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कोरोना अब वैश्विक संकट नहीं: कैसे फैला, कितनी मौतें, चीन से क्या कनेक्शन और भारत में क्या स्थिति?

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated May 6, 2023, 03:00 PM IST

Global Health Emergency: विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से 30 जनवरी, 2020 को कोरोना महामारी को ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी घोषित किया गया था। 31 दिसंबर, 2019 को विश्व स्वास्थ्य संगठन ने बताया था कि वुहान में फ्लू जैसी बीमारी फैल रही है, जिसे कोरोना वायरस नाम दिया गया।

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कोरोना अब वैश्विक संकट नहीं: कैसे फैला, कितनी मौतें, चीन से क्या कनेक्शन और भारत में क्या स्थिति?

Global Health Emergency: विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organization) की ओर से शुक्रवार को कोरोना वायरस(Corona virus) को लेकर बड़ा अपडेट दिया गया। WHO ने कोरोना महामारी (Covid-19) के दर्जे को घटाकर अब इसे वैश्विक महामारी की श्रेणी से बाहर कर दिया है। इसका सीधा मतलब यह हुआ कि दुनिया में अब कोरोना वैश्विक आपात स्थिति (Global Health Emergency) नहीं रह गई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की ओर से यह अपडेट तब दिया गया है, जब दुनियाभर में चलाए गए वैक्सीनेशन (Covid-19 Vaccination)अभियान के बाद संक्रमितों की संख्या घट रही है और हॉस्पिटलाइजेशन रेट भी कम हो रहे हैं।

हालांकि, यह सदी कोरोना महामारी के गंभीर ग्रहण काल को कभी भूल नहीं पाएगी। यह एक ऐसी त्रासदी रही है, जिसने दुनियाभर में लाखों जानें ली और बहुतों का सबकुछ खत्म हो गया। WHO प्रमुख टेड्रोस अदनोम घेब्रेयस का कहना है कि कोरोना को ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी के तौर पर खत्म करने का ऐलान किया जा रहा है। हालांकि, इसका यह मतलब नहीं है कि कोरोना पूरी तरह खत्म हो गया है। ऐसे में यहां हम जानते हैं कि कोरोना को ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी कब घोषित किया गया? इसकी शुरुआत कब से हुई? दुनियाभर में कोरोना से कितनी मौतें हुईं और भारत में क्या स्थिति रही?

कब घोषित की गई हेल्थ इमरजेंसी?

विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से 30 जनवरी, 2020 को कोरोना महामारी को ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी घोषित किया गया था। विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से कोरोना को लेकर कई एडवाइजरी भी जारी की गई थी। दुनिया के लगभग तमाम देशों ने अपने देश की सीमाओं को बंद कर दिया था।

अब चीन से क्या कनेक्शन?

दुनिया में जब भी कोरोना महामारी का नाम आएगा, इसका कनेक्शन चीन से जरूर जुड़ेगा। दरअसल, ऐसा माना जाता है कि चीन की वुहान लैब से ही कोरोना महामारी दुनिया में फैली। दरअसल, 31 दिसंबर, 2019 को विश्व स्वास्थ्य संगठन ने बताया था कि वुहान में फ्लू जैसी बीमारी फैल रही है, जिसे कोरोना वायरस नाम दिया गया। यह वही दिन था, जब चीन के वुहान में सीफूड मार्केट को बदं कर दिया गया था।

दुनियाभर में कितनी मौतें?

कोरोना वायरस के कारण दुनिया ने तबाही का सबसे खौफनाक रूप देखा है। इस बीमारी के कारण दुनियाभर में करीब 70 लाख (6,921,614) मौतें हुई हैं। वहीं, अब तक 765,222,932 लोग इस बीमारी से संक्रमित हो चुके हैं।

भारत में क्या स्थिति?देश में कोरोना की अब तक तीन लहरें आ चुकी है। भारत में कोरोना का पहला मामला 30 जनवरी,2020 को केरल में रिपोर्ट किया गया था। 17 दिसंबर, 2020 को कोरोना अपने पीक पर था। पहली लहर में 1.08 करोड़ मामले सामने आए और 1.55 लाख मौतें हुई। वहीं दूसरी लहर मार्च 2021 में शुरू हुई। इसमें 1.60 करोड़ मरीज और 1.69 लाख मौतें हुई। वहीं तीसरी लहर में करीब 50 लाख मरीज और 10 हजार से ज्यादा मौतें हुईं। वहीं, जिस समय विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोरोना को वैश्विक बीमारी के दर्जे से बाहर किया, उस समय तक देश में 33,232 सक्रिय कोरोना मरीज थे। देश में अब तक कोरोना से 4,49,64,289 लोग संक्रमित हुए हैं।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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