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क्या होता है ओवरफ्लाइट शुल्क? एयरस्पेस बंद करने से पाकिस्तान को कितना होगा नुकसान

What is overflight fee : ओवरफ्लाइट शुल्क वह चार्ज है जिसे देश अपने एयरस्पेस का इस्तेमाल करने पर विमानन कंपनियों पर लगाते हैं। विमान कई देशों के हवाई क्षेत्रों से गुजरते हुए अपनी यात्रा पूरी करते हैं। विमानन कंपनियों से मिलने वाला शुल्क सरकारों और विमानन प्राधिकरणों को हवाई यातायात नियंत्रण और नेविगेशन सेवाओं के रखरखाव और संचालन की लागत कम करने में मदद करता है।

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भारत के लिए पाकिस्तान ने अपना एयरस्पेस बंद किया है।

What is overflight fee : पहलगाम में बीते 22 अप्रैल को हुए आतंकवादी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव काफी बढ़ गया है। इस हमले में 26 लोगों की जान गई जिनमें ज्यादातर पर्यटक थे। इस आतंकवादी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ कई कूटनीतिक कदम उठाए हैं। पाकिस्तान पर 'आर्थिक प्रहार' भी हुआ है। भारत ने पाकिस्तानी विमानों के लिए अपना एयरस्पेस बंद कर दिया है। पाकिस्तान की जो विमानन कंपनियां भारतीय एयरस्पेस इस्तेमाल करती थीं अब उन्हें अपना मार्ग बदलकर अपनी यात्रा पूरी करनी होगी।

भारत-पाकिस्तान दोनों ने बंद किया अपना एयरस्पेस

यानी पाकिस्तानी विमान को यदि बांग्लादेश जाना है तो उसे अब चीन अथवा श्रीलंका होकर ढाका जाना होगा। इससे विमानन कंपनियों की लागत और खर्च काफी बढ़ जाएगी। दूसरा, अपना एयरस्पेस बंद करने से भारत को भी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा क्योंकि ओवरफ्लाइट शुल्क के रूप में पाकिस्तानी विमानन कंपनियां जो भुगतान करती थीं वह अब बंद हो जाएगा। ऐसा ही पाकिस्तान के साथ भी है। पाकिस्तान ने भी भारतीय विमानों के लिए अपना एयरस्पेस बंद कर दिया है। ऐसे में भारतीय विमानन कंपनियों से पाकिस्तान को मिलने वाला ओवरफ्लाइट शुल्क अब बंद हो जाएगा। यानी उसे भी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।

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क्या होता है ओवरफ्लाइट शुल्क?

ओवरफ्लाइट शुल्क वह चार्ज है जिसे देश अपने एयरस्पेस का इस्तेमाल करने पर विमानन कंपनियों पर लगाते हैं। विमान कई देशों के हवाई क्षेत्रों से गुजरते हुए अपनी यात्रा पूरी करते हैं। विमानन कंपनियों से मिलने वाला शुल्क सरकारों और विमानन प्राधिकरणों को हवाई यातायात नियंत्रण और नेविगेशन सेवाओं के रखरखाव और संचालन की लागत कम करने में मदद करता है। ये शुल्क दो प्रकार के होते हैं। पहला है रूट नेविगेशन शुल्क जो कि किसी देश के ऊपर उड़ान भरी गई दूरी और विमान के वजन के आधारित होता है। दूसरा है महासागरीय शुल्क। यह शुल्क महासागरों के ऊपर नियंत्रित हवाई क्षेत्र के उपयोग के लिए देना होता है। प्रत्येक देश अपने स्वयं के दरें और नियम निर्धारित करता है। एयरलाइंस इन लागतों को अपनी उड़ान योजना में शामिल करती हैं।

IA को हो सकता है 600 मिलियन डॉलर का नुकसान

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तानी एयरस्पेस बंद होने से होने वाले नुकसान को लेकर एयर इंडिया ने सरकार को पत्र लिखा है। एयर इंडिया ने कहा कि पाकिस्तानी एयरस्पेस यदि एक साल तक बंद रहता है तो उसे करीब 600 मिलियन डॉलर का नुकसान हो सकता है। इस नुकसान बचने के लिए कंपनी ने सरकार से सब्सिडी की मांग की है। एयर इंडिया के विमान अक्सर पाकिस्तान के हवाई क्षेत्र से होकर यूरोप, अमेरिका और कनाडा के लिए उड़ान भरते हैं।

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2019 में भी बंद किया था अपना एयरस्पेस

भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा उड्डयन बाजार है और यह तेजी से आगे बढ़ रहा है। भारत से यूरोप और अमेरिका जाने वाली ज्यादातर विमान पाकिस्तानी हवाई क्षेत्र से होकर जाते हैं, इसके बदले में ओवरफ्लाइट शुल्क के रूप में पाकिस्तान को मोटी रकम मिलती रही है। अब अपना हवाई क्षेत्र बंद करना पाकिस्तान को काफी महंगा पड़ेगा। यह पहली बार नहीं है जब पाकिस्तान ने भारतीय विमानन कंपनियों के लिए अपना एयरस्पेस बंद किया है। 2019 में पुलवामा आतंकवादी हमले के बाद भारत ने बालाकोट में एयरस्ट्राइक की थी। इसके बाद पाकिस्तान ने अपना हवाई क्षेत्र बंद किया था।

पाक को 2019 में 100 मिलियन डॉलर का हुआ नुकसान

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक पिछली बार 2019 में पाकिस्तान ने जब अपना एयरस्पेस बंद किया तो उसे करीब 100 मिलियन डॉलर का नुकसान हुआ था। उस दौरान एयरस्पेस बंद होने से रोजाना करीब 400 फ्लाइट की उड़ानें प्रभावित होती थीं। इससे पाकिस्तान के सिविल एविएशन अथॉरिटी (सीएए) और पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइन (PIA) को भारी आर्थिक नुकसान हुआ।

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रोजाना करीब 232,000 डॉलर का नुकसान हुआ

रिपोर्टों के मुताबिक बोइंग 737 पाकिस्तान के हवाई क्षेत्र का यदि इस्तेमाल करता है तो उसे ओवरफ्लाइट शुल्क के रूप में करीब 580 डॉलर देना होगा। बड़े आकार वाले विमानों के लिए यह शुल्क ज्यादा हो सकता है। अधिकारियों का अनुमान है कि उस दौरान एयरस्पेस बंद होने से पाकिस्तान को ओपरफ्लाइट शुल्क के रूप में रोजाना करीब 232,000 डॉलर का नुकसान हुआ। इसमें यदि लैंडिंग और पार्किंग के शुल्क को भी यदि जोड़ लिया जाए तो यह बढ़कर करीब 300,000 डॉलर हो जाता है।

Alok Rao
आलोक कुमार रावauthor

19 वर्षों से मीडिया जगत में सक्रिय आलोक राव ने प्रिंट, न्यूज एजेंसी, टीवी और डिजिटल चारों ही माध्यमों में काम किया है। इस लंबे अनुभव ने उन्हें समाचारों की समझ, प्रेजेंटेशन, डिटेलिंग और न्यूजरूम डायनेमिक्स में असाधारण दक्षता प्रदान की है। राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों में विशेष रुचि रखने के साथ-साथ जियो-पॉलिटिक्स एवं डिफेंस की स्टोरीज में इनकी खासी दिलचस्पी है। आलोक ने अलग-अलग माध्यमों में काम करते हुए समाचारों की समझ, प्रस्तुति और विश्लेषण में मजबूत दक्षता विकसित की है और अब तक 25,000 से अधिक आर्टिकल तैयार कर चुके हैं। तथ्यों की गहन जांच, मजबूत न्यूज सेंस और तेज निर्णय क्षमता उनकी पत्रकारिता की प्रमुख खासियतें हैं।

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