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फर्जी कागजात, सेना की जमीन... क्या है वो घोटाला? जिसमें गिरफ्तार हुए झारखंड के CM हेमंत सोरेन

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Jan 31, 2024, 10:18 PM IST

Jharkhand Land Scam Case: IAS अधिकारी छवि रंजन की गरिफ्तारी के बाद ईडी के अधिकारी जमीन घोटाले की तार जोड़ते चले गए, जिसके बाद मामला मुख्यमंत्री आवास तक पहुंच गया। ईडी को बड़ी सफलता तब मिली, जब बीते साल अगस्त में प्रेम प्रकाश नाक के शख्स को गिरफ्तार किया गया।

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हेमंत सोरेन जमीन घोटाले में गिरफ्तार

Photo : Times Now Digital

What is Jharkhand Land Scam Case: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बुधवार रात अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इसी के साथ सोरेन सरकार में परिवहन मंत्री चंपई सोरेन को विधायक दल का नेता भी चुन लिया गया है। माना जा रहा कि चंपई सोरेन झारखंड के नए मुख्यमंत्री होंगे। उन्होंने राजभवन पहुंचकर 43 विधायकों के समर्थन वाला पत्र भी राज्यपाल को सौंप दिया है और सरकार बनाने का दावा पेश किया है।

इस बीच खबर है कि जमीन घोटाले में लंबी पूछताछ के बाद प्रवर्तन निदेशायल (ED) ने हेमंत सोरेन को हिरासत में ले लिया है। हालांकि, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। झारखंड मुक्ति मोर्चा सांसद महुआ मांझी ने दावा किया कि हेमंत सोरेन ईडी की हिरासत में हैं। आइए जानते हैं उस जमीन घोटाले के बारे में, जिसकी आंच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन तक पहुंची और आज उन्हें गिरफ्तार भी होना पड़ा।

क्या है पूरा मामला

रांची बरायतु पुलिस थाने में जमीन विवाद को लेकर एक एफआईआर दर्ज कराई गई। इस एफआईआर में रांची नगर निगम के टैक्स कलेक्टर दिलीप शर्मा ने प्रादीप बागची नाम के शख्स को आरोपी बनाया था। एफआईआर में कहा गया था कि प्रदीप बागची ने फर्जी कागजातों के जरिए भारतीय सेना की एक जमीन को हड़प लिया है। इस मामले की जांच शुरू हुई तो पता चला कि यह जमीन बीएम लक्ष्मण राव की थी, जिन्होंने आजादी के बाद इसे भारतीय सेना को सौंप दिया था। ईडी ने इसके बाद पूरे मामले में प्रदीप बागची समेत सात लोगों को गिरफ्तार किया। इनमें दो लोग सरकारी कर्मचारी थे। ईडी ने इस मालले में आगे जांच शुरू की तो इसमें वरिष्ठ IAS अधिकारी छवि रंजन का नाम भी सामने आया, जिसके बाद बीते साल 4 मई को छवि रंजन को ईडी ने गिरफ्तार कर लिया। उन पर आरोप था कि जमीन की अवैध रखीद और बिक्री में उन्होंने मदद की थी।

हेमंत सोरेन तक पहुंची जांच

IAS अधिकारी छवि रंजन की गरिफ्तारी के बाद ईडी के अधिकारी जमीन घोटाले की तार जोड़ते चले गए, जिसके बाद मामला मुख्यमंत्री आवास तक पहुंच गया। ईडी को बड़ी सफलता तब मिली, जब कथित जमीन घोटाले में बीते साल अगस्त में प्रेम प्रकाश नाक के शख्स को गिरफ्तार किया गया, इसे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का करीबी माना जाता है। इसके बाद ईडी ने बार-बार हेमंत सोरेन को पूछताछ के लिए समन भेजे लेकिन वे इससे बचते रहे।

कैसे हुई गिरफ्तारी

ईडी ने हेमंत सोरेन के नई दिल्ली में शांति निकेतन स्थित आवास पर सोमवार को छापा मारा। यहां से ईडी ने 36 लाख रुपए कैश, एक बीएमडब्ल्यू कार और कुछ दस्तावेज बरामद किए थे। बुधवार को पूछताछ के दौरान ईडी ने उनसे इसके बारे में कई सवाल पूछे, सोरेन ने इस बात से इनकार किया कि कैश और कार उनकी है। इसके अलावा रांची के बड़गाईं अंचल की करीब चार एकड़ जमीन के स्वामित्व को लेकर पूछे गए सवालों पर सोरेन के जवाब से ईडी के अफसर संतुष्ट नहीं हुए, जिसके बाद उन्हें हिरासत में ले लिया गया।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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