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कौन हैं MP हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश रोहित आर्य? जिन्होंने सोशल मीडिया पर खूब बंटोरी सुर्खियां; अब थामा BJP का दामन

Who is Rohit Arya: मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय (MP High Court) के पूर्व न्यायाधीश रोहित आर्य ने भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया है। क्या आप जानते हैं कि आखिर वो कौन हैं, जो अक्सर अदालत की सुनवाई के दौरान अधिकारियों को फटकार लगाते नजर आते थे। जानें खास बातें।

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BJP में शामिल हुए रोहित आर्य।

Madhya Pradesh Politics: सोशल मीडिया पर अक्सर अदालत की सुनवाई वाले ऐसे वीडियो वायरल होते हैं, जिनमें जिलाधिकारियों, पुलिस अधिकारियों और सरकारी अफसरों को जज फटकार लगाते नजर आते हैं। कई वीडियोज में अधिकारियों को जो जज डांटते नजर आते हैं, उन्होंने अब राजनीति में अपनी किस्मत आजमाने का मन बना लिया है। यहां बात मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के पूर्व जस्टिस रोहित आर्य की हो रही है। आपको इस लेख में बताते हैं कि पूर्व जस्टिस रोहित आर्य कौन हैं, जिनकी वीडियो क्लिप ने सोशल मीडिया पर जमकर सुर्खियां बंटोरी।

पीएम मोदी से प्रभावित होकर भाजपा से जुड़े पूर्व जस्टिस

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश रोहित आर्य ने सेवानिवृत्त होने के तीन महीने बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का दामन थामकर सियासत में अपनी किस्मत आजमाने का फैसला किया है। उन्होंने भाजपा में शामिल होने के पीछे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जनोन्मुख विकास कार्य और पार्टी की नीतियों का हवाला दिया।

कौन हैं रोहित आर्य, कैसे बने हाईकोर्ट के जस्टिस?

न्यायमूर्ति रोहित आर्य ने भोपाल बीजेपी के दफ्तर में भाजपा की सदस्यता ली, उन्हें मध्य प्रदेश भाजपा प्रमुख डॉ, राघवेंद्र शर्मा ने पार्टी की सदस्यता दिलाई। पूर्व न्यायाधीश आर्य का जन्म 1962 में हुआ था, उन्होंने 1984 में एक वकील के रूप में अपना पंजीकरण कराया था। जिसके बाद साल 2003 में वो मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के एक अधिवक्ता बन गए। 12 सितंबर 2013 को रोहित आर्य को हाईकोर्ट के न्यायाधीश के रूप में प्रोमोट किया गया था और इसके बाद 26 मार्च 2015 को रोहित आर्य को स्थायी न्यायाधीश बना दिया गया था। वो बीते 27 अप्रैल, 2024 को रिटायर हुए हैं। उनसे जुड़ी ये जानकारी बार एंड बेंच की एक रिपोर्ट में दी गई है।

रोहित आर्य का वीडियो सोशल मीडिया पर होता है वायरल

सोशल मीडिया पर रोहित आर्य बेहद मशहूर हैं। पूर्व जस्टिस का वो वीडियो जमकर सुर्खियां बंटोरता है, जिसमें वो जिलाधिकारियों, सरकारी अफसरों और पुलिस अधिकारियों को जमकर डांट लगाते दिखते हैं। अधिकारियों को फटकार लगाने वाले कोर्ट के इन वीडियो क्लिप्स पर लाखों व्यूज आते रहे हैं। उनके ऐसे भी कई वीडियोज हैं, जिनमें अदालत के मामलों की सुनवाई करते हुए जस्टिस आर्य अपने कॉमिक अंदाज में अफसरों को फटकार लगाते दिख रहे हैं।

मुनव्वर फारुकी को जमानत देने से किया था इनकार

न्यायाधीश (सेवानिवृत्त) आर्य ने 2021 में हास्य कलाकार मुनव्वर फारुकी को जमानत देने से इनकार कर दिया था जिन पर इंदौर में एक कार्यक्रम के दौरान धार्मिक भावनाओं को आहत करने तथा कोविड-19 प्रोटोकॉल का उल्लंघन करने का आरोप था। भाजपा के एक नेता ने सोमवार को बताया कि आर्य शनिवार को भोपाल में पार्टी कार्यालय में एक कार्यशाला को संबोधित करने के बाद भाजपा में शामिल हो गए।

भारतीय न्याय संहिता के बारे में आर्य ने कही ये बात

भोपाल में भाजपा कार्यालय में नयी भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) पर एक कार्यशाला को संबोधित करते हुए आर्य ने इस कानून को आम आदमी को न्याय दिलाने के मकसद से एक बड़ा सुधार बताया। केंद्र सरकार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए आर्य ने बीएनएस के महत्व पर जोर दिया और अनुमान जताया कि यह महत्वपूर्ण सुधार लेकर आएगी।

आर्य ने कहा, 'भारतीय दंड संहिता को बदलकर भारतीय न्याय संहिता करना एक बड़ी बात है। मैं इसके लिए केंद्र सरकार के प्रति अपना आभार व्यक्त करता हूं। आने वाले दिनों में बीएनएस लोगों की जीवन में सुधार लेकर आएगी।' आर्य ने कहा कि वह प्रधानमंत्री मोदी के जनोन्मुख विकास कार्यों और पार्टी की नीतियों से प्रभावित होकर भाजपा में शामिल हो रहे हैं।

मुनव्वर फारुकी मामले पर रोहित आर्य ने जताई हैरानी

आर्य ने सोमवार को हाशिए पर रहने वाले नागरिकों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को सुनिश्चित करने की अपनी प्रतिबद्धता पर जोर दिया और कहा कि उनकी भलाई देश के सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए आवश्यक है। आर्य ने कहा कि उन्होंने आम लोगों से संबंधित मुद्दों पर कई अच्छे फैसले दिए हैं और उन्होंने हैरानी जतायी कि फारुकी मामले में उनके द्वारा पारित आदेश को बार-बार उजागर क्यों किया जाता है।

अपने करियर के दौरान की गई पहलों का जिक्र करते हुए आर्य ने ग्वालियर में ‘समाधान आपके द्वार’ कार्यक्रम को शुरू किए जाने के अवसर को याद किया जब वह एक प्रशासनिक न्यायाधीश थे। आर्य ने कहा, 'मैंने नौ जिलों में यह पहल शुरू की जिसके सार्थक परिणाम मिले। पहली बार, विभिन्न स्तरों पर लोगों की समस्याओं के समाधान के लिए न्यायपालिका, राजस्व, पुलिस, वन, बिजली और स्थानीय निकायों को एक साझा मंच पर लाया गया।'

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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