियों का हवाला दिया।
कौन हैं रोहित आर्य, कैसे बने हाईकोर्ट के जस्टिस?
न्यायमूर्ति रोहित आर्य ने भोपाल बीजेपी के दफ्तर में भाजपा की सदस्यता ली, उन्हें मध्य प्रदेश भाजपा प्रमुख डॉ, राघवेंद्र शर्मा ने पार्टी की सदस्यता दिलाई। पूर्व न्यायाधीश आर्य का जन्म 1962 में हुआ था, उन्होंने 1984 में एक वकील के रूप में अपना पंजीकरण कराया था। जिसके बाद साल 2003 में वो मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के एक अधिवक्ता बन गए। 12 सितंबर 2013 को रोहित आर्य को हाईकोर्ट के न्यायाधीश के रूप में प्रोमोट किया गया था और इसके बाद 26 मार्च 2015 को रोहित आर्य को स्थायी न्यायाधीश बना दिया गया था। वो बीते 27 अप्रैल, 2024 को रिटायर हुए हैं। उनसे जुड़ी ये जानकारी बार एंड बेंच की एक रिपोर्ट में दी गई है।
रोहित आर्य का वीडियो सोशल मीडिया पर होता है वायरल
सोशल मीडिया पर रोहित आर्य बेहद मशहूर हैं। पूर्व जस्टिस का वो वीडियो जमकर सुर्खियां बंटोरता है, जिसमें वो जिलाधिकारियों, सरकारी अफसरों और पुलिस अधिकारियों को जमकर डांट लगाते दिखते हैं। अधिकारियों को फटकार लगाने वाले कोर्ट के इन वीडियो क्लिप्स पर लाखों व्यूज आते रहे हैं। उनके ऐसे भी कई वीडियोज हैं, जिनमें अदालत के मामलों की सुनवाई करते हुए जस्टिस आर्य अपने कॉमिक अंदाज में अफसरों को फटकार लगाते दिख रहे हैं।
मुनव्वर फारुकी को जमानत देने से किया था इनकार
न्यायाधीश (सेवानिवृत्त) आर्य ने 2021 में हास्य कलाकार मुनव्वर फारुकी को जमानत देने से इनकार कर दिया था जिन पर इंदौर में एक कार्यक्रम के दौरान धार्मिक भावनाओं को आहत करने तथा कोविड-19 प्रोटोकॉल का उल्लंघन करने का आरोप था। भाजपा के एक नेता ने सोमवार को बताया कि आर्य शनिवार को भोपाल में पार्टी कार्यालय में एक कार्यशाला को संबोधित करने के बाद भाजपा में शामिल हो गए।
भारतीय न्याय संहिता के बारे में आर्य ने कही ये बात
भोपाल में भाजपा कार्यालय में नयी भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) पर एक कार्यशाला को संबोधित करते हुए आर्य ने इस कानून को आम आदमी को न्याय दिलाने के मकसद से एक बड़ा सुधार बताया। केंद्र सरकार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए आर्य ने बीएनएस के महत्व पर जोर दिया और अनुमान जताया कि यह महत्वपूर्ण सुधार लेकर आएगी।
आर्य ने कहा, 'भारतीय दंड संहिता को बदलकर भारतीय न्याय संहिता करना एक बड़ी बात है। मैं इसके लिए केंद्र सरकार के प्रति अपना आभार व्यक्त करता हूं। आने वाले दिनों में बीएनएस लोगों की जीवन में सुधार लेकर आएगी।' आर्य ने कहा कि वह प्रधानमंत्री मोदी के जनोन्मुख विकास कार्यों और पार्टी की नीतियों से प्रभावित होकर भाजपा में शामिल हो रहे हैं।
मुनव्वर फारुकी मामले पर रोहित आर्य ने जताई हैरानी
आर्य ने सोमवार को हाशिए पर रहने वाले नागरिकों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को सुनिश्चित करने की अपनी प्रतिबद्धता पर जोर दिया और कहा कि उनकी भलाई देश के सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए आवश्यक है। आर्य ने कहा कि उन्होंने आम लोगों से संबंधित मुद्दों पर कई अच्छे फैसले दिए हैं और उन्होंने हैरानी जतायी कि फारुकी मामले में उनके द्वारा पारित आदेश को बार-बार उजागर क्यों किया जाता है।
अपने करियर के दौरान की गई पहलों का जिक्र करते हुए आर्य ने ग्वालियर में ‘समाधान आपके द्वार’ कार्यक्रम को शुरू किए जाने के अवसर को याद किया जब वह एक प्रशासनिक न्यायाधीश थे। आर्य ने कहा, 'मैंने नौ जिलों में यह पहल शुरू की जिसके सार्थक परिणाम मिले। पहली बार, विभिन्न स्तरों पर लोगों की समस्याओं के समाधान के लिए न्यायपालिका, राजस्व, पुलिस, वन, बिजली और स्थानीय निकायों को एक साझा मंच पर लाया गया।'
